सचिवालय के संविदा कर्मचारी को देना पड़ेगा पत्नी को गुजारा-भत्ता

1010
183

जयपुर। शहर की अपर वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट, क्रम-2, जयपुर महानगर अदालत ने घरेलू हिंसा के मामले में सचिवालय में संविदा कर्मचारी को अपनी पत्नी को भरण-पोषण के लिए 7,500 रूपये देने का आदेश दिया है। अदालत ने संतोष देवी की घरेलू हिंसा की याचिका पर सचिवालय में संविदा कर्मचारी के पद पर कार्यरत उसके पति लक्ष्मीनारायण पीपलीवाल के खिलाफ यह आदेश पारित किया है।

परिवादिया के अधिवक्ता शिव जोशी ने अदालत को बताया कि शादी के कुछ वर्षों बाद संतोष अप्रार्थी के साथ अपने ससुराल वालों से अलग होकर जयपुर में झालाना डूंगरी में किराए के मकान में आकर रहने लग गई और पति के साथ एक्सपोर्ट कंपनी में धागा कटिंग का कार्य करने लग गई। कुछ समय बाद फैक्ट्री छोड़ने पर वह अप्रार्थी के साथ खुली मजदूरी, बैलदारी का कार्य कर जीवनयापन करने लगी। अप्रार्थी उससे सारी कमाई हुई राशि छीन लेता।

वर्ष 2000 में अप्रार्थी ने उसके स्त्रीधन में से ढाई किलो सोने-चांदी के जेवरात बेचकर व कुछ रुपए उसकी माता से मंगवाकर तलाई कच्ची बस्ती झालाना डूंगरी में एक मकान अपने नाम से खरीदा। उसके बाद से ही अप्रार्थी आए दिन बेवजह परिवादिया से गाली गलोच एवं मारपीट करता और अप्रार्थी परिवादिया से मोटर साईकिल खरीदने के लिए 50 हजार रुपए लाने के लिए कहता।

अपने आदेश में यह कहा कोर्ट ने:

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अप्रार्थी लक्ष्मी नारायण प्रार्थीया व उसके बच्चों के साथ किसी प्रकार की कोई घरेलू हिंसा कारित नहीं करे, ना करावे। इसके अलावा भरण-पोषण के रूप में प्रार्थीया को 2,500 रूपए एवं उसके दोनों बच्चों को 2,500-2,500 रूपए इस प्रकार कुल 7,500 रूपए भरण-पोषण के रूप में आवेदन की दिनांक से प्रत्येक माह की 10 तारीख तक अदा करेगा।

परिवादिया संतोष देवी ने अपने परिवाद में बताया कि उसका विवाह लक्ष्मी नारायण के साथ 12 जुलाई 1993 को हिन्दू रीति रिवाजों से जयपुर में संपन्न हुआ था। विवाह के तीन वर्ष बाद से ही पति दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक, शारीरिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करता। इतना ही नहीं वह बाइक व 50 हजार रुपए मांगने लगा और उसके घरवालों कम दहेज लाने की बात पर ताने सुनाने लगा।

एक दिन पति व ससुराल जनों ने दहेज की मांग करते हुए मारपीट कर उसे घर से बाहर निकाल दिया। उसके बाद उसकी माता माता कभी पांच हजार व कभी 10 हजार रुपए परिवादिया को देकर भेजती और जब भी पति व उसके घरवालों की रुपए मांगने की इच्छा होती तो परिवादिया को लात-घूंसों से मारपीट करते।

इनका कहना है :

“परिवादिया का पति सचिवालय में संविदा कर्मचारी है जबकि वह अपनी पत्नी एवं बच्चों को भरण पोषण देने के लिए मना कर दिया था। इस पर मैंने परिवादिया की तरफ से माननीय न्यायालय में याचिका दायर की थी जिस पर न्यायालय ने महिला के हक़ में फैसला किया है।” –एडवोकेट शिव जोशी

एडवोकेट शिव जोशी
एडवोकेट शिव जोशी