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हर मर्ज की दवा ग्रीन टी

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गीतांजलि पोस्ट….USHA SHARMA … ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो जोड़ो को स्वस्थ रखते हैं, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा के स्वास्थ्य में मदद करता है, त्वचा पर सूर्य से होने वाली क्षति और समय से पहले त्वचा की उम्र बढऩे की प्रक्रिया को रोकता हैं,शरीर में ऊर्जा खपत की दर को बढ़ाकर मोटापे को कम करने में सहायक होते हैं, खासतौर से उदर क्षेत्र की चर्बी। इसमें कैटेचिन होता है जिससे दिमाग को ताकत मिलती है और दिमाग तरोताजा रहता है।

इम्युनिटि- ग्रीन टी में पौलीफिनौल्स व फ्लेवोनौएड्स होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी बीमारियों से लडऩे की क्षमता बढ़ती हैं जो जीवाणु, विषाणु और गले के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती है, इसलिए खांसी, जुकाम, बुखार जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। ग्रीन टी में पाए जाने वाले ये ऐंटीऔक्सीडैंट विटामिन सी से 100 गुणा और विटामिन ई से 24 गुणा अधिक प्रभावी होते हैं।
हृदय – ग्रीन टी कोलैस्ट्रौल को नियंत्रित रखने में, खून को पतला रखने में, खून के थक्के न जमने देने में मददगार है जिससे हृदय रोग और हृदयाघात की संभावना कम हो जाती हैं साथ हार्ट कोशिकाओं को सुरक्षा प्रदान कर संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती हैं, यह रुष्ठरु कोलैस्ट्रौल की मात्रा को कम कर अच्छे कोलैस्ट्रौल की मात्रा को बढ़ाती हैं।
मस्तिष्क – ग्रीन टी में पाए जाने वाले ऐंटीऔक्सीडैंट दिमाग की उन कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त और मृत होने से बचाते हैं, ग्रीन टी से याददाश्त भी बढ़ाती हैं, शोध के अनुसार हरी चाय में पाये जाने वाले पॉलीफिनॉल मस्तिष्क कार्य प्रणाली में उपयोग होने वाले डोपामीन और एपीनिफ्रीन जैसे तन्त्रकीय संचारकों को क्षरण से रोकते हैं एंव पालीफिनाल बालों को झडऩे से रोकने में मदद करता हैं।
लिवर- ग्रीन टी लिवर की कोशिकाओं की सुरक्षा करती है और दूसरे, प्रतिरोधी प्रणाली को मजबूत बनाती है।
मोटापा- ग्रीन टी शरीर की अतिरिक्त वसा को खर्च कर मेटाबौलिज्म यानी चयापचय को मजबूत बनाती हैं। न्यूट्रिशियन ऐंड टौक्सीकोलौजी रिसर्च इंस्टिट्यूट के ह्यूमन बायलौजी विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, ग्रीन टी में पाए जाने वाले पौलिफिनौल फैट औक्सीकरण के लेवल और शरीर में खाने को कैलोरी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को सशक्त बनाते हैं जिस से वजन कम होता है और वजन का सही अनुपात बना रहता ह
मधुमेह- मधुमेह में खाने के बाद एकदम से खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है. ग्रीन टी का नियमित सेवन खून में शुगर की मात्रा बढऩे की प्रक्रिया को धीमा कर शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियमित करता है।
पाचन- ग्रीन टी में पाए जाने वाले कैटेचिन उन जीवाणुओं को मारते हैं जो फूड पौयजनिंग करते हैं और इन जीवाणुओं द्वारा जनित टौक्सिन्स को भी मारती है.
एलर्जी- ग्रीन टी में पाया जाने वाला ईजीसीजी एपिग्लो कैटेचिन गैलेट तत्व प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत करता है।
डिप्रैशन-डिप्रैशन से बचाव में ग्रीन टी विशेष रूप से मददगार है, इसमें थियनाइन अमीनो एसिड होता है जो हमें तनाव व चिंता से दूर रखता हैं।
हड्डियां- ग्रीन टी में पाए जाने वाले पोषण आप की हड्डियों को मजबूती प्रदान करता हैं।
आर्थ्राइटिस- ग्रीन टी में ऐंटी इंफ्लेमेटरी प्रौपर्टीज होती हैं, जो दर्द को कम करते है, इसमें उपस्थित ऐंटीऔक्सीडैंट्स आर्थ्राइटिस की संभावनाओं को भी कम करते हैं।

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