आज का दिन 09/11/2016

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%c2%b8evwपंडित आनंद मेहता गढ़गणेश मंदिर, जयपुर

आपका आज का दिन मंगलमय हो

दिनाँक -: 09/11/2016
नवमी, शुक्ल पक्ष
कार्तिक
“”””””””””””””””””””””””'”””””””””””””( समाप्ति काल )

तिथि——-नवमी12:45:12 तक
पक्ष————–शुक्ल
नक्षत्र—-शतभिषा 28:09:02
योग———घ्रुव21:51:13
करण——-कौलव12:45:12
करण——-तैतिल 24:09:25
वार————-बुधवार
माह————-कार्तिक
चन्द्र राशि———-  कुम्भ
सूर्य राशि———–  तुला
रितु निरयन———-शरद
रितु सायन———-हेमन्त
आयन———-दक्षिणायण
संवत्सर————दुर्मुख
संवत्सर (उत्तर)————–सौम्य
विक्रम संवत———2073
विक्रम संवत (कर्तक)——–2073
शक संवत———1938

सूर्योदय———06:36:53
सूर्यास्त———17:28:51
दिन काल——–10:51:57
रात्री काल——-13:08:47
चंद्रोदय———13:52:44
चंद्रास्त———25:43:18

लग्न——तुला22°58′ , 202°58

‘सूर्य नक्षत्र——–विशाखा
चन्द्र नक्षत्र——–शतभिषा

???पद, चरण???

गो शतभिषा 10:34:052

सा शतभिषा 16:28:403

सी शतभिषा 22:20:194

सू शतभिषा 28:09:02

???ग्रह गोचर???

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
=======================
सूर्य=तुला 22° 58′ विशाखा , 1 ती
चन्द्र=कुम्भ 07° 25′ शतभिषा, 1गो
बुध=तुला 00 ° 21′ विशाखा, 4 तो
शुक्र=धनु 00 ° 32′ ज्येष्ठा, 1 ये
मंगल=मकर 05 ° 35′ उ o षा o ,3 जा
गुरु=कन्या 18 ° 44′ हस्त , 3 ण
शनि=वृश्चिक21°48′ ज्येष्ठा , 2 या
राहू=सिंह15°01′ पूर्वा फाल्गुनी, 1 मो
केतु=कुम्भ 15 ° 01′ शतभिषा, 3 सी

???शुभा$शुभमुहूर्त???

राहू काल 12:03 – 13:24अशुभ
यम घंटा 07:58 – 09:20अशुभ
गुली काल 10:41 – 12:03अशुभ
अभिजित 11:41 -12:25अशुभ
दूर मुहूर्त 11:41 – 12:25अशुभ

?पंचक अहोरात्र अशुभ

?चोघडिया, दिन
लाभ 06:37 – 07:58शुभ
अमृत 07:58 – 09:20शुभ
काल 09:20 – 10:41अशुभ
शुभ 10:41 – 12:03शुभ
रोग 12:03 – 13:24अशुभ
उद्वेग 13:24 – 14:46अशुभ
चाल 14:46 – 16:07शुभ
लाभ 16:07 – 17:29शुभ

?चोघडिया, रात
उद्वेग 17:29 – 19:07अशुभ
शुभ 19:07 – 20:46शुभ
अमृत 20:46 – 22:25शुभ
चाल 22:25 – 24:03*शुभ
रोग 24:03* – 25:42*अशुभ
काल 25:42* – 27:20*अशुभ
लाभ 27:20* – 28:59*शुभ
उद्वेग 28:59* – 30:38*अशुभ

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

?दिशा शूल ज्ञान———–उत्तर

परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो इलायची अथवा हरा पान खाके यात्रा कर सकते है l

?अग्नि वास ज्ञान -:

9 + 4 + 1 = 14 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

? शिव वास एवं फल -:

9 + 9 + 5 = 23 ÷ 7 = 2 शेष

गौरि सन्निधौ = शुभ कारक

?? विशेष जानकारी ??

* आँवला नवमी व्रत

* जुगल जोड़ी परिक्रमा
(वृन्दावन- मथुरा)

*श्री सर्वेश्वर प्रभु का प्राकट्य दिवस (पुष्कर जी)