घुटना प्रत्यारोपण सफलतम ईलाज है, डरे नहीं…

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GEETANJALI POST

घुटनों का दर्द एवं घुटना प्रत्यारोपण पर गीतांजलि पोस्ट के डॉ. प्रभात कुमार सिंघल (लेखक एवं पत्रकार) द्वारा वरिष्ठ जोईन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जन डॉ. दीपक सैनी से साक्षात्कार
बढ़ती उम्र के साथ घुटनों का दर्द आज की बदलती जीवन शैली में काफी सामान्य समस्या बन गई है। कम उम्र की महिलाओं में मुख्यतय घुटने का दर्द प्रारम्भ हो जाता है। औसत आयु में वृद्धि होने से घुटने के दर्द (नी-आर्थराईटीस) के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने लगी है। एक अमेरिकन सर्वे में यह तथ्य सामने आया कि भारत में करीब 150 मिलियन लोग घुटनों के दर्द की बीमारी से ग्रसित हैं।

बीमारी के लक्षण
घुटनों में दर्द होना, अकड़न महसूस होना, चाल में टेडापन आना, गति कम होना, सीढ़ियां चढ़ने व उतरने में दर्द होना, घुटनों में आवाज आना आर्थराईटीस के लक्षण हैं। इन्हें एक सामान्य एक्स-रे से पहचाना जा सकता है। इस प्रकार के लक्षण प्रतीत होने पर ऑर्थोपेडिक्स डॉ. से परामर्श कर एक्स-रे कराया जाना चाहिए।
बीमारी के कारण

घुटनों की बीमारी का प्रमुख कारण मोटापा होना है। मोटे पुरूष या महिला को घुटनों के दर्द की समस्या जल्द घेर लेती है। क्योंकि शरीर का सारा भार घुटनों को झेलना पड़ता है। अन्य कारणों में आनुवंशिकता के साथ-साथ हमारी दैनिक क्रियाविधि जैसे आलती-पालती लगाकर बैठना, देशी शौचालय का उपयोग करना, रोजाना सीढ़ियों का प्रयोग करना, सही तरह से जूते का चयन न करना तथा लम्बे समय तक खड़े रहना बीमारी का कारण बनते हैं।

बचाव
मोटापा कम करके इस रोग से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। समस्या होने पर उसे झेलते नहीं रहे फौरन हड्डियों के डॉ से परामर्श करें। ज्यादा देर तक लम्बे समय एक स्थान पर खड़े नहीं रहे। सैर करने के लिए सही जूतों का चयन करें शरीर को पर्याप्त धूप लगने दे जिससे विटामिन-डी की पूर्ति होती रहे। जंकफूड खाने से बचे। प्रोटिन एवं पर्याप्त एण्टी ऑक्सीडेन्ट वाला आहार अपने भोजन में शामिल करें। पीड़ित व्यक्ति जोगिंग जैसी एक्सरसाईज नहीं करें। नीचे फर्श पर आलती-पालती लगाकर नहीं बैठे तथा वैस्ट्रन ट्रॉयलेट का उपयोग करें।
घुटनों के दर्द से बचाव के लिए साइकिल चलाना एवं तैरना अच्छे व्यायाम हैं। आराम से समतल जमीन पर चलना चाहिए। फिजीयोथैरेपी की मदद से घुटने की कसरत जैसे कि घुटने की ढ़कनी को दबाना आदि करना चाहिए।

उपचार
प्रारम्भिक अवस्था मंे करसत (फीजीयोथेरेपी) हल्की दवाओं के सेवन तथा नहीं करने वाली बातों का पालन करने से काफी हद तक आर्थराईटीस को रोका जा सकता है।
एडवांस स्टेज मंे जहांॅ व्यक्ति विशेष को चलने फिरने मंे काफी परेशानी हो, रोजना दर्द निवारक दवाओं खानी पडे, तथा दैनिक क्रियाविधी मंे तकलीफ आने लगे, इस अवस्था में धुटना प्रत्यारोपण के लिए परामर्श करें।

घुटना प्रयारोपण कब और क्यों
आर्थराईटीस एक प्रोग्रेसिव बीमारी है जिसमें घुटनों के अन्दर की (कार्टिलेज) गद्दी घीस जाती है इसकी एडवांस स्टेज में धुटनो मंे टेडापन आ जाता है चलने की गति एवं दूरी की कम हो जाती है हर समय दर्द रहने लगता है और धीर-धीरे मरीज घर में ही सीमित हो जाता है। इस अवस्था में धुटनो का प्रत्यारोपण आवयश्क हो जाता है। एक सामान्य स्वास्थ इन्सान को रोज 3-4 किलोमीटर चलना चाहिए ताकि उसका हदय ( ब्ंतबसपंब वनज चनज ) सुगर एवं ब्लड प्रेशर एवं मोटापा नियत्रंण में रहे यदि कोई व्यक्ति लम्बे समय तक चल नही पाये तो उसका सारी बिमारिया लग जाती है।

जीवन गति है, गति जीवन हैं
स स्वस्थ गति इन्सान को शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से स्वस्थ रखती है जो बिना स्वस्थ धुटनों के संभव नही है।
स ज्यादा समय तक पेन क्लिर खाने से किडनी, लीवर एवं हदय में बुरा असर पड़ता है।
स आथ्राईटीस की वजह से यदि व्यक्ति, छड़ी, वाकर या दूसरे व्यक्ति पर आश्रित होने से उसके मानसिक व शारीरिक अवस्था में बुरा असर पड़ाता है। घुटना प्रत्यारोपण एक सफलतम ऑपरेशन है इससे डरे नहीं ये एक बेहतर लाईफ स्टाईल को वापस पाने का तरीका है।