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पुस्तकों को बनायें मित्र ,उपहार में देवें पुस्तकें

GEETANJALI POST…….(लेखक एवं पत्रकार – डा. प्रभात कुमार सिंघल)

डा, एस .आर रंगानाथन जयंती पर राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस 12 अगस्त पर विशेष

ज्ञान का भण्डार पुस्तकें न केवल हमें ज्ञान प्रदान करती हैं वरन प्रेरणा, चेतना जाग्रति तथा मन को शांति भी प्रदान करती है कहा गया है कि  एक पुस्तक मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र होती है।

पुस्तकों को जिस स्थान पर संग्रहित किया जाता है वह पुस्तकालय कहा जाता है लेकिन वर्तमान में यह सामुदायिक गतिविधियो का केंद्र बन गयी हें जो अनेकों प्रकार की सेवा जेसे – कृषि, स्वास्थ्य , शिक्षा, विधिक , पर्यावरण साक्षरता आदि ।  पुस्तकें मनुष्य को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाती है तथा कठिन समस्याओं के निदान के लिये बल प्रदान करती हैं । आत्मबल प्रदान करने का उत्तम साधन पुस्तकें कभी भी व्यक्ति को अकेला ओर कमज़ोर अनुभव नहीं कराती हैं । देश भक्त लाला लाजपत राय ने कहा था “ मैं पुस्तकों का नर्क मे भी स्वागत करुँगा। इनमे वह शक्ति है जो नर्क को भी स्वर्ग बनाने की क्षमता रखती है” । किसी भी समाज अथवा राष्ट्र के उत्थान में पुस्तकालयों का अपना विषेश महत्व है । 

पुराने समय में पुस्तकें ही मनुष्य के ज्ञान वर्धन एवं मनोरंजन का प्रमुख माध्यम हुआ करती थी ।  आज जबकि इंटरनेट एवं सुचना प्रोधोगिकी का युग आ गया है और सभी सूचनाएं नेट पर उपलब्ध हैं, पुस्तकों का महत्व कम होता जा रहा  है | बिरले ही होंगे जो आज जयशंकर प्रसाद, तुलसी, प्रेमचन्द, शेक्स्पीयर जैसे महान साहित्यकारों एवं कवियों, चाणक्य एवं मार्क्स जैसे महान राजनीतिज्ञों तथा अरस्तु एवं सुकरात जैसे दार्शनिकों के साहित्य को पढ्ते हों । हमारे अनेक ग्रंथ, पाण्डुलिपियां, पुस्तकें नेट पर उपलब्ध हैं | इतना सब होते हुए भी पुस्तकालय अपने नवाचारों एवं आधुनिक तकनीक के साथ अपना महत्व बनाए हुए हैं | पुस्तकालयों का उपयोग प्रतियोगी परीक्षा के विधार्थी, अनुसन्धान कर्ता विधार्थी तथा इतिहास, संस्क्रति, साहित्य, समाज, विभिन्न क्षेत्रों के अनुसन्धान के जिज्ञासू  विशेष रूप से करतें है। देश में जहां अनेक सार्वजनिक एवं राजकीय पुस्तकालय हैं वहीं अनेक मनीषियों के अपने निज़ि पुस्तकालय भी हैं |

