ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देखना हो तो आईये, हैदराबाद

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जानिए हमारी ऐतिहासिक धरोहर (अनदेखा भारत) -30
गीतांजलि पोस्ट ने अपने पाठकों के लिए इतिहास के झरोखे (अनदेखा भारत) नाम से एक विशेष कॉलम बनाया है जिसमे पाठको को देश की ऐतिहासिक धरोहर ,अनदेखा भारत जैसे:-250 साल से अधिक पुराने ऐतिहासिक दुर्ग,विभिन्न धर्मों के धार्मिक स्थल इत्यादि की जानकारिया दी जाती है । आज के इस विशेष कॉलम में हम आपको बताने जा रहे है…….अपने ऐतिहासिक स्मारकों एवं सांस्कृतिक गौरव के लिए पर्यटकों के बीच अपनी विशेष पहचान बनाता हैदराबाद। चार मीनार एवं चौमहल्ला पैलेस को यूनेस्को एशिया प्रशांत विरासत स्थल में शामिल किया गया। सालार जंग संग्रहालय दुनिया के सबसे बड़े निजी संग्रहालय में शुमार है। आज पर्यटन उद्योग हैदराबाद की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, यहां अनेक स्थल दर्शनीय है ।हैदराबाद के बारे में , लेखक एवं पत्रकार डॉ.प्रभात कुमार सिंघल की स्पेशल रिपोर्ट…….

चार मीनार-
शहर के मध्य स्थित चार मीनार स्मारक हैदराबाद शहर की विशिष्ठ पहचान है। चार मीनार का निर्माण मोहम्मद कुली कुतुबशाह ने करवाया था। इसकी प्रत्येक मीनार करीब 56 मीटर ऊँची है। यह एक चौकोर संरचना है। जिसमें प्रत्येक पक्ष 66 फीट लम्बा है तथा चार बड़े मेहराब है। प्रत्येक मीनार के आधार पर पुष्पगुच्छ की तरह डिजाईन वाली आकृतियां बनाई गई है। ऊपरी मंजिल तक पहुँचने के लिए 149 घुमावदार सीढ़ियां बनाई गई हैं। चार मीनार के समीप का बाजार लाड बाजार के नाम से प्रसिद्ध है जहां मोती, आभूषण खासकर चूड़ियों के लिए जाना जाता है।

मक्का मस्जिद –
रेलवे स्टेशन से 7 कि.मी. एवं बस स्टेण्ड से 5 कि.मी. दूरी पर स्थित मक्का मस्जिद मुस्लिम धार्मिक स्थलों मंे अपना अलग महत्व रखती है। यह भारत की सबसे पुरानी मस्जिदों में मानी जाती है। इसका निर्माण मुहम्मद कुली कुतुबशाह, कुतुबशाही राजवंश के पांचवें शासक द्वारा किया गया था। यह मस्जिद करीब 300 फीट एकड़ क्षेत्रफल में बनी है। मस्जिद ग्रेनाईड पत्थर की मनमोहक चौकोर संरचना है। मस्जिद का मुख्य इबादत हॉल 75 फीट ऊंचा, 220 फीट चौड़ा एवं 180 फीट लम्बा है। एक समय मंे 10 हजार व्यक्ति इबादत कर सकते हैं। मस्जिद में पांच गलियारें, धनुषाकार दीर्घाएं, अष्ठकोणीय बालकनियां, बनी हैं तथा छोटे गुम्बद लिये चार मीनारें बनाई गई हैं। मस्जिद में मेहराब पर कुरान के छंद तथा पुष्प एवं भित्ति चित्र ऊंकेरे गये हैं। मेहराबों में हर शाम रोशनी की जाती है। माना जाता है कि मस्जिद के निर्माण में 77 वर्ष का समय लगा।

