क्या हैं रोहिंग्याओं का इतिहास

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GEETANJALI POST

वर्तमान समय में रोहिंग्या का मामला अन्र्तराष्ट्रीय स्तर चर्चा का विषय बना हुआ हैं, रोहिंग्या कौन हैं? ये कहा से आये हैं ? इनका उदगम स्थान कोनसा हैं ? रोहिंग्या की वास्तविक जानकारी के लिये हमने विभिन्न वेबसाईटों, लेखों और लोंगों से बात करके रोहिंग्या का इतिहास जानने की कोशिश की हैं। रोहिंग्या मुस्लमानों पर गीताजंलि पोस्ट के पत्रकार अश्विनी शर्मा की विशेष रिपोर्ट-

– इतिहास बताता है कि रोहिंग्या म्यांमार के अराकान प्रांत में बसने वाले अल्पसंख्यक है जो जाति से मुस्लमान हैं। कॉमन ईरा (सीई) के वर्ष 1400 के आसपास बौद्ध राजा नारामीखला ने इनको बर्मा के अराकान प्रांत (अराकान म्यांमार की पश्चिमी सीमा पर स्थित है, जोआज के बांग्लादेश जो कि पूर्व में बंगाल का एक हिस्सा था उसकी सीमा के पास है।) में बसाया था।

– 1785 में बर्मा के बौद्ध लोगों ने देश के दक्षिणी हिस्से अराकान पर कब्जा कर लिया, तब उन्होंने हजारों रोहिंग्या मुस्लिमों को वहां से बाहर खदेडऩे लगे या फिर उनकी हत्या करने लगे तो अराकान के करीब 35 हजार लोग बंगाल भाग गए। उस समय बंगाल पर अंग्रेजों की हुकुमत थी । एंग्लो-बर्मीज युद्ध के बाद 1826 में अराकान अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गया।

– अराकान के अंग्रेजों के नियंत्रण में आ जाने के बाद अंग्रेजों ने बंगाल के स्थानीय बंगालियों और रोहिंग्या मूल के मुस्लिमों को अराकान के जनसंख्या रहित क्षेत्रों में बसा दिया जिससे वहां के स्थानीय बौद्ध राखिन लोगों में ब्रिटिश भारत से गये इन प्रवासियों को लेकर विद्वेष की भावना पनपी जो आज तक बरकरार हैं।

– दूसरे विश्व युद्ध के दौरान दक्षिण पूर्व एशिया में जापान के बढ़ते दबदबे से आतंकित अंग्रेजों ने अराकान छोड़ दिया। अंग्रेजों के अराकान छोडते ही मुस्लिमों और बौद्ध लोगों में झगडा शुरू हो गया। रोहिंग्या मुस्लिमों को उम्मीद थी कि वे अंग्रेजों से सुरक्षा और संरक्षण पा सकते हैं, इसलिये रोहिंग्या जापानी सैनिकों की जासूसी करने लगे, जब जापानियों को यह बात पता लगी की रोहिंग्या उनकी जासूसी कर रहे हैं , तो उन्होंने रोहिंग्या मुस्लिमों को यातनाएं देने, हत्याएं और बलात्कार करना शुरू कर दिया। जिससे डर कर लाखों रोहिंग्या मुस्लिम फिर एक बार अराकान से बंगाल चले गए।

– भारत-विभाजन से पहले रोहिंग्यों ने 1946 में जिन्ना से संपर्क किया कि बर्मा के माउ क्षेत्र को पाकिस्तान में शामिल किया जाए, परंतु जिन्ना ने इससे मना कर दिया तो गुस्साए रोहिंग्यों ने अपने ही देश मे हत्या और बलात्कार का नंगा नाच शुरू कर दिया, इन्होंने अपनी आतंकी सेना तक भी बना ली, जो पाकिस्तान जाकर ट्रेनिग लेती और बौद्धों को मारती। ऐसे अलगाववादी रोहिंग्यों के विचारों और कार्यों के कारण बोधों ने रोहिंग्यों के विरूद्व मोर्चा खडा कर दिया। इसी कारण वैमनस्य इतना बढ गया कि 2012 में रोहिग्यों द्वारा एक बौद्ध महिला का बलात्कर कर उसकी हत्या कर दी जिससे फिर तो बर्मा में विद्रोह की ज्वाला और तेज हो गयी।

– द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति और 1962 में जनरल नेविन के नेतृत्व में तख्तापलट की कार्रवाई के दौर में रोहिंग्या मुस्लिमों ने अराकान में एक अलग रोहिंग्या देश बनाने की मांग रखी, लेकिन तत्कालीन बर्मी सेना के शासन ने यांगून (पूर्व का रंगून) पर कब्जा करते ही अलगाववादी और गैर राजनीतिक दोनों ही प्रकार के रोहिंग्या लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। सैनिक शासन ने रोहिंग्या लोगों को नागरिकता देने से इनकार कर दिया और इन्हें बिना देश वाला बंगाली घोषित कर दिया जो आज शरणार्थी के रूप में दर-दर भटक रहे हैं, वर्तमान समय में स्थिति ये हैं कि विश्व के 57 देश जो मुस्लिम धर्म के अनुयायी हैं वे अपने ही धर्म के रोहिंग्या मुस्लमानों को अपने देश में शरण देने से इंकार कर चुके हैं ।