देवताओं की भूमि-उड़िसा

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जानिए हमारी ऐतिहासिक धरोहर (अनदेखा भारत) -26

गीतांजलि पोस्ट ने अपने पाठकों के लिए इतिहास के झरोखे (अनदेखा भारत) नाम से एक विशेष कॉलम बनाया है जिसमे पाठको को देश की ऐतिहासिक धरोहर ,अनदेखा भारत जैसे:-250 साल से अधिक पुराने ऐतिहासिक दुर्ग,विभिन्न धर्मों के धार्मिक स्थल इत्यादि की जानकारिया दी जाती है । आज के इस विशेष कॉलम में हम आपको बताने जा रहे है भारत दर्शन यात्रा के अगले पड़ाव पर आपको ले चलते हैं, भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी से जुड़ा उड़िसा राज्य जिसे अब ओडिशा कहा जाता है। आध्यात्मक, धर्म, संस्कृति, कलात्मक मंदिरों, प्राकृतिक एवं वन्यजीवों, समुद्री तटों के सौन्दर्यकरण में रूची रखने वालों के लिए प्राचीन समय ही यह राज्य पसंदीदा क्षेत्र रहा है उड़िसा राज्य के बारे में , लेखक एवं पत्रकार डॉ.प्रभात कुमार सिंघल की स्पेशल रिपोर्ट…….

प्राचीन समय में कलिंग एवं उत्कल प्रदेशों के नाम से पहचान रखने वाले उड़िसा एक 1 अप्रेल 1936 को अस्तित्व में आया। उड़िसा भारतगणराज्य का 29 वां राज्य बना। इस राज्य का भौगोलिक क्षेत्रफल 155820 वर्ग किमी है। राज्य में बालसोर से लेकर मलकनगिरी तक 485 किमी समुद्री तटिय किनारा लगता है। उड़िसा राज्य उत्तर-पश्चिम में पश्चिमी बंगाल, उत्तर में झारखण्ड, पश्चिम में मध्य प्रदेश, दक्षिण में आन्ध्र प्रदेश तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी से घिरा हुआ है। राज्य की जनसंख्या 4.19 करोड़ से अधिक तथा यहां कि साक्षरता दर 73.45 प्रतिशत है। सुबर्णरेखा, रूशीकुलीया, बुद्धाबालंगा, बैतरानी, ब्रह्माणी एवं महानदी प्रदेश की प्रमुख नदियां जो बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती हैं। चिलका झील यहां की एक मात्र प्रमुख झील है। राज्य को प्रशासनिक दृष्टि से 30 जिलों में विभक्त किया गया है। भुनेश्वर राज्य की राजधानी एवं सबसे बड़ा शहर है।

राज्य में वन एवं वन्यजीवों की प्रधानता देखने को मिलती है। राष्ट्रीय नन्दन कानन अभ्यारण विश्व में सफेद बंगाल टाइगर के कारण अपनी पहचान बनाता है। यहां सिमलीपल राष्ट्रीय पार्क, चन्दा का हाथी अभ्यारणय तथा भीतरकनिखा राष्ट्रीय पार्क भी दर्शनीय हैं। इन अभ्यारणों में 130 प्रकार की प्रजाति के वन्यजीव, 60 प्रकार के रेंगने वाले जीव तथा 55 प्रकार के स्तनपाई जीव पाये जाते हैं।
कृषि प्रधान राज्य में खनिजों का यहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। कोयला उत्पादन की दृष्टि से उड़िसा राज्य का पाँचवां बड़ा राज्य है। खनिजों में कोयले के साथ-साथ लोह अयस्क, बॉक्साइड, क्रोमाइड एवं चूना पत्थर आदि प्रमुखता से पाये जाते है। राउलकेला में स्टील का सबसे बड़ा प्लांट है जिसे जर्मनी के सहयोग से स्थापित किया गया। झारसुगड़ा जिले के हिरमा में रिलायंस समूह द्वारा विश्व का सबसे बड़ा पावर प्लांट स्थापित किया गया। प्रमुख उद्योगों में सीमेन्ट, एल्युमीनियम, सिरेमिक ग्लास, रसायन, उर्वरक, भारी पानी, वैमानिक, उद्योग तथा ड्डषि आधारित उद्योग कपास वस्त्र, रेशम उत्पादन, चीनी तथा चावल मिलें प्रमुख हैं।

सांस्कृतिक एवं साहित्यिक रूप से समृद्ध राज्य में भारतीय नाट्य शास्त्र के भारत मुनि, गीत गोविन्द के रचियता जयदेव तथा महाभारत का उड़िया भाषा में अनुवाद करने वाले सरलादास इस भूमि की शान है। करीब 2000 वर्षों से प्रचलित ओडिशा (उड़िया) नृत्य एवं संगीत शास्त्रीय संगीत कला पर आधारित है। घूमरा, छाऊ, महारी एवं गोतीपुआ स्थानीय संस्कृति के महत्वपूर्ण नृत्य हैं। यहां की जनजातियों के नृत्य और उनकी संस्कृति भी आकर्षित करती है। संस्थाल, बोंडा, मुण्डा, ओराम, कान्या एवं महाली जैसे विभिन्न आदिवासी समुदायों ने राज्य के बहुसांस्कृतिक और बहुआयामी स्वरूप को विशिष्ठता प्रदान करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से हर वर्ष निकाली जाने वाली रथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध सांस्कृति एवं धार्मिक आयोजन है। शिक्षा एवं संस्ड्डति के प्रतीत तक्षशिला, नालन्दा एवं रत्नगिरी भारत के विख्यात प्राचीन विश्वविलाय है।

आवागमन की दृष्टि से राज्य में धामरा, गोपालपुरा, पारादीप, सुबर्न रेखा, अष्टारंग एवं चांदीपुर, समुद्री बन्दरगाह (सी-कॉस्ट) स्थापित किये गये हैं। हवाई सेवा के लिए 17 हवाई पट्टी एवं 16 हेलीपेड बनाये गये है। भुनेश्वर हवाई, रेल एवं बस सेवाओं से भारत के सभी प्रमुख स्थलों से जुड़ा हुआ है।

पर्यटन के क्षेत्र में विशेष रूप से पहचान बनाने वाले ओडिशी राज्य में, विश्व धरोहर में शामिल कोणार्क का सूर्य मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। साथ ही पुरी में जगन्नाथ जी का मंदिर, भुनेश्वर में लिंगराज मंदिर सहित 108 प्राचीन कलात्मक मंदिरों का समूह, उदयगिरी एवं खण्डगिरी गुफाऐं, बौद्ध स्तूप, चिलका लेख, वन्यजीव अभ्यारणय तथा पुरी सहित कोणार्क एवं गोपालपुर के समुद्रतट पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बिन्दु हैं।