ऐसा स्थान जहां किसी व्यक्ति के शव को लेकर जाया जाए तो उसकी आत्मा शव में प्रवेश कर जाती है

879
93

GEETANJALI POST ( ASHWINI SHARMA )

वैसे तो भारत में हर दिन हर जगह अनेकों चमत्कार होते रहते हैं पर अगर हम आपसे ये कहें कि मृत्यु के बाद भी लोग जीवित हो सकते हैं। तो आप इसे मजाक ही समझेंगे और आपको ये अन्धविश्वास से ज्यादा और कुछ नहीं लगेगा। लेकिन हकीकत में एक स्थान ऐसा है जहां अगर किसी व्यक्ति के शव को लेकर जाया जाए तो उसकी आत्मा कुछ समय के लिए उस शव में पुन: प्रवेश कर जाती है। लाखामंडल में बने इस शिवलिंग की एक अन्य खासियत यह है कि जब भी कोई व्यक्ति इस शिवलिंग का जलाभिषेक करता है तो उसे इसमें अपने चेहरे की आकृति स्पष्ट नजर आती है। आज हम बता रहे हैं लाखामंडल मंदिर के अद्भुत शिवलिंग के बारे में ।

कहां हैं ये मन्दिर
उत्तराखंड की राजधानी, देहरादून से 128 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यमुना नदी की तट पर है लाखामंडल मंदिर। प्रकृति की वादियों में दिल को लुभाने वाली यह जगह गुफाओं और भगवान शिव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ है। माना जाता है कि इस मंदिर में प्रार्थना करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है। यहां पर खुदाई करते वक्त विभिन्न आकार के और विभिन्न ऐतिहासिक काल के शिवलिंग मिले हैं।

जीवित हो जाता हैं मुरदा
जीवन का सबसे बड़ा सच है मृत्यु जो व्यक्ति इस संसार में आया है उसका उसके निर्धारित समय पर जाना तय है. आपने अक्सर सुना होगा कि आत्मा जिस शरीर को एक बार त्याग देती है उसमें वो दोबारा प्रवेश नहीं करती है.,यानी मृत्यु होने के बाद किसी का भी वापिस लौटकर आना असंभव है लेकिन लाखामंडल मंदिर का शिवलिंग मृत व्यक्ति को भी जीवित कर देता है । प्रभु के चमत्कार के आगे प्रकृति भी अपने घुटने टेक देती हैं ईश्वर के चमत्कार के आगे किसी नहीं चलती। ईश्वर ने प्रकृति के मृत्यु के बाद व्यक्ति के पुन: जीवित वाले नियम को भी तोड़ दिया है। आपको बता दे कि हमारे देश में एक स्थान ऐसा है जहां मृत्यु के बाद भी लोग जीवित हो सकते हैं।

कैसे होता हैं ये चमत्कार
लाखामंडल मंदिर में विराजित एक शिवलिंग इतना चमत्कारी है की जब इस शिवलिंग के पास शव को लेकर जाया जाता है मंदिर के पुजारी उस पर पवित्र जल छिड़कता है तभी आत्मा कुछ समय के लिए उस शव में पुन: प्रवेश कर जाती है। जिन्दा होने के बाद वह व्यक्ति भगवान का ध्यान लगाता है और गंगाजल पीता है. इसके बाद फिर आत्मा शरीर को त्याग देती है।

लाखामंडल मंदिर का इतिहास
महाभारत काल में युधिष्ठिर ने अज्ञातवास के दौरान यह शिवलिंग स्वयं स्थापित किया था। इसको महामंडेश्वर नाम से जाना जाता हैं। शिवलिंग के ठीक सामने दो द्वारपाल पश्चिम की तरफ मुंह करके खड़े हुए है, इनमें से एक का हाथ कटा हुआ है। इस शिवलिंग की खासियत यह है कि जो व्यक्ति इस शिवलिंग का जलाभिषेक करता है, उसे इसमें अपने चेहरे की आकृति साफ़ नजर आती है।