चौमहल्ला पैलेस –
हैदराबाद में स्थित चौमहल्ला पैलेस की सुन्दरता तथा नक्काशीदार कार्य व स्थापत्य देखते ही बनता है। निजाम सलाबत जंग द्वारा इसका निर्माण कार्य 1750 ई. में शुरू कराया तथा इसका डिजाईन इस्फहान में शाह के महल की तर्ज पर तैयार किया गया। यहां कई महलों का समूह है जो दरबार हॉल के रूप में उपयोग में लाया जाता था।
इतावली संगमरमर से बना फलकनुमा पैलेस की सजावट, अलंकृत फव्वारे दर्शनीय है। ताज समूह द्वारा अब इसे विरासत होटल में तब्दील कर दिया गया है। पहाड़ी पर बना आस्मान गढ़ पैलेसे गॉथिक वास्तु शैली का सुन्दर नमूना है। महल में वर्तमान मंे पुरातात्विक अवशेष के साथ-साथ एक संग्रहालय दर्शनीय है। तारमति बारदार, पुरानी हवेली, राजा कोठी पैलेस एवं बेला विस्टा महल हैदराबाद के दर्शनीय भवन हैं।

बिरला मंदिर –
नौबाथ पहाड़ी की चोटी पर स्थित सफेद संगमरमर से निर्मित बिरला परिवार द्वारा बनाया गया बिरला मंदिर दर्शनीय स्थलों में शामिल है। इस मंदिर को बनान में 10 वर्ष का समय लगा और यह रामकृष्ण मिशन के स्वामी रंगनाथनन्द द्वारा अधिकृत था। मंदिर में मुख्य देवता भगवान वैंकटेश्वर के साथ-साथ अन्य देव प्रतिमाएं भी लगाई गई है। मंदिर में गणेश, हनुमान, शिव, साईं बाबा, ब्रह्मा लक्ष्मी, देवी दुर्गा एवं सरस्वती की मूतियां भी लगाई गई हैं। मंदिर की दीवारों पर गुरू गोविनद सिंह सहित कई महान पुरूषों के उपदेश देखने को मिलते है। रामोजी फिल्म सिटी के समीप बना भगवान वैंकटेश्वर को समर्पित सांधी मंदिर, गांधी पेट के पश्चिम की ओर भगवान वैंकटेश्वर को समर्पित चिलकुर बालाजी मंदिर, बंजारा पहाड़ियों रोड़ नं. 12 के समीप स्थित जगन्नाथ मंदिर तथा शिकन्दरा रेलवे स्टेशन से 26 कि.मी. दूर तिरूमल्ला भगवान वैंकटेश्वर को समर्पित रतलायाम मंदिर, हैदराबाद से 60 कि.मी. दूर श्री लक्ष्मीनारायण सिंह स्वामी मंदिर एवं हैदराबाद से 25 कि.मी. वारंगल सरस्वती मंदिर दर्शनीय है।

सालार जंग संग्रहालय-
एशिया का सबसे बड़ा और पुराना संग्रहालय सालार जंग विश्व का सबसे बड़ा निजी संग्रहालय है। इस संग्रहालय में 38 गैलरियों में 43 हजार से ज्यादा कलाकृतियां, 9 हजार पाण्डुलिपियां एवं 47 हजार मुद्रित पुस्तकें प्रदर्शित की गई है। प्रदर्शित की गई कलाकृतियां अपने आप में बेजोड़ है। संग्रहालय का प्रमुख आकर्षण है 19 वीं सदी की ब्रिटिश संगीतमय घड़ी जिसे इग्लैण्ड से लाया गया था। इस घड़ी को देखने के लिए घड़ी के सामने कुर्सियां लगाकर देखने की व्यवस्था की गई है। यहां रोम, इटली आदि देशों की कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई है। यह संग्रहालय शुक्रवार को छोड़कर सप्ताह के सभी दिन खुलता है। इसकी स्थापना 16 दिसम्बर 1951 को की गई थी।
हैदराबाद में इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण संग्रहालय के साथ-साथ सिटी म्यूजियम, राज्य पुरातत्व संग्रहालय, हैदराबाद से 60 कि.मी. दूर सुरेन्द्रपुरी का पौराणिक संग्रहालय तथा शहर का बिरला विज्ञान संग्रहालय भी दर्शनीय है।

बिरला तारा मण्डल –
हैदराबाद स्थित बिरला तार मण्डल देश का पहला तारा मण्डल है जिसका शुभारम्भ 1985 में स्व. एन्टी रामाराव द्वारा किया गया था। तारा मण्डल में ब्रह्माण्ड एवं खगोलशास्त्र से जुड़ी कई रोचक बातें देखने को मिलती हैं। आधुनिक तकनीक द्वारा ब्रह्माण्ड की यात्रा कराई जाती है जो मंत्रमुग्ध कर देने वाली होती हैं। यहां एक नवीनतम डायनासोरियम बना है जो डायनासोर अण्डे के जीवाष्मों का एक संग्रह है। संग्रहालय का मुख्य आकर्षण एक घुड़सवार ”कोटसौरस यमनपल्लीइन्सिस“, जो कि 160 मिनियन वर्षीय डायनोसोर का अवशेष है।

