“कैसी हो चली जिंदगी”

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गीतांजलि पोस्ट…(विनय शर्मा )
गीतांजलि पोस्ट के पाठकों के लिए शुभी शर्मा की लिखी हुई एक कविता प्रस्तुत हैं।

  ”क्या है ये जिंदगी और क्या हो चली है

          क्या करने आये थे और क्या कर रहे है

          आये थे यहां जीने और पल पल मर रहे है

         खुद की खुशी का पता नही और दुसरो को खुश कर रहे है

         दिखावे की इस दुनिया मे हम पल पल रो रहे है

         अपनो की याद है नही, बडी बडी किताबे याद कर रहे है

        हर फैसला दिमाग से हो रहा है और हर पल दिल टूट रहे है

        फेसबुक व्हाटसअप पर बात करने के लिए बेकरार अपने ही घर पर हो रही है तकरार है

     मां बाप के साथ बाहर जाना शर्म है,गर्लफेंड के साथ वल्ड टुर का ख्वाब है

हम आगे भाग रहे है,और जिंदगी पीछे दौड रही है जी लो थोडा मरने से पहले नही मिलेगा कुछ यु डरने से ,

प्यार है तो जताईये,अपनो को अपनापन बताईये,इंसान हो इंसानियत दिखा दो मशीनो का काम उन्हे करने दो,कुछ पलो का सफर है ये जी लो और जी लेने दो !!

( शुभी शर्मा) माइक्रोबायोलॉजिस्ट इंदौर
( शुभी शर्मा) माइक्रोबायोलॉजिस्ट इंदौर

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