जयपुर में सिविल लाइंस नहीं होगी !

1342
53

महावीर पारीक नागौर :अभिनव राजस्थान में जयपुर में सिविल लाइंस नहीं होगी !                

नव-सामंतवाद के ये प्रतीक, बड़े-बड़े बंगले, लोकतंत्र में अच्छे नहीं लगते हैं.

जहां अभी ये बंगले हैं, उनमें से कुछ को बहुमंजिला इमारतों में बदल दिया जाएगा. आधुनिक सुविधाओं और व्यवस्थित पार्किंग-सुरक्षा के साथ. सुविधाएँ होंगी, ‘झूठी शान’ कम होगी. सभी मंत्री (मुख्यमंत्री सहित), विधायक और अफसर ऐसे फ्लेट्स में ही रहेंगे. आम जनता इधर आनी नहीं है. अभिनव राजस्थान के पूर्णतया पारदर्शी और जवाबदेह शासन के होने पर वैसे भी जनता को इनके पास आने की कम ही जरूरत होगी. जब आम घर बैठे और बिना पक्षपात के होगा, तब कौन जयपुर में धक्के खाता फिरेगा इनके आगे पीछे ? इसलिए कम जगह में अधिक भीड़ होने की आशंका भी नहीं होगी.

बची हुई जगह से जनता के लिए स्वास्थ्य, खेलकूद और परिवहन की सुविधाएं सृजित की जायेंगी. एक बड़ा और आधुनिक बस स्टेंड बनाया जाएगा, जहां गाँवों और कस्बों से आने वाली बसों का ठहरना होगा ताकि ग्रामीणों को अस्पताल और बाजार नजदीक पड़े. सभी संभाग और जिला-उपखंड मुख्यालयों पर भी यही होगा. बंगला संस्कृति ख़त्म होगी. आयुक्तों, कलक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के विशाल आवास नहीं होंगे. जनता के पैसे से जनता पर ही यह रुआब बहुत हो लिया.
लोकतंत्र में यह शोभा नहीं देता.

इस नई व्यवस्था से क्या फायदा ?

तीन बड़े फायदे एक साथ होंगे. पहला तो यह कि लोकतंत्र दिखाई देगा, राजतंत्र की विदाई होगी. लोगों के मन से गुलामी का भाव विदा होगा. दूसरे, इन बंगलों में घुसने के लिए महंगे चुनावों में हमारे समाज की प्रतिभाएं नहीं उलझेंगी. और न ही सामान्य प्रशासन में प्रवेश पाने के लिए डॉक्टर, इंजीनीयर या CA तड़पेंगे ! उनको अपने व्यवसाय में ही आनंद और सम्मान मिलेगा. ‘साहब’ की जगह हरा तरफ समाज के सहयोगी दिखाई देंगे. तब वे ही शासन व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने आगे आयेंगे, जिनको समाज और देश के विकास का जूनून होगा. तीसरे, इस व्यवस्था से विकास प्राथमिकता हो जायेगा, अभी ‘राज’ और ‘व्यक्तिगत लाभ’ प्राथमिकता है.

25 दिसम्बर 2016 को विमोचित होने वाली हमारी पुस्तक में से. इसमें अभिनव राजस्थान की नई व्यवस्था के ऐसे कई व्यवहारिक विषय आमजन की राय के लिए रखे जायेंगे. जनमत के बिना कोई भी नई व्यवस्था नहीं चलेगी. पहले यह बने. 2017 में इस नई व्यवस्था के लिए जनमत जुटाया जाएगा. जनमत बनने पर ही आगे की कारवाई होगी.