पुस्तकों एवं पुस्तकालय के महत्व के प्रति जागरुकता उत्पन्न करने  के लिये प्रतिवर्ष 12 अगस्त को देश में  “राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस” के रूप में आयोजित किया जाता है। जागरुकता के लिये इस दिन पुस्तकालयों में संगोष्टी, सेमिनार, विविध प्रतियोगिताएं, छात्र-छात्राओं को पुस्तकालय भ्रमण आदि के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। भारत के गणितज्ञ एवं पुस्तकालय जगत के जनक एस. आर. रंगनाथन के जन्म दिन को पुस्तकालय दिवस के रूप में  मनाया जाता है। रंगनाथन ने पुस्तकालय में कोलन वर्गीकरण तथा क्लासीफाइड केटलाग कोड बनाया और पुस्तकालय विज्ञान को महत्व देने व देश में इसका प्रचार प्रसार करने में अपना महत्व्पूर्ण योगदान दिया।डा. रंगानाथन को कर्नाटक केडर से शिक्षा एवं साहित्य में उत्कृष्ठ सेवाओं कें भारत सरकार द्वरा पदम श्री पुरुस्कार से गोरवांवित किया गया तथा वर्ष 1965 में भारत सरकार ने उन्हें पुस्तकालय विज्ञान में राष्ट्रीय शोध प्राध्यापक की उपाधि से सम्मानित किया।  उन्हें पुस्तकालय विज्ञान की दृष्ठि  से प्रलेखनाज्ञाता, वर्गीकरणाचार्य और वर्गीकरणकर्ता, सूचीकरणकर्ता, संगठनक़र्ता, अध्यापक- शिक्षक – गुरु, दाता , सभापति , अध्यक्ष तथा सलाहकार आदि विशेषताओं के कारण देश में जाना जाता है । पुस्तकालय विकास के जनक एवं प्रणेता रंगनाथन का जन्म 12 अगस्त 1892 को चेन्नई के शियाली गाँव में हुआ था यहीं  पर उन्होंने हाई स्कूल तक शिक्षा प्राप्त की तथा मद्रास के  क्रिश्चयन कालेज से 1913 में गणित में एम.ए. की उपाधी प्राप्त की । अपने अध्यापन कार्य के दौरान 1924 में उन्हें मद्रास विश्वविधालय की पहला पुस्तकालयाध्यक्ष बनाया गया और वे इस पद की दक्षता प्राप्त करने के लिये इंग्लैण्ड भेजे गए  । उन्होंने 1945-47 के दौरान वाराणसी हिन्दू विश्वविधालय में पुस्तकालयाध्यक्ष और पुस्तकालय विज्ञान के प्राध्यापक के रूप में कार्य किया तथा इसके उपरांत दिल्ली विश्वविधालय में भी अध्यापन कार्य कराया और 1954-57 के मध्य उन्होंने ज्यूरिख एवं स्विट्ज़रलैंड में शोध कार्य किया तथा भारत आकर 1959 में विक्रम विश्वविधालय उज्जैन में अतिथी प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवायें दी । उन्होंने 1962 में बैंग्लूर में प्रलेखन अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की एवं जीवन पर्यंत इससे जुडे रहे ।  

देश में पुस्तकालयों के अनेक रूप देखने को मिलते है। कोपीराइट की सुविधा से राष्ट्रीय पुस्तकालयों के विकास में वृद्धि हुई। डीलीवरी आफ बुक्स – 1954 के कानून के तहत प्रकाशक को प्रकाशन की कुछ प्रतियां राष्ट्रीय पुस्तकाल को भेजना अनिवार्य किया गया। राष्ट्रीय पुस्तकाल के साथ- साथ सार्वजनिक पुस्तकालय, अनुसन्धान पुस्तकालय, व्यावसायिक पुस्तकालय, सरकारी पुस्तकालय, चिकित्सा पुस्तकालय, शिक्षण संस्थाओं के पुस्तकालय तथा सेना के पुस्तकालय प्रमुख प्रकार हैं। भारत में राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी तथा राष्ट्रीय पुस्तकालय कोलकाता प्रमुख हैं ।

राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस पर चर्चा करते हैं राजस्थान के  भाषा एवं पुस्तकालय विभाग जयपुर द्वारा कोटा शहर में संचालित राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा की जिसने पुस्तकों के प्रति न केवल पाठकों का प्रेम बनाए रखने का उल्लेखनीय कार्य किया है वरन दृष्टिबाधित तथा भिन्न रुप से समर्थ व्यक्तिओं को जोडने एवं उनके पढने से सम्बन्धित उपकरण, लिपी एवं साहित्य भी उपलब्ध  कराया है । यही नहीं यहाँ ऐसी मशीनें भी उपलब्ध हैं जो पुस्तक को पढकर-बोलकर सुनाती हैं  ।

