ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक रूप से सम्पन्न: महाराष्ट्र

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जानिए हमारी ऐतिहासिक धरोहर (अनदेखा भारत) -28

गीतांजलि पोस्ट ने अपने पाठकों के लिए इतिहास के झरोखे (अनदेखा भारत) नाम से एक विशेष कॉलम बनाया है जिसमे पाठको को देश की ऐतिहासिक धरोहर ,अनदेखा भारत जैसे:-250 साल से अधिक पुराने ऐतिहासिक दुर्ग,विभिन्न धर्मों के धार्मिक स्थल इत्यादि की जानकारिया दी जाती है । आज के इस विशेष कॉलम में हम आपको बताने जा रहे है……. भारत के प्रवेश द्वार गेट के ऑफ इण्डिया, विश्व प्रसिद्ध अजंता-एलोरा की गुफाओं, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक दृष्टि से सम्पन्न महाराष्ट्र राज्य। महाराष्ट्र  के बारे में , लेखक एवं पत्रकार डॉ.प्रभात कुमार सिंघल की स्पेशल रिपोर्ट…….

भारत के पश्चिम में अरब सागर से लगे महाराष्ट्र राज्य के उत्तर में गुजरात एवं मध्य प्रदेष, पूर्व में छत्तीसगढ़ तथा दक्षिण में कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश राज्यों की सीमाऐं लगी हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह पठारों की भूमि है। पश्चिम के किनारे सह्याद्रि पहाड़ियां समुद्र तट के समानान्तर चलती है। उत्तरी भाग में सतपुड़ा पर्वत की श्रृंखलाऐं हैं। राज्य में नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी, कृष्णा आदि प्रमुख नदियां हैं। सुदूर पूर्व में अनेक वनाच्छादित दुर्गम पर्वत हैं। ताडोबा, नागजीरा एवं गुगामल प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है।
महाराष्ट्र राज्य की स्थापना 1 मई 1960 को कोंकण, मराठवाड़ा, पष्चिमी एवं दक्षिण महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र (खान देश) तथा विदर्भ आदि क्षेत्रों को सम्मिलित कर की गई। महाराष्ट्र राज्य का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 308000 वर्ग किमी है तथा इसे प्रषासनिक दृष्टि से 6 संभाग एवं 36 जिलों में बांटा गया है। राज्य की जनसंख्या 112374333 है। मुम्बई महानगर राज्य की राजधानी है। राज्य में पुणे, नागपुर, औरंगाबाद, कोल्हापुर, नासिक, अमरावती, सांगली तथा नांदेड प्रमुख बड़े नगर हैं। राज्य की साक्षरता 79.85 प्रतिषत है। राज्य में प्रमुख भाषा मराठी के साथ-साथ हिन्दी एवं अंग्रेजी बोली जाती है।
अर्थव्यवस्था की दृष्टि से सार्वजनिक उद्योगों के कारण महाराष्ट्र भारत का एक सुविकसित एवं समद्ध राज्य बन गया है। विद्युत उत्पादन में इस राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य के पश्चिम घाट के जलप्रपातों पर पन बिजली घर बने हैं। नागपुर और चन्द्रपुर में बड़े ताप बिजली घर तथा मुम्बई से 113 किमी उत्तर में परमाणु बिजली घर बना है जो भारत का पहला संयंत्र है। राज्य का खनिज व्यवसाय भी अर्थव्यवस्था में योगदान करता है। यहां मैग्नीज, तांबा, कोयला, चूना पत्थर, बॉक्साइड, लोह अयस्क तथा सिलिकायुक्त रेत पाये जाते हैं। अधिकांष खनिज नागरपुर और चन्द्रपुर जिलों में मिलते हैं। बोम्बे हाई में हाइड्रोकार्बन का उत्पादन भी बढ़ रहा है। महाराष्ट्र के दो तिहाई निवासी कृषक हैं तथा कृषि गतिविधियों पर 65 प्रतिषत श्रमिक रोजगार प्राप्त करते हैं। यहां धान, ज्वार, बाजरा, गेहूँ, अरहर, उड़द, चना, मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन एवं तम्बाकू प्रमुख फसले हैं। कपास, गन्ना, हल्दी एवं सब्जीयां नकदी फसले हैं। राज्य में आम, केला, संतरा व अंगूर की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। गुजरात के बाद मूंगफली उत्पादन में यह दूसरे नम्बर का राज्य है।
महाराष्ट्र को पूरे देश का औद्योगिक सम्पन्न केन्द्र माना जाता है। मुम्बई के पास समुद्री तेल कुएं की स्थापना से पेट्रोल रसायन उद्योग का तेजी से विकास हुआ। तेल परिष्करण और कृषि उपकरण, परिवहन उपकरण, रबड़ उत्पाद, तेल के पम्प, कम्प्रेशर, चीनी मिल की मशीनरी, रेफ्रीजरेटर, टेलीविजन, रेडियो जैसी वस्तुओं का उतपादन यहां किया जाता है। वाहन निर्माण उद्योग भी बढ़ रहा है। मुम्बई भारतीय फिल्म उद्योग का प्रमुख केन्द्र है। महाबलेश्वर, रत्नगिरी एवं मुम्बई में फलों को डिब्बा बंद करने का उद्योग आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वनों से मिलने वाली इमारती लकड़ी, बांस, चंदन आदि का भी अर्थव्यवस्था में सहयोग करते है।

