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“व्यूह सभी काटेंगे मिलकर मानवता की आरी से “

GEETANJALI POST

शिक्षा के मन्दिर में भी
अब टैंक लगाये जाते हैं ।
मुखर हुये मुखडौ़ पर भी
अब टेप लगाये जाते हैं ।
चुने हुये प्रतिनिधि भी अब
खुल कर धमकाये जाते हैं ।
बिना हमारे लडो़ तो जानै
कह औका़त बताते हैं ।
हाँ जी हाँ जी करना होगा
साफ-साफ कह जाते हैं ।
जोड-तोड से राज बनाते
राष्टृ प्रेम दिखलाते हैं ।
पहना है जनतंत्र का चोला
फ़ांसीवाद चलाते हैं ।
ऐसे कट्टर पाखन्डी अब
जन सेवक कहलाते है !
रहने खाने के तौर तरी़के
धर्म विरुद्ध बताते हैं ।
मानवता के दुश्मन है पर
ईश भक्त कहलाते हैं ।
छिपे हुये खंजर दिखला
भय का माहौल बनाते हैं ।
ऐसे कलुषित मन कैसे
राम नाम ले पाते हैं ?
हिटलर और मुसोलिनी का
हश्र हुआ क्या भूल गये ।
जनता की ताकत को भी
लगता है तुम भूल गये ।
जुमले नारों से ही कब तक
सबको बहला पाओगे ।
जनता की नज़रौ से ज़्यादा
देर नहीं छिप पाओगे ।
मत तोेडो अब प्रेम के बन्धन
धर्मो को तोड मरोड कर ।
रूठा जन आक्रोशित हो
रख देगा गुरुर तोडकर ।
शिल्पी कहता जल-वायु को
रोक सका कब , कौन है ।
आ जाये तूफा़न अगर तो
बचा यहाँ फिर कौन है ।
अभी बक्त है बाज़ भी आओ
चालाकी मक्कारी से ।
व्यूह सभी काटैगैं मिलकर
मानवता की आरी से ।
✍©शैलेन्द्र अवस्थी “शिल्पी”

शैलेन्द्र अवस्थी(कवि व राजनीतिज्ञ)जयपुर

शैलेन्द्र अवस्थी(कवि व राजनीतिज्ञ)जयपुर

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