अपने पाठकों को माह मे एक बार टेली हेल्थ सर्विस के माध्यम से स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी भी उपलब्ध कराती है  । पुस्तकालय में ऑनलाइन केटलोग, ऑनलाइन पुस्तकें, बच्चों के लिये ई-मैल  हेल्प लाइन, आउटरीच सर्विस के माध्यम से निर्माण श्रमिकों के बच्चों को बाल पुस्तकालय से जोडना तथा उन्हें आर्थिक मदद के प्रयास करना, नवलेखन एवं लेखकों को प्रोत्साहित करना जैसी गतिविधियां संचालित कर सुविधाएं उपलब्ध कराकर अधिक से अधिक पाठकों को जोड्ने का प्रयास किया जा रहा है जो राजस्थान में पनें प्रकार का पहला और अनुठा प्रयास हें । प्रयासों के परिणामस्वरुप पुस्तकालय में राजस्थान कें अन्य पुस्तकालयों की अपेक्षा सर्वाधिक आजीवन सद्स्य हें  पुस्तकालय पूर्ण रूप से कम्प्युट्रीक्रत है । वर्तमान में पुस्तकालय अपनें निजि भवन में संचालित है जिसका निर्माण राजा राममोहन राय पुस्तकालय कोलकाता के आर्थिक सहयोग से किया गया है

पुस्तकालय के भवन निर्माण एवं इसके उपरांत विभिन्न वर्ग के पाठकों को पुस्तकालय से जोड्ने के प्रयास तथा विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से सुविधा उपलब्ध कराने के भागीरथी कार्य में निरंतर जुटे हैं  पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव । अब ये आगामी  दिनों में  पुस्तकालय में “रीड इट एण्ड रिव्यू इट” जैसा नवाचार प्रारम्भ करने जा रहे हैं  । प्रगतीशील  विचारों, अणवेषण दृष्टि, मिलन सार एवं सहज डॉ. श्रीवास्तव के ही अथक एवं निरंतर प्रयासों का ही सुफल है कि कोटा में संचालित यह प्राचीन पुस्तकालय आज विविध प्रकार से उपयोगी वट व्रक्ष बन गया है ।डा. दीपक का व्यक्तित्व इसी से झलकता हें कि यह बहाल ही में भारत कें 6 प्रभावशाली सार्वजनिक पुस्तकाल्याध्यक्षों की सूची में शामिल हें । इनकों हाल ही में मेलबर्न (आस्ट्रेलिया )में ग्लोबल लाईब्रेरिज की निदेशक डेब्रा जेकब एवं इफ्ला की प्रेसीडेंट क्रिस्चन मेगेंजी द्वारा सयुंक्त रुप से “ मोस्ट क्रियेटीव थींकर एवार्ड” से समानित किया गया । इनकों 3 बार एल.पी.ए. नेशनल एवार्ड , कैलाश बेस्ट रिसर्च पेपर , प्रेजेंटेशन एवं नोलेज शेयरिंग एवार्ड , मित्रा नोवेल्टी एवार्ड , सुमित्रा रिसर्च एवार्ड , मनोहर रिसर्च एवार्ड समेत कई अन्य एवार्ड से समानित किया जा चुका हें । आपनें अभी तक अंतार्ष्टीय मंचों पर अपनें शोध पत्रों का वाचन भी किया हें अभी हाल ही में मेलबर्न (आस्ट्रेलिया ) इंडियाज नेक्स्ट लाईब्रेरी रोल मोडेल पर सेंड आर्ट से तैयार की गयी डाक्युमेंट्री का प्रतिनिधित्व  किया






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