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सांस्कृतिक दृष्टि से महाराष्ट्र प्राचीन भारतीय सभ्यता, संस्कृति तथा ऐतिहासिक रूप से समद्ध राज्य है। मराठी साहित्य का विकास यहां की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है। कोलापुर, तुलजापुर, पंढरपुर, नासिक, अकोला, चिपलूण आदि धार्मिक स्थलों पर दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। महाराष्ट्र का गणेश चतुर्थी का 10 दिवसीय उत्सव देश का प्रमुख उत्सव है। जहां रामनवमी तथा अन्य सभी भारतीय पर्व उत्साहपूर्वक मनाये जाते हैं। क्षेत्रीय देवताओं के प्रति भक्ति भाव, ज्ञानेश्वर एवं तुकाराम जैसे संत कवियों की शिक्षाओं तथा छत्रपति शिवाजी जैसे सामाजिक नेताओं के प्रति सम्मान भाव देखने को मिलता है। ज्ञप्राचीन कला की दृष्टि से अजंता व ऐलोरा की गुफाओं के चित्र, वस्त्र, सोने-चांदी के आभूषण, लकड़ी के खिलौने, चमड़े का काम और मिट्टी के बर्तन बनाने की कला प्रसिद्ध है। षास्त्रीय नृत्यशैलियों ने यहां कई प्रतिभाओं को जन्म दिया है। लावणी (रूमानी गीत), पोवाड़ा (ओजस्वी नृत्य) और तमाशा जैसी संगीत, नाटक व नृत्य लोक परम्पराऐं यहां की अलग ही पहचान है। भारत के फिल्म उद्योग की षुरूआत का श्रेय दादा साहब फाल्के एवं बाबू राव पेन्टर को जाता है। संगीत एवं गायन के क्षेत्र में षास्त्रीय संगीत को नई दिशा देने वाले पंडित पलुस्कर और पंडित भातखण्डे, वादक विलायत हुसैन एवं अल्ला रक्खा एवं गायक पंडित भीमसेन जोषी एवं लता मंगेषकर की महत्वपूर्ण देने है। सांस्कृतिक रूप से मुम्बई षहर का अपना महत्व है जहां कई प्रकार की कला दीर्घाएं देखने को मिलती हैं। यहां वर्षभर संगीत, नृत्य एवं कवि सम्मेलनों के आयोजन कराये जाते हैं।
आवागमन की दृष्टि से राज्य को पंाच राष्ट्रीय राजमार्ग दिल्ली, इलाहबाद, कोलकता, हैदराबाद एवं बैग्लूर से जोड़ते हैं। मुम्बई और अरब सागर के तटीय मैदान के षहरों को जोड़ने वाले कोंकण रेलवे महत्वपूर्ण रेलवे लाईन है। महाराष्ट्र में सुदृढ़ रेल तंत्र होने से यह रेल द्वारा भारत के सभी हिस्सों से जुड़ा है। राज्य में 4 अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे तथा कुल 24 हवाई अड्डे / हवाई पट्टियां है। इनमें से 17 महाराष्ट्र सरकार के नियंत्रण में है। मुम्बई राष्ट्रीय हवाई अड्ड से अन्तर्राष्ट्रीय हवाई सेवाऐं भी जुड़ी हुई है। कोंकण तट पर बना बन्दरगाह मुम्बई का प्रमुख बन्दरगाह है। पर्यटन की दृष्टि से मुम्बई, पुणे, नागपुर, औरंगाबाद, नासिक, नन्दुरबार, महाबलेश्वरम, लोनावाला, खण्डाला आदि प्रमुख स्थल है।