नेटवर्क मार्केटिंग के एजेन्ट द्वारा युवती को प्रताड़ित करने के आरोप मे मामला दर्ज

1
38
GEETANJALI POST
बून्दी | देश में चल रही कई मल्टीलेवल मार्केटींग कम्पनियॉ लुभावने विज्ञापनो द्वारा लोगो को लुभावने सपने दिखा कर लूटने के कई घटनाक्रम देखने को मिलते है। कही छोटे स्तर पर तो कई बड़े स्तर पर इस तरह की चेन सिस्टम नेट्वर्किंग कंपनियां पुरे देश में संचालित है।चाहे आज के समय में इन कंपनियों से देश को फायदा हो रहा है लेकिन इनके एजेंटो के द्वारा लोगो को ठगने और फर्जीवाड़े की खबर आती रही है। ऐसी मल्टीलेवल कम्पनियों (चेन सिस्टम कम्पनी) मे एक हैं सेफ शॉप (सिक्योर लाइफ)। कम्पनी बेरोजगार और काम करने के इच्छुक महत्वाकांक्षी युवाओं को अपने एजेन्टों के माध्यम से ढुंढ़ कर रातों रात अमीर बनने के सपने दिखा कर उनकी महत्वाकांक्षा का नाजायज लाभ उठाती हैं ।
कम्पनी के ही काम छोड़ चुके एजेन्ट के अनुसार कॉलेज स्टूडेन्ट और बेरोजगारों को बह़ला फुसला कर कम्पनी में शामिल किया जाता हैं और कभी सेमीनार तो कभी टूर के नाम वसूली होती हैं और कमीशन वाले घटिया प्रोडक्ट बेचे जाते हैं।
कम्पनी और इसके एजेन्टों के खिलाफ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप लग चुके हैं।
ऐसा ही एक मामला बून्दी निवासी एक युवती को प्रताड़ित करने के आरोप में कोतवाली पुलिस ने दो नामजद सहित अन्य के खिलाफ दर्ज किया है। युवती की और से दी गई रिपोर्ट में बताया कि दो साल पहले सेफ शॉप (सिक्योर लाइफ) कंपनी में महावीर प्रसाद केवट और राजेंद्र कुमार कौशल ने उसे शामिल कर लिया। बाद में शोषण करने की नियत से उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। दबाव बना कर और बहला फुसला कर बैंक ऑफ बडौदा में खाता खुलवा कर पासबुक और एटीएम कार्ड भी आरोपियों ने अपने पास रखे और बार बार मांगे जाने पर नाजायज रूप से प्रताड़ित करने लगे। दुखी होकर 11 सितंबर को उसने नींद की गोलियां खा लीं। होश आया तो वह अस्पताल में थी। लंबे समय तक वह नॉर्मल नहीं हो पाई।
पुलिस ने इस मामले में इटावा हाल निवास देवपुरा के महावीर प्रसाद केवट और राजेंद्र प्रसाद कौशल सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
मार्केटिंग कंपनियों की गाईड लाइंस से आम जन है अंजान
मार्केटिंग कंपनियों के द्वारा धोखाधड़ी होने पर लोग पुलिस की शरण में जाते है लेकिन बड़े स्तर पर काम करने वाले लोग दबाव बना कर या झोल झाल कर बच निकलते है। कोनसी कंपनी ठीक है इसके संबंध में भी आम जन को कोई जानकारी नहीं। कोई भी एजेंट बन जाता है जिसके लिये न कोई शैक्षणिक योग्यता है न कोई रूल। अपनी बातों में बदल फुसला कर लोगो को भी ठग लेते है उनके लिया क्या किया जाए कोई जानकारी नहीं अगर पुलिस में रिपोर्ट करवाते भी है तो मामला दबा दिया जाता है। क्योंकि छोटी रकम के लिये मशक्कत कोन करे खुद पीड़ित भी पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने से परेशान होकर रिपोर्ट ही नहीं करता। एजेंट अपने नीचे काम करने वालो के लाभ को भी खा जाते है जिन पर कोई कार्यवाही नहीं होती क्योकि इसका कोई तरीका नहीं।