मैं गांधी हूॅ लेकिन सत्ता का भूखा नहीं

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2 अक्टूबर गांधी जंयती-विशेष

GANDHI’अंहिसा परमो धर्म’
GEETANJALI POST (लेखिका एवं पत्रकार- श्रीमती शिखा अग्रवाल)
देश को गुलामी की जंजीरों से बाहर निकालने में गांधी जी का योगदान जगत् विदित है। ’अंहिसा परमो धर्म’ के सिद्वान्त पर चलकर इन्होने देश को एक जुट करके आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने की प्रेरणा दी।
गंाधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में मोहनदास करमचन्द गांधी के परिवार में माता पुतली बाई की कोख से हुआ था। इनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था तथा हरीलाल, मणीलाल, रामदास एवं देवदास नाम के चार पुत्र थे। इन्होंने कोलकाता से वकालत की डिग्री हांसिल की। इन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने मंे लगा दिया। दक्षिण अफ्रीका के आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन, स्वराज (नमक सत्याग्रह), हरिजन आन्दोलन एवं भारत छोड़ो आनन्दोलन में महात्मा गांधी की अहम् भूमिका रही और वह इन आन्दोलनों के सूत्रधार बने। ”अंहिसा परमों धर्म“ इनका ध्येय वाक्य था। इन्होंने जीवन भर सत्य, अंहिसा, शाहकारी, सदकर्म का मार्ग अपनाया महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गौडसे द्वारा मारी गई गोली से मृत्यु हो गई। गांधी के सिद्वान्तों से पूरा विश्व परिचित है और आदर के भाव से उन्हें याद करता है। इसलिए गांधी जयन्ती को ’अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

गांधी का देश की स्वतन्त्रता में योगदान
गांधी जी एक साधारण व्यक्ति थे। उन्होने इंग्लैड विश्व विद्यालय से बेरिस्टर की उपाधि प्राप्त की । उनकी माता ने उन्हें मांस व मदिरा न छुने का वचन दिया था। जिसका उन्होंने आजीवन पालन किया। यही से उनके संतुलित विचारों की परीक्षा प्रारम्भ हो गई। आजीविका हेतु उन्होने दक्षिण अफ्रीका का रूख किया।

दक्षिण अफ्रीका का जीवन
यह काल 1893 से 1914 तक का था। जिसने गांधीजी को एक साधारण व्यक्ति से स्वतन्त्रता सेनानी बनने की तरफ प्रेरित किया। उन दिनो दक्षिण अफ्रीका में काले-गोरे का भेद चरम सीमा पर था जिसका शिकार गांधीजी को भी बनना पड़ा।
उन दिनांे गांधीजी के पास फर्स्ट क्लास का टिकट होते हुए भी उन्हें थर्ड क्लास में जाने को कहा गया जिसे उन्होंने नही माना और इसके कारण उन्हें बाहर फेंक दिया गया। उन्हंे जीवन यापन में भी कई कठिनाइयों का सामान करना पड़ा। यहां तक की न्याय की उम्मीद में जब न्याय पालिका में गुहार की गई तब भी उन्हें अपमानित किया गया। इन सभी गतिविधियों के कारण गांधी जी के मन में कहीं न कहीं स्वदेश की परतन्त्रा का विचार तेजी पर था। उन्हें महससू हो रहा था कि देश के लोग किस तरह से अधीन होकर अपने आप को नित प्रतिदिन अपमानित होता देख रहे हैं। शायद इसी जीवन काल के कारण गांधीजी ने स्वदेश की तरफ रूख किया और देश की आजादी में अपने आप को समर्पित किया।
स्वदेश लौटकर गांधीजी ने सबसे पहले किसान भाईयों को एक कर लुटेरे जमीदारों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। वे जमींदार भी अंग्रेजों के हुक्म के अधीन थे। राजकोष के लिए तीन गुना कर वसूला जाने लगा। इस तरह गरीबों को जानवरो की जिन्दगीं से आजाद करने करने के लिए 1918 में गांधीजी ने गुजरात के चंपारण और खेड़ा नामक स्थान पर लोगो का नेतृत्व किया। सबसे पहले उनके जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए उन्हें स्वच्छता का पाठ सिखाया।
आज श्री नरेन्द्र मोदी भी देश को स्वच्छ बनाने के लिए गांधीजी के उसी मार्ग को अपनाकर सभीदेशवासियों को जागरूक कर रहे है। इसलिए स्वच्छता अभियान की शुरूवात 2 अक्टुबर गांधी जयन्ती के दिन की गई थी।
फिर सभी ने एकजुट होकर अंग्रेजो एवंम् जमीदारों के खिलाफ आवाज उठाई जिसके फलस्वरूप गांधीजी को जेल में डाल दिया गया।
लेकिन इस बार सभी ने आन्दोलन का रास्ता चुना और गांधीजी का बाहर निकालने के लिए आवाज बुलंद की। इस रैली का नेतृत्व लौहपुरूष वल्लभभाई पटेल ने किया और परिणामस्वरूप गांधीजी को रिहाई मिली। यह पहली बड़ी जीत साबित हुई।
इसी समय से इन्हे ’बापू’ कहकर पुकारा जाने लगा।

