देर से आये , दुरस्त आये

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गीतांजलि पोस्ट …….. राजस्थान के चर्चित एनकाउंटर गैंगस्टर आनंदपाल एनकाउंटर में आंदोलन, धरने प्रर्दशन, लाखों रूपयों की चपत, दो लोगों की मौत के बाद एनकाउंटर के 25 वें दिन सरकार ने आनंदपाल एनकाउंटर की सीबीआई जांच की अनुशंसा के लिये कह ही दिया। इस प्रकरण में पुरानी कहावत सही सिद्व हो गयी कि ‘ बिना रोये बच्चे को मां भी दूध नहीं पिलाती’। गैंगस्टर आनंदपाल एनकाउंटर प्रकरण में भी यही हुआ, 24 जून को गैंगस्टर के एनकाउंटर के बाद आनंदपाल के परिजनों ने एनकाउंटर पर शंका जाहिर करते हुए एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग सरकार के समक्ष रखी थी। सरकार ने उनकी बात को नहीं माना जिसके कारण आनंदपाल के परिजनों ने उसके शव को लेने से मना कर दिया और अपनी मांग पर अडे रहे, बाद में प्रशासन ने कोर्ट का सहारा लेकर आनंदपाल के शव को उसके परिजनों तक पहुंचाया।

राजपूत समाज के लोगों के साथ-साथ राजपूत नेताओं ने भी आनंदपाल के परिजनों का साथ दिया और वो भी यह मांग करता रहा एनकाउंटर की जांच सीबीआई से कराई जाए दूसरी ओर सरकार इस बात पर अडी हुई थी कि सीबीआई जांच नहीं कराई जाएगी और गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने भी कह दिया कि अगर सीबीआई जांच चाहिए तो हाईकोर्ट जाइए।गांव सांवराद में आनंदपाल का शव रखा रहा, समाज के लोगों का जमावडा गांव में लगने लगा जिसे कन्ट्रोल करने के लिये पुलिस दस्ता गांव में तैनात किया गया, धीरे-धीरे गांव सांवराद पुलिस की छावनी में तबदील हो गया और 12 जुलाई को गांव में ऐसे हालात पैदा होने दिए गए कि वहां गोली चलानी पडी। लोगों की जानें गई और करोड़ों रूपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

आनंदपाल एनकाउंटर के 20 दिनों बाद मानवाधिकार आयोग के आदेश पर पुलिस की मौजूदगी में आनंदपाल के परिवार वालों के बिना उसका अन्तिम संस्कार कर दिया गया। आनंदपाल के अन्तिम संस्कार के बाद सरकार ये समझ रही थी की हालात सामान्य हो जायेगें लेकिन ऐसा नहीं हुआ बल्कि आनंदपाल के अन्तिम संस्कार के बाद आंदोलन उग्र हो गया और राजपूत समाज ने सांवराद के बजाय राजधानी जयपुर में आन्दोलन करने की बात करने लगे। 22 जुलाइ्र्र्र को जयपुर कूच करने का अल्टीमेटम दे दिया क्योकि उसी दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का जयपुर दौरा होने वाला था। राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने सरकार की छवि खराब नहीं हो इसलिये सरकार ने राजपूत समाज की मांगों को मानते हुए आनंदपाल एनकाउंटर की सीबीआई जांच करवाने की अनुशंसा कर दी।

इस प्रकरण से देश की जनता को ये शिक्षा मिलती हैं कि सरकार से बात मनवाने के लिये निवेदन नहीं बल्कि आन्दोलन करो, यह सरकार शांति की नहीं,बल्कि आंदोलन और तोडफ़ोड़ की भाषा ही समझती है, अगर किसी जाति-समुदाय को अपनी मांगें मनवानी हो तो आंदोलन करो, तोडफ़ोड़ करो जिसके कुछ समय पश्चात सरकार को मांगे माननी पडेगी। आनंदपाल सिंह के पक्ष में पूरा राजपूत समाज था यदी आनंदपाल के स्थान पर किसी ऐसे समाज का व्यक्ति होता जिसका जनाधार बहुत कम हैं तो क्या ऐसे में सरकार बिना दबाव के उनके परिवार वालों की बात को मानती ?

सवाल ये है कि जब यह सीबीआई जांच की मांग मानी ही जानी थी, तो उसके लिए 20 दिन तक क्यों आनंदपाल के शव की बेकद्री होने दी गई ? क्यों 12 जुलाई को सांवराद में ऐसे हालात पैदा होने दिए गए कि वहां गोली चलानी पडी ? लोगों की जानें गई, करोड़ों रूपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा उसका जिम्मेदार कौन होगा ? उन सैकड़ों लोगोंं का जिम्मेदार कौन हैं जो आज भी अस्पताल में भर्ती है, जेलो में बंद है ? जनता के पैसों को बर्बाद किया उसका हर्जाना कौन देगा ? आन्दोलन के कारण आम जनता को परेशानी हुई उसका जिम्मेदार कौन होगा ? यदी ये मांगे सरकार पहले ही मान लेती तो इतना बड़ा आंदोलन नही होता, सरकारी संपत्ति का नुकसान नहीं होता, नाही बेकसूर लोगों को परेशान होना पडता नाही लोगों की जान जाती और आनंदपाल की अंतिम क्रिया भी पूरी धार्मिक-रीति से होती।

राजस्थान के राजपूत खुश हैं की सरकार उनके सामने झुक गयी और सरकार ने गैंगस्टर आनंदपाल की मुठभेड़ की सीबीआई द्वारा जाँच कराने के साथ-साथ उनकी अन्य मांगे बात मान ली है। यह ज़रूरी नहीं ख़ुशी बनी रहेगी. क्योंकि सरकार ने सीबीआई जाँच की अनुशंसा की हैं यह ज़रूरी नहीं कि सीबीआई सरकार की सिफारिश मान लेगी। सीबीआई जाँच एजेंसी क़े पास यह अधिकार है की वो सरकार की जाँच करने की सिफारिश ख़ारिज कर दे। पिछले आठ सालों में राजस्थान सरकार ने करीब 10 मामले सीबीआई जाँच के लिये भिजवाये थे इनमें से कुछ मामलों में जांच चल रही हैं , कुछ कोर्ट में विचाराधिन हैं तो किसी में चालान पेश हो गया लेकिन सजा एक में र्भी नहीं हुई हैं। बीकानेर के डेल्टा प्रकरण और जैसलमेर के चतरसिंह एनकाउंटर के मामले में सीबीआई ने जांच करवाने के लिये मना ही कर दिया वहीं हनुमानगढ़ के मामले में सरकार द्वारा सीबीआई जांच की अनुशंसा करने की मंाग को चार बार खारिज करने के बाद पांचवी बार 2 जून 2014 को सरकार द्वारा सीबीआई जांच की अनुशंसा करने की मंाग को माना। ऐसे में गैंगस्टर आनंदपाल एनकाउंटर के मामले में सीबीआई जांच होगी या नहीं ये निश्चित नहीं हैं।

रेणु शर्मा,जयपुर संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र
रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र