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ऐसा क्या हैं, जिसके कारण रोहिंग्या लोगों शरणार्थी के रूप में भटकना पड़ रहा है

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 GEETANJALI POST

सालों से शरणार्थी के रूप में दर-दर भटक रहे रोहिंग्या को कब, कहां स्थिर आवास एंव नागरिकता मिलगी इसके बारे में कहना मुश्किल हैं,वर्तमान समय में रोहिंग्या का मामला अन्र्तराष्ट्रीय स्तर चर्चा का विषय बना हुआ हैं, रोहिंग्या कौन हैं ये कहा से आये हैं? इनका उदगम स्थान कोनसा हैं? रोहिंग्या मुस्लमानों पर गीताजंलि पोस्ट के पत्रकार अश्विनी शर्मा की विशेष रिपोर्ट-

जैसा की रोहिंग्या के बारे में चर्चा हैं कि ये जाति से मुस्लमान हैं जो आजादी से पहले पूर्वी बंगाल, पूर्वी पाकिस्तान एंव वर्तमान बांग्लादेश से गये हुए प्रवासी हैं जो जो पीढिय़ों से म्यामांर में रह रहे हैं जिनकी संख्या लगभग 10 लाख हैं, वहा की सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया।

रोहिंग्या मुस्लमान स्वभाव से आपराधिक प्रवृति का माना जा रहा हैं, ये प्रवृति इनको नागरिकता का अधिकार ना मिलने के कारण मानसिक रूप से कुंठित होने के कारण भी हो सकती हैं गरीब मुसलमान हैं, वहीं दूसरी ओर म्यामांर के बहुसंख्यक निवासी बौध के अनुयायी होने से शान्ति प्रिय अहिंसक हैं। दूसरे विश्व युद्व के दौरान म्यामांर जो उस समय वर्मा था, जब ब्रिटेन ने अलग राष्ट्र देने के बदले, रोहिंग्यों को जापान से लडऩे को तैयार किया और उनके हाथों में हथियार दिए तब रोहिंग्यों ने जापान से लडऩे की जगह अपने ही देश म्यामांर के 20,000 बौद्धों को मार डाला और असंख्य बौद्ध महिलाओं का बलात्कार किया।

रोहिंग्यों ने 1946 में जिन्ना से संपर्क किया कि बर्मा के माउ क्षेत्र को पाकिस्तान में शामिल किया जाए, परंतु जिन्ना ने इससे मना कर दिया तो गुस्साए रोहिंग्यों ने अपने ही देश मे हत्या और बलात्कार का नंगा नाच शुरू कर दिया, इन्होंने अपनी आतंकी सेना तक भी बना ली, जो पाकिस्तान जाकर ट्रेनिग लेती और बौद्धों को मारती। ऐसे अलगाववादी रोहिंग्यों के विचारों और कार्यों के कारण बोधों ने रोहिंग्यों के विरूद्व मोर्चा खडा कर दिया। ऐसे में वहां के धार्मिक नेता विराथु ने कहा, खतरे की घण्टी बज चुकी है, अगर खुद को बचाना है, तो बर्मा से रोहिंग्यों को जड़ से खत्म करना होगा। 2001 मे उन्होंने व्यापार से रोहिंग्यों के पूर्ण बहिष्कार का अभियान – 969 चलाया जिसका उद्देश्य रोहिंग्यों को आर्थिक रूप से कमजोर बनाना था। उन्होने बोद्वों की दुकानों पर 969 लिखवाया , जिस किसी दुकान पर 969 लगा होता, तभी बौद्ध वहां से सामान खरीदेगें। 2012 में रोहिग्यों द्वारा एक बौद्ध महिला का बलात्कर कर उसकी हत्या कर दी जिससे फिर तो बर्मा में विद्रोह की ज्वाला और तेज हो गयी, वैमनस्य इतना बढ गया कि रोहिंग्यों को म्यामंर छोड कर भागना पडा।

विश्व में 57 मुस्लिम देश हैं और वो सभी इन रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश में शरण देने से इंकार कर चुके हैं वहीं वसुधैव कुटुम्बकम् सिद्धांत वाला एकमात्र देश होने के कारण हमारे तथाकथित बुद्धिजीवी, मानवाधिकार की पैरवी करने वाले और मुसिलम धर्मगुरू कह रहे हैं कि भारत ने सबको शरण दी हैं इसलिये मानवता कि आधार पर भारत को रोहिंग्या मुस्लमानों को भी शरण देनी चाहिये। इसके लिये वो तर्क देते हैं कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और सुरक्षा का अधिकार सभी को है, भले ही वे भारत नागरिक हों या नहीं इसके साथ ही वे ये हवाला भी दे रहे हैं कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आये हुए हिंदू और सिख , दराईलामा के साथ आये हुए बौद्ध एंव पारसी शरणार्थियों को भी भारत ने शरण दी थी।

