क्या यही न्याय है…..?

845
189

GEETANJALI POST (रोहित कुमार शर्मा)

स्कूल में बच्चों की हत्या हो जाना आजकल बहुत ही दुखद विषय बना हुआ है l कुछ दिन मीडिया में चर्चा का विषय बनती है l सरकार की ओर से बयान आते हैं l कई बार तो इस तरह के बयान आते हैं कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा l मुझे इस तरह के बयान पर सख्त आपत्ति है क्योंकि पीड़ित परिवार को तो कभी न्याय मिल नहीं सकता l प्रद्युम्न जैसे मासूम बच्चे तो वापस आने से रहे l जीवन भर यह दुख उनके परिजनों को सालता रहेगा l
हां यह जरूर हो सकता है कि जिन्होंने यह वीभत्स कृत्य किया उसे सख्त से सख्त सजा दिलाई जानी चाहिए l परंतु इसे पीड़ित परिवार को न्याय मिल जाएगा इस बात से मैं सहमत नहीं हूं l
न्याय प्रक्रिया का भी यह तकाजा है कि आप मसले की जांच करवाएं न्यायपालिका में चार्जशीट दाखिल करें एवं साक्ष्य प्रस्तुत करें तथा मुजरिम को सजा दिलाएं l इसलिए लोगों द्वारा यह अपेक्षा करना कि तुरंत कोई न्याय मिल जाए संभव नहीं हो पाता है l हां एक बात जरूर है कि ऐसे स्कूल प्रबंधक अथवा प्रशासक या कहें प्रिंसिपल आदि पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्यवाही जरुर की जा सकती है जिसमें प्रिंसिपल को तुरंत नौकरी से हटाना एवं स्कूल प्रबंधक पर जबरदस्त फाइन करना जो की स्कूल की स्कूल साल भर की फीस का 10% तक भी हो सकता है इससे दो बातें होंगी कि भविष्य में प्रिंसिपल एवं स्कूल प्रबंधन स्कूल कैंपस में सुरक्षा के मामले में कड़ाई बरतेंगे l एवं स्कूल में भर्ती किए जाने वाले शिक्षक , सिक्योरिटी गार्ड, ड्राइवर कंडक्टर एवं अन्य कर्मचारी आदि की भर्ती बड़ी सतर्कता से करेंगे l यह बात भी सही है कि किस आदमी में कब विकार आ जाए और वह क्या अपराध कर बैठे इसको पूर्णतया नियंत्रित किया जाना संभव नहीं है l
स्कूल की मान्यता रद्द करना भी समाधान नहीं है क्योंकि इस अन्य बच्चों का भविष्य प्रभावित होता है l स्कूल का अधिग्रहण कर लिया जाए तो भी यह कोई जरुरी नहीं है कि सरकार के हाथ में नियंत्रण आने पर इस तरह के अपराध रुक जाएंगे l परंतु घटनाएं घटित हो जाए एवं प्रिंसिपल अथवा प्रबंधन पर कम से कम जवाबदेही जो उपरोक्त लिखी है वह भी न की जाए तो यह शंका होना स्वाभाविक है की प्रबंधन एवं सरकार की मिलीभगत है अथवा सरकार में कोई भी कार्य गंभीरता से लेने की इच्छा शक्ति नहीं है वह किसी की भी सरकार हो l
अंत में एक बड़ा प्रश्न दिमाग में उमड़-घुमड़ रहा है आखिरकार इंसान इतना क्यों गिर गया है कि वह हत्या पर उतारु हो जाता है l कम से कम जीवन और मरण दो तो ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दीजिए बाकी जो करना है कीजिए l यह समाज कहां और किस दिशा में जा रहा है कई बार बहुत ही मन को उद्वेलित कर देता है l आखिर आदमी जाए तो कहां ?सरकार ,समाज किसी के पास कोई समाधान नहीं l लोग तो मरने तक के लिए बाबाओं के चंगुल में अपने आप चले जाते हैं l हम लोग जहां कहीं पर भी है सतर्क रहें , सामाजिक जागृति में सहयोग करेंl सामाजिक बुराइयों को सरकार ही खत्म कर देगी इससे ऊपर उठना होगा l

रोहित कुमार शर्मा
रोहित कुमार शर्मा