हुसैन सागर –
हुसैन सागर झील हैदराबाद और सिकन्दराबाद को अलग-अलग करती है। यह झील इसके मध्य ”रॉक ऑफ गिब्रालटर“ पर स्थापित महात्मा बुद्ध की 18 मीटर ऊँची प्रतिमा के कारण पर्यटकों के बीच आकर्षण का केन्द्र है। यह प्रतिमा 350 टन वजन की है। इसे एक पत्थर को तराशकर बनाया गया है। यह मूर्ति एक ऊँचे कलात्मक प्लेटफार्म पर खड़ी मुद्रा में आशीर्वाद देते हुए बनाई गई है। प्लेटफार्म के चारों ओर छोटा सा सुन्दर बगीचा बनाया गया है। बेगमपेट के समीप हुसैन सागर झील का यहां वहीं स्थान है जो मुम्बई में मेरिन ड्राई का है। बताया जाता है इसका निर्माण इब्राहिम कुली कुतुब शाह के दामाद हुसैन शाह ने करवाया था। यहां नन्नय्या, तिक्कना, इर्रना, रूद्रम्मा, मोल्ला, जशुआ, अन्नमय्या, त्यागय्या, वेमाना और पिंगली, वैंकय्या आदि 33 प्रसिद्ध हस्तियों की मूर्तियां लगाई गई हैं। झील में नौकायन एवं जल खेलों का आनन्द लिया जा सकता है। झील के चारों ओर मनोहारी आकर्षक बगीचे लगाये गये।

लुंबनी पार्क –
हैदराबाद का लुबनी पार्क हुसैन सागर झील के समीप स्थित एक अत्यन्त मनोरम पार्क है। अन्य पर्यटक स्थलों के नजदीक होने के कारण यह अपने आकर्षण के लिए चर्चित है। इस पार्क का निर्माण 1994 ई. में किया गया तथा इसके बाद इसे लोकप्रिय बनाने के लिए कई बार नवीनीकरण किया गया। पार्क में लेजर शो ऑडिटोरियम, बोटिंग की सुविधा, संगीतमय फव्वारे एवं उद्यान बने हैं। यह पार्क पिकनिक मनाने का एक अच्छा स्थल है। यहां का लेजर शो ऑडिटोरियम देश में अपनी तरह का पहला ऑडिटोरियम है जिसमें 2000 लोगों के बैठने की सुन्दर व्यवस्था है। यहां हर दिन हैदराबाद के इतिहास पर आधारित शो हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में दिखाया जाता है।
गांधीपेट झील के समीप उस्मान सागर जिसे मुसा नदी पर 1920 ई. में बनवाया था, हैदराबाद के लिय पेयजल का स्त्रोत है। यहां बने पार्क में रिसोर्ट एवं मनोरंजन पार्क प्रमुख आकर्षण है। इससे जुड़वा हिमायत सागर भी दर्शनीय है। हैदराबाद की सोरार्नगर झील का विकास शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2003-04 में 200 करोड़ रूपये व्यय कर किया गया। आज यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी देखने को मिलते हैं।

