आम आदमी को समझ में आने लायक लेखा जोखा होगा

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जब तक आम परिवार के मुंह से विकास के लिए ‘वाह’ नहीं निकलता , तब तक ‘विकास’ नहीं हो

अभिनव राजस्थान में ‘विकास’

  • आम आदमी को समझ में आने लायक लेखा जोखा होगा

हमारे लिए विकास का मतलब सीधा सा है- प्रत्येक परिवार की आमदनी और उसके मिलने वाली सुविधाओं में बढ़ोतरी। बड़े स्तर पर हम इसे किसा गाँव या शहर की आमदनी और सुविधाओं में विस्तार कह सकते हैं। इसके अलावा विकास का कोई अर्थ नहीं है। ये जो हल्ला हमारे चुने हुए ‘राजा’ कर रहे हैं, यह विकास नहीं है। क्योंकि इस विकास को हम अपने घर में या मोहल्ले-गली में प्रत्यक्ष देख नहीं पा रहे हैं। विकास अखबार या चेनल में दिखाई देता है । हम खाली आँखों से विकास के इस तमाशे को लोकतंत्र के तमाशे की तरह देखते रहते हैं । उधार के शब्दों की जुगाली करके दलों को अच्छा बुरा कहते रहते हैं। इसमें हमारा स्वयं का या घर-गाँव-शहर का प्रत्यक्ष अनुभव कुछ नहीं होता है।

अभिनव राजस्थान में प्रत्येक गाँव-शहर की आमदनी का लेखा-जोखा होगा, एक पारदर्शी सूची तैयार होगी। राजस्थान के लगभग 200 शहरों और 40 हजार गाँवों की, खेती से, उद्योग से, सेवाओं से इनकी एक वर्ष में कितनी आमदनी होती है और इनको मिलने वाली छः प्रमुख सुविधाओं यथा शिक्षा-स्वास्थ्य-बिजली-पानी-सड़क-सुरक्षा का आम आदमी को समझ में आने लायक लेखा जोखा होगा। अभी के लेखे जोखे अंग्रेजी में होते हैं और ये नेताओं-अफसरों को खुद को ही समझ नहीं आते हैं।

फिर पांच वर्षों में इन गाँवों-शहरों की आमदनी और सुविधाओं को बढ़ाने की स्पष्ट योजना तैयार होगी। ऐसी योजना, जो उस गाँव-शहर की आवश्यकताओं के अनुसार हो। ऐसी योजना जो उस गाँव-शहर के लोगों को व्यवहारिक लगे। एक गाँव के लिए लगभग पांच करोड़ और एक मंझोले कस्बे के लिए बीस करोड़ की योजना। फिर प्रत्येक वर्ष इस योजना की समीक्षा। उस गाँव या शहर के लोगों के द्वारा समीक्षा। न कि नेताओं या अफसरों द्वारा, अगर उस गाँव या शहर के लोग कहते हैं कि इस योजना से उनका जीवन सरल और समृद्ध होने लगा है तो समझिये कि ‘विकास’ हो रहा है !

एक सरल उदाहरण के तौर पर इस योजना में खेतों के लिए उन्नत बीज दिया जायेगा, पशुओं के लिए चारा होगा, युवाओं के लिए छोटे उद्योग होंगे, स्कूल में सभी विषयों के अध्यापक होंगे, समिति स्तर पर अस्पताल में सभी विशेषज्ञ होंगे, शानदार सडकें होंगी, हर घर में प्रतिदिन पेयजल का वितरण होगा, 24 घंटे सस्ती बिजली होगी, एक फोन मेसेज पर पुलिस तुरंत हाजिर होगी।

इस विकास में गाँव या शहर में उपलब्ध पेड़ों की संख्या भी होगी और सफाई व्यवस्था भी होगी तो गाँव-शहर  के मेलों-त्यौहारों का लेखा जोखा भी होगा.।गाँव के नृत्य-खेल-नाटक-चित्रों का भी सुन्दर वर्णन होगा।

अभी जो भारत और राजस्थान की GDP निकलती है, वह अभिनव राजस्थान में एक एक गाँव और शहर की निकलेगी, तभी एक मीटर के रूप में हम अपने गाँव या शहर को बढ़ता हुआ देख पाएंगे।

जब तक आम परिवार के मुंह से विकास के लिए ‘वाह’ नहीं निकलता है श्रीमान्, तब तक ‘विकास’ नहीं हो रहा है। अखबार या चेनल में विज्ञापन देने की फिर जरूरत ही नहीं होगी। विकास हुआ है तो जनता महसूस कर लेगी और उसी आधार पर वोट कर लेगी।