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शिक्षा के सुधार के लिए आर.टी.ई. का सख्ती से लागू करना जरूरी

GEETANJALI POST (चन्द्रपाल प्रजापति नोएडा) शिक्षा के सुधार के लिए शिक्षा का अधिकार (आर.टी.ई.) कानून का सख्ती से लागू करना जरूरी।

शिक्षा का अधिकार (आर.टी.ई.) कानून जिसे निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लोकप्रिय शिक्षा का अधिकार अधिनियम के रूप में जाना जाता है जिसे 1 अप्रैल 2010 को भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत में लागू किया गया ।
इस कानून में 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी । निजी स्कूलों को भी 6 से 14 साल तक के 25% गरीब बच्चे मुफ़्त पढ़ाने होंगे। इन बच्चों से फीस वसूलने पर 10 गुना जुर्माना होगा। शर्त नहीं मानने पर मान्यता रद्द हो सकती है । मान्यता निरस्त होने पर स्कूल चल रहे हैं तो एक लाख रुपये और उसके बाद रोजाना दस हजार रूपये जुर्माना लगाया जाएगा। विकलांग बच्चों के लिए उम्र बढ़ाकर 18 साल रखी गई है । इस कानून में दश अहम लक्ष्यों को पूरा करने की बात कही गई है। इसमें मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने, शिक्षा मुहैया कराने का दायित्व राज्य सरकार पर होने,  स्कूल पाठ्यक्रम देश के संविधान के दिशा निर्देशों के अनुरुप और सामाजिक जिम्मेदारी पर केंद्रित होने और प्रवेश प्रक्रिया में लालफीताशाही कम करना शामिल है । प्रवेश के समय कई स्कूल कैपिटेशन फीस की मांग करते हैं और बच्चों और माता पिता को इंटरव्यू की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। प्रवेश की प्रक्रिया को बदलने का वादा भी इस विधेयक में किया गया है। बच्चों की स्क्रीनिंग और अभिभावकों की परीक्षा लेने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना । दोहराने पर जुर्माना 50 हजार रुपये । शिक्षक ट्यूशन नहीं पढ़ाएंगे ।
सुप्रीम कोर्ट ने भी शिक्षा का अधिकार कानून पर अपनी मोहर लगाते हुए पूरे देश में लागू करने का आदेश दिया। इस अधिनियम के पारित होने से देश के हर बच्चों को शिक्षा पाने का संवैधानिक अधिकार मिला।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (आर.टी.ई.) कानून 2009 में संशोधन को मंजूरी प्रदान कर दी है। यह संशोधन सुनिश्चित करेगा की सभी शिक्षकों को 31 मार्च 2015 की स्थिति में 31 मार्च 2019 यानि 4 साल तक इस तरह के प्रशिक्षण के लिए अवधि बढ़ाने के लिए अकादमिक  प्राधिकारी द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता प्राप्त करें । इससे सेवा में बरकरार प्राथमिक शिक्षक अपने प्रशिक्षण को पूरा करने में सक्षम होंगे और इसमें यह भी सुनिश्चित होगा कि देश के प्राथमिक स्तर के सभी शिक्षकों में योग्यता का एक निश्चित न्यूनतम मानक निर्धारित हो । इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि सभी शिक्षक न्यूनतम योग्यता रखें । जो की शिक्षण की गुणवत्ता के मानक को बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जाती है । इससे आखिरकार शिक्षकों की समग्र गुणवत्ता और शिक्षण प्रक्रियाओं में सुधार होगा । इससे परिणाम स्वरुप बच्चों के सीखने के मामलों में सुधार होगा। इस संशोधन के बाद से सरकार का अभी प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर जोर बढ़ेगा।
परंतु निजी स्कूल लालचवश इस कानून को मानने को तैयार नहीं है। जगह जगह से शिकायत मिल रही है । अब समय आ गया है कि हम जागृत होकर अपनी बात को सरकार तक पहुंचाएं और सरकार का भी फर्ज बनता है कि वह गरीब जनता की भलाई के लिए सख्त रवैया अपनाएं और अधिकारियों को आदेश दें कि वह ऐसे विद्यालयों की जांच करें और जो दोषी पाए जाए उन पर कार्यवाही करें।

चन्द्रपाल प्रजापति नोएडा

चन्द्रपाल प्रजापति नोएडा

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  • One Comment to शिक्षा के सुधार के लिए आर.टी.ई. का सख्ती से लागू करना जरूरी

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