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कब तक होता रहेगा अपमान राष्ट्रगीत का

GEETANJALI POST (रेणु शर्मा,जयपुर)

हमारे यहां कुछ सामाजिक संगठनों के नेता इंतजार करते रहते हैं कि सरकार द्वारा कोई काम शुरू किया जाये और वे उसका विरोध करे विरोध करने वाले ये नहीं देखते की उनके विरोध करना जायज हैं या नहीं उनका मकसद विरोध प्रदर्शन करना होता हैं। हॉल ही में मंगलवार से जयपुर नगर निगम के मेयर अशोक लाहोटी के निर्देशानुसार जयपुर नगर-निगम कार्यालय में सभी कर्मचारियों का रोजाना प्रात: 9:50 मिनट पर राष्ट्रगान और शाम को राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य किया गया, इससे कर्मचारियों में राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार होगा एंव आमजन में भी इसका अच्छा और सकारात्मक संदेश जायेगा यह मेयर का सराहनीय प्रयास हैं। मेयर के इस कार्य की सराहना की जानी चाहिये लेकिन मेयर के इस कार्य की शुरूआत होने से पहले ही कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया वहीं मुस्लिम संगठन कह रहे हैं कि सर्वाच्च न्यायालय के 11 अगस्त 1986 के आदेशानुसार किसी को कोई भी गीत गाने को बाध्य नहीं किया जा सकता हैं।
माना किसी को कोई गीत गाने को बाध्य नही किया जा सकता लेकिन जिस गीत और गाने को हमारे मेयर गाने के लिये अनिवार्य कर रहे हैं वो कोई साधारण गाना नहीं हैं वो हमारे देश का राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान हैं जिसके गाने पर हमें गर्व होना चाहिये और यहां राष्ट्रगीत गाने का विरोध कर सामाजिक वातावरण खराब किया जा रहा हैं।

धर्म के ठेकेदार नेता अल्पसंख्यकों का हवाला देते हुए कहते हैं कि मेयर का यह आदेश अल्पसंख्यकों को आहत करने वाला हैं इससे भेदभाव बढेगा क्योकि नगर-निगम के जो कर्मचारी राष्ट्रगीत नहीं गायेगें वो अपने को अलग-थलग महसूस करेगें।
सवाल यह हैं कि क्या अल्पसंख्यक इस देश के नागरिक नहीं हैं जो राष्ट्रगीत नहीं गायेगें ? जिस देश में वे रहते हैं उस देश के राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को गाने से उन्हे समस्या नहीं होनी चाहिये। हालाकि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के गाने को लेकर आम मुस्लिम को कोई परेशानी नही हैं, वो इसे पहले से गाते आ रहे हैं और आज भी गा रहे हैं लेकिन कुछ धर्म के ठेकेदार नेता जो अपने को सुर्खियों में लाना चाहते हैं जिनका मकसद सिर्फ सरकार के अच्छे कदम का विरोध करना ही हैं।

इस मामले में भारत को चीन से शिक्षा लेनी चाहिये कि चीन सरकार राष्ट्रगान का अपमान करने पर जहां 15 दिन के कारावास की सजा का प्रावधान था चीन की सरकार उसे बढाकर 3 साल का कारावास करने पर विचार कर रही हैं, फिर भारत में ऐसा क्यों नही किया जा सकता हैं।
जब हमारे संविधान में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों को गाये जाने का प्रावधान हैं तो फिर राष्ट्रगान के गाने को लेकर विरोध करना स्पष्ट संविधान का अपमान हैं अत: संविधान का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिये। सरकार को चाहिये कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को गाने का विरोध करने वालों को देशद्रोही घोषित करके उन्हे वाछितं सजा दे जिससे भविष्य में लोग राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का अपमान करने जैसा अपराध नहीं करेगे।

राष्ट्रीयता की भावना के प्रसार के लिये सरकार द्वारा किये जा रहे कार्य का विरोध करने वालों को चाहिये कि वे इस कार्य की प्रशंसा करे जिससे राष्ट्र से प्रेम होगा जिसे राष्ट्र से प्रेम होगा वो राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान गायेगा जिसे प्रेम नहीं होगा वो नहीं गायेगा और नेताओं को इसका विरोध और अनावश्यक टिका-टिप्पणी करने से बचना चाहिये।

रेणु शर्मा,जयपुर संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र

रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र






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