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कितनी सार्थक हैं उज्जवला योजना

GEETANJALI POST

जैसा कि हम जानते हैं कि वर्तमान में देश की 60 प्रतिशत जनता गांवों में रहती हैं, 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 640,867 गांव हैं जिनमें देश की 68.84 प्रतिशत आबादी रहती है, अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार देश के 26 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के से नीचे रह रहे हैं, जिनके पास दो जून का खाना जुटाना भी मुश्किल है वो एलपीजी गैस कनेक्शन कैसे ले सकते हैं। उनकी महिलाये और बच्चिया आज भी जंगल से ईधन लाती हैं या गोबर के उपले बनाती हैं ओर पारम्परिक चूल्हे पर खाना बनाती हैं। खाना बनाते समय ईधन और कंण्डों से निकलने वाले धूए के कारण महिलाओं एंव लडकियों को दमा और श्वास संबधी समस्या होने लगती हैं और वे 30-40 साल की उम्र में ही 50 से 60 की दिखाई देने लगती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन एक रिपोर्ट के अनुसार है कि पारंपरिक चूल्हे से एक दिन में उठने वाला धुआं लगभग 400 सिगरेट के बराबर नुकसान पहुंचाता है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि ईधन और कंण्डों से खाना बनाने वाले की क्या हालत होती होगी।

धूए से घुटती महिलाओं को पारम्परिक चूल्हे से मुक्ति दिलाने के लिये हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ ईंधन के उपयोग, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1 मई 2016 को केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की जिसके अन्तर्गत तीन करोड़ गरीब परिवारों की महिलाओं को जो बीपीएल श्रेणी के नीचे आती हैं उनको मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिये गये। उज्जवला योजना कितने घरों को उज्ज्वल बनायेगी ये तो 2-3 साल बाद ही बताया जा सकेगा लेकिन वर्तमान ऑकडें बताते हैं कि उज्ज्वला योजना के तहत जिन तीन करोड़ महिलाओं को कनेक्शन दिये थे, उनमें से दो करोड़ महिलाओं ने गैस सिलेण्डर खाली हो जाने के बाद दुबारा गैस सिलेंडर नही भरवाया जो प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर सवाल खडा करता हैं कि कहीं अन्य योजनाओं की तरह इस योजना में भी राजनीति तो नहीं चल रही हैं ? या लोगों को अवेयर नहीं हें या दुबारा गैस सिलेंडर भरवाने की जानकारी नहीं हैं जो अपने सिलेण्डर रिफिल नहीं करवा रहे हैं।

योजना भ्रष्टाचार या लालफीताशाही की भेट चढ गयी या सरकारी तन्त्र में कमी रह गयी या जनता में कमी हैं ये जांच रिर्पोट के बाद ही सामने आयेगा, लेकिन यह सोचने वाली बात हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? इसी के लिये नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वावधान में 3 अक्टूबर को दिल्ली में राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें देश भर से पत्रकारों एंव उज्जवला योजना के विषय विशेषज्ञों को बुलाया और उज्जवला योजना का मंथन किया, जिसमें जर्नलिस्ट्स एसोशिएशन ऑफ राजस्थान से लेखिका रेणु शर्मा ने भी शिरकत की। उज्जवला योजना के विषय विशेषज्ञों, पत्रकारों ने अपने-अपने राज्य में चल रही उज्जवला योजना की जानकारी दी और ये बताया कि किस प्रकार इस योजना को उपयोगी बनाया जा सकता हैं। उज्जवला योजना को लोकप्रिय बनाने के लिये किये जा रहे प्रचार का माध्यम बदलना चाहिये क्योकि जिस प्र्रकार इसका प्रचार किया जा रहा हैं वो लागों की पंहुच से दूर हैं जैसे उज्ज्वला योजना को जन-जन तक पंहुचाने के लिये इसे ऑनलाईन किया जा रहा हैं जो उन्ही के लिये उपयोगी होगी जहां इंटरनेट सेवा हैं।

दिसम्बर 2015 में किये गये एक सर्वे में सामने आया कि देश की करीब एक अरब आबादी के पास आज भी इंटरनेट की सुविधा ही नहीं हैं, जब लागों के पास इंटरनेट की सुविधा ही नहीं हैं तो वे ऑनलाईन कैसे जान सकते हैं कि सरकार द्वारा क्या योजना चलायी जा रही हैं। गांवों के लोगों को उज्जवला योजना से जोडने का अच्छा और सस्ता साधन हैं इस योजना को राशन कार्ड से जोड दिया जाये, जिस प्रकार राशन कार्ड से दाल,चीनी,केरोसिन दिया जाता हैं उसी प्रकार यदी राशन कार्ड से सिलेण्डरों का वितरण होने लगेगा तो लोग वही से वो अपने सिलेण्डर को रिफिल करवा सकते हैं। इसके अलावा योजना की आधिकारिक एंव मंत्रालय स्तर पर संमीक्षा करके इसे और उपयोगी बनाने के लिये सुझाव आंमत्रित किये जाने चाहिये जिससे वास्तविक व्यक्ति को लाभान्वित किया जा सके।

रेणु शर्मा,जयपुर संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र

रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र






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