कैसा राजस्थान चाहिए

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अभिनव राजस्थान वह व्यवस्था होगी, जिसकी रचना हमें 1947 में कर लेनी चाहिए थी  लेकिन भारत के तब के और इसके बाद के राजनेता, ‘राज’ के चक्कर में ऐसे फंसे कि इस भारतीय भूगोल और संस्कृति आधारित व्यवस्था की योजना बनाने से ही बचते रहे. जैसा ‘अन्ग्रेजदां’ अफसरों ने उन्हें बताया, उसे ही ‘योजना’ कहकर गुमराह करते रहे. विकास इसी वजह से नहीं हुआ. और अब तो यह विकास की गाड़ी back भी चलने लगी है. कॉलेज और विश्विद्यालय में पढ़ाई का रुक जाना बहुत बड़ा संकेत है. खेती से किसान का भागना बड़ा संकेत है. कुटीर उद्योग से कारीगर का दूर भागना बड़ा संकेत है. सडकों का बनते ही टूट जाना, समाज में अश्लीलता का प्रसार, नदियों-पहाड़ियों का सिमट जाना, त्यौहारों और मेलों की गरिमा में कमी भी अनियोजित समाज और देश के संकेत है.

अभिनव राजस्थान में कई व्यवहारिक योजनाएं हैं, जो पहले राजस्थान और फिर देश के अन्य भागों में विशुद्ध भारतीय मगर आधुनिक समृद्ध व्यवस्था बनाएंगी. जो, भगत सिंह और सुभाष चन्द्र बोस के सपनों का भारत बनाएंगी. जो असल में वन्दे मातरम कर देंगी.

25 दिसम्बर को अभियान के जयपुर सम्मेलन में राजस्थान के लोग घोषणा कर देंगे कि वे अपने परिवार और अपने देश के लिए कैसा राजस्थान चाहते हैं. एकदम स्पष्ट रूप से. 300 पेज की पुस्तक के रूप में. राजस्थान के लिए यह पहला समग्र प्लान होगा, जो आमजन के दिल के करीब होगा.