शहीदों की शहादत को नमन

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गीतांजलि पोस्ट ….(विनय शर्मा) सांभर लेक

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जाने कितने झूले थे
फाँसी के फंदे से…
कितनों ने गोली खाई थी
क्यों झूठ बोलते हो साहब..
की चरखे ने आज़ादी दिलाई थी।।
आज का दिन भारतीय
इतिहास के लिए सबसे ज़्यादा
गौरवशाली दिन है। भारत माता
के वीर महान सपूत, आज़ादी
के दीवाने, देश की आन बान शान
के खातिर अपने प्राणों का
बलिदान करने वाले शहिदो की
शाहदत को नमन। भारत माता के
ये तीन लाल भगत सिंह,
सुखदेव और राजगुरु थे
जिन्होंने हँसते हँसते फाँसी
के फंदे को फूलों का हार
समझ कर गले लगाया और
अपनी मातृभूमि के लिए अपनी
साँसों को बलिदान कर दिया।
आज से ठीक 86 साल पहले
यानि आज ही के दिन 23 मार्च
1931 को शाम 6:37 बजे भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव
को फांसी की सज़ा लाहौर जेल
में दी गई। पहले ये सजा 24 मार्च के दिन दी जाने वाली थी
लेकिन जनता में बढ़ते आक्रोश
और क्रांति की जो आग चारों
तरफ लग चुकी थी उसको ध्यान में
रखते हुए ब्रिटिश हुकूमत ने
तय दिन से एक दिन पहले ही
सज़ा दे दी क्योंकि ब्रिटिश हुकूमत
ये बात समझ गई थी की उसके
साम्राज्य की चूलें हिल गई है और
उसकी “फूट डालों और राज़ करो” की नीती पर जो एक
महल खड़ा किया था अब उसके
ध्वस्त होने का समय बिल्कुल
नजदीक आ गया है।
ज़ालिम ब्रिटिश हुकूमत की जड़े
अब उखड़ने लगी थी क्योंकि
नौजवानो की रगों में अब खून
उबाल मारने लगा था जिससे
चारो तरफ क्रांति का ऐसा
माहौल बन गया था जिसमें
नौजवानो के साथ साथ
बच्चे ,बूढ़े और महिलाये
भी शामिल थी। महज़ 23 साल
की उम्र में फाँसी के फंदे को गले लगाने वाले भगत सिंह ने कहा
था की -” मौत बड़ी बात नहीं है
बड़ी बात तो यह है की,
आपके शरीर से टपकने वाला
लहू ओरो के खून में
उबाल ला सकें”। और भगत सिंह
जी के इस कथन ने संपूर्ण
भारत के लोगो में एक ऐसी
क्रांति की चिंगारी लगाई की आज़ादी
की ख्वाइश हर दिल में पैदा
होने लग गई। जिस वक़्त इन
महान क्रांति कारियों को जेल
में रखा गया था उस वक़्त जेल
में सिर्फ यही कहा जाता
था-” फाँसी की कोठरी बनी
अब रंगशाला है, झूम झूम सहगान हो रहा है.. मन क्या मतवाला है, भगत गा रहा आज
चले , हम पहन बसंती चोला..
जिसे पहन कर वीर शिवा,
ने माँ का बंधन खोला”।
अपने प्राणों की परवाह किये
बगैर इन महान देश भक्तों ने
अपना सर्वस्व लूटा दिया ।
इसीलिए कहा जाता है और कहा
जाता रहेगा की –
” शहीदों की मज़ारों पर लगेंगें
हर बरस मेले।
वतन पर मरने वालो का
यहीँ बाक़ी निशा होगा।।

गीतांजलि पोस्ट की तरफ से
शहीदों को शाहदत को दिल
से नमन। जय हिन्द
वंदे मातरम।।

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