आज का दिन 03/11/2016

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आपका आज का दिन मंगलमय हो
तृतीया, शुक्ल पक्ष
कार्तिक
“”””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि——तृतीया 06:37:04 तक
पक्ष————–शुक्ल
नक्षत्र——ज्येष्ठा20:46:02
योग——अतिगंड25:18:15
करण——-गरज06:37:04
करण——वाणिज19:46:16
वार————-गुरूवार
माह————-कार्तिक
चन्द्र राशि–  वृश्चिक 20:46:02
चन्द्र राशि—–धनु 20:46:02
सूर्य राशि———– तुला
रितु निरयन———शरद
रितु सायन———हेमन्त
आयन———-दक्षिणायण
संवत्सर————दुर्मुख
संवत्सर (उत्तर)—————सौम्य
विक्रम संवत———2073
विक्रम संवत (कर्तक)——-2073
शक संवत———1938

सूर्योदय———06:32:32
सूर्यास्त———17:32:34
दिन काल——–11:00:01
रात्री काल——–13:00:40
चंद्रोदय———09:18:04
चंद्रास्त———20:20:19

लग्न—-  तुला16°57′ , 196°57′

सूर्य नक्षत्र———-स्वाति
चन्द्र नक्षत्र———ज्येष्ठा

???पद, चरण???

या ज्येष्ठा 07:22:523

यी ज्येष्ठा 14:04:514

यू ज्येष्ठा 20:46:021

ये मूल 27:26:19*

???ग्रह गोचर???

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
=======================
सूर्य=तुला 16° 58′ स्वाति , 4 ता
चन्द्र=वृश्चिक22°25′ ज्येष्ठा, 2 या
बुध=तुला 19 ° 24′ विशाखा, 1 ती
शुक्र=वृश्चिक 24°32’ज्येष्ठा, 3 यी
मंगल=मकर 04 ° 35′ उ o षा o ,2 भो
गुरु=कन्या 17 ° 44′ हस्त , 3 ण
शनि=वृश्चिक19°48′ ज्येष्ठा , 1 नो
राहू=सिंह15°47′ पूर्वा फाल्गुनी, 1 मो
केतु=कुम्भ 15 ° 47′ शतभिषा, 3 सी

???शुभा$शुभमुहूर्त???

राहू काल 13:25 – 14:48अशुभ
यम घंटा 06:33 – 07:55अशुभ
गुली काल 09:18 – 10:40अशुभ
अभिजित 11:41 -12:25शुभ
दूर मुहूर्त 10:13 – 10:57अशुभ
दूर मुहूर्त 14:37 – 15:21अशभ

?गंड मूल अहोरात्र अशुभ

?चोघडिया, दिन
शुभ 06:33 – 07:55शुभ
रोग 07:55 – 09:18अशुभ
उद्वेग 09:18 – 10:40अशुभ
चाल 10:40 – 12:03शुभ
लाभ 12:03 – 13:25शुभ
अमृत 13:25 – 14:48शुभ
काल 14:48 – 16:10अशुभ
शुभ 16:10 – 17:33शुभ

?चोघडिया, रात
अमृत 17:33 – 19:10शुभ
चाल 19:10 – 20:48शुभ
रोग 20:48 – 22:25अशुभ
काल 22:25 – 24:03*अशुभ
लाभ 24:03* – 25:40*शुभ
उद्वेग 25:40* – 27:18*अशुभ
शुभ 27:18* – 28:56*शुभ
अमृत 28:56* – 30:33*शुभ

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

?दिशा शूल ज्ञान———–पश्चिम

परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा वेसन का हलुआ खाके यात्रा कर सकते है l

?अग्नि वास ज्ञान -:

3 + 5 + 1 = 9 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

? शिव वास एवं फल -:

3 + 3 + 5 = 11 ÷ 7 = 4 शेष

सभायां = सन्ताप कारक

?भद्रा विचार एवं फल -:

सांय 19:46 से प्रारम्भ

स्वर्ग लोक = शुभ कारक