नेहरू जूयोलॉजिकल पार्क –
हैदराबाद में मीर आलम तालाब के समीप स्थित यह चिड़ियाघर पशु-पक्षियों का प्राकृतिक आवास है। यहां कई प्रकार के पशु-पक्षियों, जलीय जन्तु, उभयचर प्रजाति के जानवर पाये जाते हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरू के नाम पर यह चिड़ियाघर प्रमुख आकर्षण तथा इसे 1963 में स्थापित किया गया। करीब 380 एकड़ जमीन पर स्थापित इस चिड़ियाघर का रखरखाव वनविभाग द्वारा किया जाता है। यहां लुप्त प्रायः प्रजातियों के पुर्नवास के प्रयास किये जाते तथा अनुसंधान के प्रति रूचि जाकृति की जाती है। यहां विशेष सफारी जैसे बाघ सफारी, शेर सफारी, भालू सफारी आदि प्रमुख आकर्षणों में हैं। यहां ट्रेन की सवारी के साथ-साथ हाथी की नियमित सवारी आयोजित की जाती है। यहां एक संग्रहालय भी बनाया गया है जिसमें प्राकृतिक इतिहास की जानकारी दी जाती है। यहां बने मिरलम टैंक झील में प्रवासी पक्षी देखने को मिलते हैं। चिड़ियाघर प्रति सोमवार बंद रहता है तथा अन्य दिनों में प्रातः 8 बजे से सायं 5.30 बजे तक खुला रहता है। प्रवेश, फोटोग्राफी, ट्रेन व सफारी के लिए निर्धारित शुल्क लगता है।
चिलकुर मार्ग पर मृगावानी राष्ट्रीय उद्यान, जयन्ति हिल्स पर के.बी.आर. राष्ट्रीय उद्यान, कोअला विजयभास्कर रेड्डी बॉटनिकल गार्डन (कोंडापुर), लोट्स तालाब एवं वनस्थलपुरम् स्थित महावीर हरिना वनस्थली नेशनलपार्क भी दर्शनीय हैं।

रामोजी फिल्म सिटी –

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हैदराबाद पर्यटन पर आने वाले सैलानियों के लिए आधुनिक रामोजी फिल्म सिटी किसी भी आकर्षण से कम नहीं है। करीब 1660 एकड़ क्षेत्र में बनी दुनियां की सबसे बड़ी एकीकृत फिल्म स्टूडियों एशिया का लोकप्रिय पर्यटन एवं मनोरंजन केन्द्र है। इसे गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड मंे शामिल किया गया है। विजयवाड़ा मार्ग पर हैदराबाद से यह स्थल करीब 25 कि.मी. दूर स्थित है। यहां स्टूडियों में 50 शूटिंग फ्लोर बनाये गये है। जहां एक साथ 15 से 25 फिल्मों की शूटिंग की जा सकती है। यहां 500 से अधिक सेट लोकेशन हैं। अनेको उद्यान डिजिटल फिल्म निर्माण की सुविधाएं, आउटडोर लोकेशन, इनडोर लोकेशन, उच्च तकनीक के लैंस, प्रयोगशालाएं, तकनीकी सहायक, कॉस्ट्यूम डिजाईन लोकेशन, मेकअप, सेट-निर्माण, तैयार साज-सज्जा, कैमरा, फिल्म निर्माण उपकरण, ऑडियो प्रोडेक्शन, फिल्म प्रोसेगिंग आदि सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां एक साथ 40 देशी फिल्म एवं 20 विदेशी फिल्म बनाई जा सकती है। इसे प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक देखने के लिए आते हैं। इतनी बड़ी फिल्म सिटी को देखने के लिए प्रबन्धन द्वारा वाहनों की व्यवस्था की गई हैं। फिल्म सिटी में प्रवेश एवं वाहन के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ता है।

गोलकुंडा किला –

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हैदराबाद से पश्चिम में 11 कि.मी. दूर स्थित गोलकुंडा आठ सिंह द्वार वाला विशाल दुर्ग, सरोवर, महलों, मस्जिदों के खण्डर सहित अनेक दर्शनीय स्थल लिये हुए है। यह किला भारत के शानदार किलों में शामिल है। 400 फीट ऊँची ग्रेनाईट पहाड़ी पर बने इस किले की आन्तरिक डिजाईन इसे भारत के सबसे मजबूत किलों में माना जाता है। किला पत्थर की मजबूत दीवार से घिरा हुआ है। किले की परिधी करीब 9 कि.मी. है तथा 3 परकोटे एवं 87 बुर्ज बनी है। किले का निर्माण चौदवीं शताब्दी में वारंगल के हिन्दु शासक द्वारा किया गया था। यहां तारामति, पेमावति, भागमति तथा हयात बक्शी बेगम के महल, मनोहारी वाहिटकाएं तथा सात कुतुबशाही सुल्तानों के मकबरे बने हैं। गोलकुंडा हीरों के विश्व प्रसिद्ध बाजार के रूप में प्रसिद्ध रहा है।

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल - लेखक एवं पत्रकार
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल – लेखक एवं पत्रकार