सपनों को पूरा करने की जिद ……

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GEETANJALI POST

कहते हैं जिद के आगे जीत हैं, सपनों को पूरा करने की चाह हो तो कोई नही रोक सकता, गत माह देहली में एक कार्यशाला के दौरान मेरा वहां के टॉयलेट में जाना हुआ, वहां देखा एक 21-22 साल की लडकी तो वहां वाश-बेसिन के पास रखी झाडू के पास बैठी हुई थी। मैने लडकी के कन्धे पर हाथ रखकर कहां तुम यहां गंदे में क्यों बैठी हो बाहर जाकर लॉन में बैठो तो लडकी ने बताया वो वहां सफाई का काम करती हैं, काम के बदले मिलने वाले पैसों से वह अपनी पढाई कर रही हैं। लडकी की बात सुनकर मेरी दिल भर आया। देखने में साधारण सी लगने वाली सामान्य वर्ग की लडकी शौचालय में सफाईकर्मी का काम करे यह सुनकर अंचभा होगा लेकिन कुछ करने की ललक, सपनों को पूरा करने की जिद हो तो इंसान कोई भी काम कर सकता हैं।

लेखिका रेणु शर्मा के साथ पूजा केशरी
लेखिका रेणु शर्मा के साथ पूजा केशरी

सफाईकर्मी का काम करने वाली पूजा के लिये शौचालय में सफाई का काम करना आसान नहीं था। सामान्य वर्ग से होने के कारण समाज, परिवार सभी ने पूजा के काम का विरोध किया लेकिन अपने सपनों को पूरा करने की चाहत ने पूजा के कदम डगमगाने नहीं दिए और वो चल पडी समाज परिवार की परवाह किये बिना अपने सपनो को पूरा करने के लिये ।

दिल्ली में रहने वाली पूजा केशरी के पिताजी विनोद प्रसाद केशरी मजदूरी करते हैं जिससे घर खर्च मुश्किल से चलता हैं, फिर भी उन्होने अपने बच्चों को ग्रेजुएशन की शिक्षा दी, आगे की पढाई के लिये उनके पास पैसा नही था। घर की बडी बेटी पूजा की इच्छा बीएड करने की थी जिसका खर्चा उसके घरवाले नही उठा सकते थे। पैसो के लिये पूजा ने नौकरी करने का सोचा, नौकरी के लिये बहुत भटकी अन्त में उसे शौचालय मे सफाईकर्मी का काम मिला। पूजा ने घरवालों को काम के बारे मे बताया तो सभी ने सफाईकर्मी का काम करने का विरोध किया लेकिन पूजा की जिद , उसके सपनों के आगे किसी की नही चली और उसने सफाईकर्मी का काम करना शुरू कर दिया। पूजा  टॉयलेटस की सफाई करती हैं, काम करने के बदले उसे प्रति माह उसे 12 हजार रूपये मिलते हैं जिससे वह अपनी बीएड की फीस देती हैं साथ ही कार्यस्थल पर वह अपनी किताबे साथ रखती हैं जब भी उसे समय मिलता हैं वह अपनी पढाई करती हैं। पूजा ने बताया की ईमानदारी से कोई भी काम करने में हमे शर्म नहीं करनी चाहिये।

ऐसी ना जाने कितनी पूजा हमारे समाज में हैं जो अपनी शिक्षा के लिये नौकरी करके पैसा कमाती हैं, ऐसे में विचार आता हैं सरकारी योजनाओं का जो बालिका शिक्षा के लिये चलायी गयी हैं जिसका लाभ बालिकाओं को नहीं मिल रहा हैं। शिक्षा की योजनाओं का पैसा कहां जा रहां हैं ? सरकार को ऐसे गरीब बच्चों को चिन्हित कर उनकी शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए, साथ ही इस योजना की भी जांच की जानी चाहिए की इस योजना के तहत किसे लाभान्वित किया गया हैं, जिससे पता चल सके की बालिका शिक्षा योजना वास्तव में गरीब लोगों तक पहुंच रही हैं या योजना भ्रष्टाचार की भेट चढ रही हैं।