इस संदर्भ में यदी तीनों का अलग-अलग विवेचन करते हैं-
1- फारस की खाडी से जब पारसियों को निकाला गया तो वे भारत में आये, उनके सरदार ने केरल के राजा से भारत में रहने की अनुमति मॉगी तो केरल के राजा ने उनके मुखिया के सामने एक पानी का गिलास रखा और कहा हमारा समाज इस पानी कह तरह स्वच्छ हैं हम इसमें किसी तरह कि मिलावट कर इसे गंदला नहीं करना चाहते तब पारसियों के सरदार ने उस पानी के गिलास में एक मिश्री की ड़ली ड़ाल कर पानी को हिलाया एंव कहा महाराज अब आपको पानी कैसा नजर आ रहा है तब राजा ने कहा पानी स्वच्छ हैं तब उनके मुखिया ने कहा राजन पानी का स्वाद भी जानिये राजा ने पानी पीया और कहा यह तो मिठा हैं और स्वच्छ भी हैं तब सरदार ने कहा महाराज जिस तरह आपका पानी साफ हैं और पानी का स्वाद भी मिठा हो गया है उसी प्रकार हम आपके समाज के साथ रहेगें आज भी शान्तिपूर्वक रह रहे हैं भारत की प्रगति में इनका बहुत बडा योगदान हैं।
2- चीन के आंतक से भाग कर दराईलामा के साथ भारत आये शरणार्थी आज भी शान्तिपूर्वक रह रहे हैं ।
3- पाकिस्तान से आ रहे शरणार्थी हिंदू और सिख का मूल स्थान भारत ही था, भारत-पाक विभाजन के दौरान जिन्ना के बहकावे में आ गये और वहीं रह गये लेकिन हिन्दू होने के कारण उन पर धर्मिक अत्याचार होने लगा तो वो भारत आने लगे क्योकि भारत उनका मूल स्थान हैं,  भारत के अलावा कहीं ओर क्यों जायेगें ? आज तक वो शान्तिपूर्वक रह रहे हैं, उनके विरूद्व कोई आपराधिक शिकायतें नहीं आयी।

जहां तक रोहिंग्या का सवाल हैं केन्द्रिय सरकार के अनुसार रोहिंग्या मुसलमानों का पूर्व रिकार्ड बताता हैं कि ये आंतकवादी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं साथ ही इनके इनके आई एस आई एस से भी संपर्क रहे हैं। म्यांमार की सेना के अनुसार रेखाअन प्रान्त से 1000 हिन्दू लापता हैं जिनको इनके आतंकवादी गुट ने सामूहिक नृश्सं हत्या करके सामूहिक रूप से कब्र में दफन कर दिया कुछ के शव सामूहिक कब्रो में से निकाले गये।सेना द्वारा ऐसा भी दावा किया जा रहा हैं कि इनकी महिलाओं का धर्म परिवर्तन करवाकर वेश्यावृति करवायी जा रही हैं।

मानवता के नाते हम एक निश्चित समय के लिये रोहिग्यों को आर्थिक सहायता दे सकते हैं लेकिन उनको भारत की नागरिकता नहीं दी जा सकती और ये मानवीय दृष्टिकोण भी उस सीमित समय के लिये हैं जब ये किसी आंतकी गतिविधियों में संलिप्त ना हो। इनके पूर्व रिकार्ड को देखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस समुदाय द्वारा राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा ना किया जाये। क्योकि इनका कोई विश्वास नहीं हैं, म्यांमाार में ऐसा ही हो रहा हैं। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी के अनुसार भारत में रोहिंग्या मुसलमानों की रजिस्टर्ड संख्या 14 हजार से अधिक है लेकिन, कुछ दूसरे आंकड़ों से पता चलता है कि यह संख्या लगभग 40 हजार के करीब है जो अवैध तरीके से भारत में मुख्य तौर पर जम्मू, हरियाणा, हैदराबाद, दिल्ली के शाइनबाग एरिया में और राजस्थान के आस-पास के इलाकों में रह रहे हैं। भारत सरकार को चाहिये कि रोहिंग्या को चिन्हित करके इन पर निगरानी रखे और म्यामांर से वार्ता करके इनको वहां भिजवाने में सहयोंग करे।

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