’जलिया वाला बाग हत्याकांड
13 अप्रैल 1919 को पंजाब वर्तमान अमृतसर में एक महासभा में अंग्रेजों द्वारा नरसंहार किया गया। इस स्थान का नाम जलिसरवाला बाग था। जहां सभा हो रही थी। उस दिन बैसाखी का पर्व था। जलियावाला में बाग हुआ था। और केवल एक छोटा सा रास्ता था। इसी बात का फायदा उठाकर अंग्रेज जनरल ‘रेजीनाल्ड डायर’ ने सिपाहियों के साथ बिना एलान किये गोलाबारी शुरूकर दी। देखते ही देखते वहॉ मृतक लाशों का मेला लगा गया। लगभग 3 हजार लोग मारे गए। ब्रिटिश सरकार ने इस घृणित अपराध को दबा दिया और प्रशासन को मरने वालों की संख्या के गलत आंकडे दे दिये आज तक जलियावाला बाग हत्याकांड सबसे निदंनीय कांड माना जाता है। जिसकी निंदा स्वंय ब्रिटिशर्स ने की और आज तक कर रहे है।

देशव्यापी असहयोग आन्दोलन
जलियावाला हत्याकांड के बाद गांधीजी ने देशव्यापी स्तर पर असहयोग आन्दोलन किया। यह 1 अगस्त 1920 को शुरू किया गया। इस आन्दोलन में पहली बार सीधा शासन के विरूद्व आवाज उठाई गई। सदनों का विरोध किया गया। सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया गया। गांधी जी ने अहिंसा के जरिये आन्दोलन के लिये देशवासियो को प्ररित किया।
स्वराज आन्दोलन शुरू किया गया। दांडी यात्रा निकाल कर नमक कानून तोड़ा एवम् अपना असहयोग अंग्रेजो के सामने प्रकट किया। इस तरह पूरा देश स्वतन्त्रता की इस लड़ाई का हिस्सा बनने लगा। इन सबके बीच गांधीजी के अंिहसा के पथ को नकार भी दिया। इस तरह नरम दल एवम् गरम दल का निर्माण हुआ।

भारत छोडो आन्दोलन
द्वितीय विश्वयुद्व के दौरान देश में भारत छोडो आन्दोलन शुरू किया गया। 19 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आन्दोलन का एलान किया गया। यह एक ऐसा समय था जब ब्रिटिश हुकूमत युद्व में फंसी हुई थी। नरम दल एवम् गरम दल दोनो ही अपने जोरो पर देश में आन्दोलन चला रहे थे। सुभाषचन्द्र बोस ने भी अपनी आजाद हिन्द फौज के साथ दिल्ली चलो का एलान कर दिया था।
इस प्रकार पूरे देश में खलबली के बीच भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरूआत हुई।

स्वतन्त्रता दिवस का दिन
1942 से 47 के बीच देश की स्थिति में बड़े बदलाव आये। अंग्रेजी हुकूमत हिलने लगी। जहां एक तरफ देश आजाद होने की तरफ बढ़ रहा था वही दूसरी तरफ हिन्दु मुस्लिम लड़ाई ने अपने पैर इस कदर फैला लिये थे कि अंग्रेजी हुकूमत ने देश को दो हिस्सों में बांटने का ऐलान कर दिया नये वायसराय लांर्ड माउट बेटन ने संधि के कई रास्ते दिखाये। लेकिन अंतत भारत को आजादी देने का निर्णय लिया गया। चूंकि उस वक्त गांधीजी के लिए आजादी की कीमत ज्यादा थी। जो कि इस विभाजन के बिना असम्भव थी। इसलिये यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। 14 अगस्त की मध्यरात्रि को पकिस्तान का जन्म हुआ और 15 अगस्त को भारत को आजादी मिली।

गांधी जी मृत्यु
पाकिस्तान के जन्म के लिए देश के लोगो में आक्रोश था। क्योकि इससे देश ही पृथक नहीं हुआ था अपितु देश के भीतर हिन्दु मुस्लिम लड़ाई ने अधिक उग्र रूप ले लिया था। जिसका परिणाम हम सभी आज तक भोग रहे है।
इसके अलावा उस वक्त गांधीजी ने देश में दलितों की स्थिती सुधारने के लिए देश में आरक्षण शुरू किया। उस वक्त हरिजन आन्दोलन की जरूरत थी। क्योकि दलितों की स्थिति बहुत दयनीय थी।
मैं गांधी हूॅ लेकिन सत्ता का भूखा नहीं
देश का वफादार हूॅ परतन्त्रता मुझे मंजुर नहीं
चाहे जो कहना है कह दो
मैंने कहकर नहीं, करके दिखलाया है
आज जो स्वतंत्र भूमि मिली है तुम्हे हें
कईयों ने उसे जान देकर छुड़ाया है
आसान है गलती निकालना
तकलीफांे के लिए दोष दे जाना
मैंने अंग्रेजी को बाहर फेंका था
तुम कूडा तो फंेक कर दिखलाओं
हमने स्वतन्त्र भारत दिया था।
तुम स्वच्छ भारत तो दे जाओं
भले मत कहो इसे गांधी जयन्ती
इसे स्वच्छ भारत का आवरण चढ़ाओ