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भगवान शिव का मंदिर जंहा गिरती हैं बारह साल में बिजली

GEETANJALI POST -रोहित जामवाल पंचकुला-

भारत में भगवान शिव के अनेक अद्भुत मंदिर है उन्हीं में से एक है हिमाचल प्रदेश के मशहूर पर्यटन स्थल कुल्लू में स्तिथ बिजली महादेव। कुल्लू का पूरा ही इतिहास बिजली महादेव से जुड़ा हुआ हैं, ऐसा लगता हैं जैसे बिजली महादेव के इर्द-गिर्द ही समूचा कुल्लू घूमता है। कुल्लू शहर से बिजली महादेव की पहाड़ी लगभग सात किलोमीटर है , ब्यास और पार्वती नदी के संगम के पास एक ऊंचे पर्वत के ऊपर बिजली महादेव का मंदिर हैं जिनका अपना ही महात्म्य व इतिहास है। भादों के महीने में एंव शिवरात्रि यहां मेला-सा लगा रहता है।

बिजली महादेव नाम कैसे हुआ
भोलेनाथ लोगों को बचाने के लिए आकाशीय बिजली को अपने ऊपर गिरवाते हैं। इसी वजह से भगवान शिव को यहंा बिजली महादेव कहा जाता है।

पौराणिक कथा
ऐसी मान्यता है कि कुल्लू घाटी एक विशाल सांप का रूप हैं जिसका वध भगवान शिव ने किया था। मंदिर मेें शिवलिंग पर हर 12 साल में भयंकर आकाशीय बिजली गिरती है। जिससे मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है तब यहां के पुजारी खंडित शिवलिंग के टुकड़े एकत्रित करके मक्खन से टुकड़ो को जोड़ देते हैं। कुछ माह में शिवलिंग ठोस रूप में परिवर्तित हो जाता हैं।

इसका नाम कुल्लू कैसे पड़ा ? इसके पीछे एक पौराणिक कथा है
कुल्लू घाटी के लोग बताते हैं कि बहुत पहले यहां कुलान्त नामक दैत्य रहता था। दैत्य कुल्लू के पास की नागणधार से अजगर का रूप धारण कर मंडी की घोग्घरधार से होता हुआ लाहौल स्पीति से मथाण गांव आ गया। दैत्य रूपी अजगर कुण्डली मार कर ब्यास नदी के प्रवाह को रोक कर इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था। इसके पीछे उसका उद्देश्य यह था कि यहां रहने वाले सभी जीव-जंतु पानी में डूब कर मर जाए। भगवान शिव कुलान्त के इस विचार से से चिंतित हो गए। बहुत कोशिश करके शिव ने उस राक्षस रूपी अजगर को अपने विश्वास में लिया। शिव ने उसके कान में कहा कि तुम्हारी पूंछ में आग लग गई है। इतना सुनते ही जैसे ही कुलान्त पीछे मुड़ा तभी शिव ने कुलान्त के सिर पर त्रिशूल वार कर दिया। भगवान् शिव के त्रिशूल के प्रहार से कुलान्त मारा गया। कुलान्त के मरते ही उसका शरीर एक विशाल पर्वत में बदल गया। उसका शरीर धरती के जितने हिस्से में फैला हुआ था वह पूरा की पूरा क्षेत्र पर्वत में बदल गया। कुल्लू घाटी का बिजली महादेव से रोहतांग दर्रा और उधर मंडी के घोग्घरधार तक की घाटी कुलान्त के शरीर से निर्मित मानी जाती है।

bijli-mahadev-2शिवलिंग पर हर बारह साल में बिजली क्यों गिरती हैं
कुलान्त दैत्य के मारने के बाद शिव ने इंद्र से कहा कि वह 12 साल में एक बार इस जगह पर बिजली गिराया करें। हर बारहवें साल में यहां आकाशीय बिजली गिरती है। इस बिजली से शिवलिंग चकनाचूर हो जाता है। शिवलिंग के टुकड़े इक_ा करके शिवजी का पुजारी मक्खन से जोड़कर स्थापित कर लेता है। कुछ समय बाद पिंडी अपने पुराने स्वरूप में आ जाती है।

भारी बर्फबारी होती है यहाँ सर्दियों में
यह जगह समुद्र स्तर 2450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सर्दियों में यहां भारी बर्फबारी होती है। हर मौसम में दूर-दूर से लोग बिजली महादेव के दर्शन करने आते हैं।






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