अतुल्य प्राकृतिक सुन्दरता का धनी केरल

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जानिए हमारी ऐतिहासिक धरोहर (अनदेखा भारत) -35

गीतांजलि पोस्ट डॉ. प्रभात कुमार सिंघल, लेखक एवं पत्रकार, कोटा
आईये! अब आपको ले चलते है दक्षिण भारत के एक ऐसे राज्य केरल की धरती पर जहां समुद्र, समुद्रतट, वन, झरने आदि प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न है और पुरानी एवं अधुनातन संस्कृति का सुन्दर समन्वय है। यहां की ऐतिहासिक, प्राकृतिक एवं धार्मिक सम्पदा ने केरल को समृद्ध बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कालीदास के रघुवंश में तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र में केरल का सुन्दर वर्णन मिलता है। राज्य में शिशु मृत्यु दर सबसे कम होने के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं यूनिसेफ ने इसे विश्व का प्रथम ”शिशु सौहार्द राज्य“ की मान्यता प्रदान की है। नोका दौड़ इस राज्य की देश में अपनी विशिष्ठ विशेषता है।

अर्थव्यवस्था की दृष्टि से कृषि, सेवा क्षेत्र, पर्यटन, व्यापार, ऑउटसोर्सिंग, बैंकिंग एवं वित्त संस्थाएं तथा मछली पकड़ने का उद्योग अपना महत्वपूर्ण योगदान करता है। काली मिर्च उत्पादन का यह सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक राज्य है। यहां से काजू, इलायची व अदरक का निर्यात भी किया जाता है। केरल की मुख्य फसल चावल, नारियल, चाय, कॉफी, रबड़, काजू, मसाले, काली मिर्च, इलायची, दाल चीनी और जायफल है। यहां नारियल रेशे का उद्योग, हैण्डलूम, हस्तशिल्प, लघु उद्योग आदि पाये जाते हैं। राज्य में खनिज सम्पदा बॉक्साइड, सिलिका, सिलिमानाइड, जिक्रॉन, क्वाट्ज आदि पाये जाते हैं। पर्यटन यहां का मुख्य व्यवसाय है।

सांस्कृतिक दृष्टि से केरल भारतीय परम्परा के अनुरूप गणित एवं ज्योतिष के क्षेत्र में काफी समृद्ध रहा है। केरल का गणित में विश्व को महत्वपूर्ण योगदान रहा। केरल के गणित और ज्योतिष का विकास आर्यभट्ट की रचना आर्यभट्टय ग्रंथ के आधार पर हुआ। कुछ लोग आर्यभट्ट को केरल का विद्वान मानते है। इनके आधार पर हरिदत्त द्वारा खोजी गई ”परहित्म“ तथा परमेश्वरन द्वारा खोजी गई ”दृगणितम्“ प्रमुख पद्वतियां है। केरल के प्रसिद्ध गणितज्ञों की सूची काफी लम्बी है। यहां की जीवन शैली में आयुर्वेद समाया हुआ है। आयुर्वेद चिकित्सा शैली के कारण केरल पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसके आधार पर ही विकसित ”स्वास्थ्य पर्यटन“ केरल की विशेषता है। पंचकर्म चिकित्सा के लिए सैकड़ों विदेशी पर्यटक प्रतिवर्ष केरल आते हैं। यहां अष्टवैद का परिवार आयुर्वेद चिकित्सा के लिए प्रसिद्ध है। केरल में के.आर.रामनाथन, आर.एस. कृष्णन, यू.एस. नायक, एम.एम. मत्ताई, एम.एस. स्वामीनाथन, पी.क. अयंगर, एन. के. पन्नीकर, एन.बालकृष्णन नायर तथा ताणु पùनाभम आदि सुविख्यात वैज्ञानिक हुए हैं।

केरल की नृत्य, संगीत एवं नाटय शैली तथा विभिन्न उत्सवों के आयोजन राज्य को विशेष सांस्कृतिक राज्य का दर्जा प्रदान करते हैं। यहां प्राचीन एवं अधुनातन कलाओं का अच्छा संगम देखने को मिलता है। केरल की कलाओं को सामान्यतय दो वर्गों को में बांटा गया है। एक दृश्य कला एवं दूसरी श्रव्य कला। दृश्य कला में रंगकला, अनुष्ठान कला, चित्रकला एवं सिनेमा आते हैं। रंगकलाओं को सामाजिक, धार्मिक, कायिक एवं विनोद परख श्रेणियों में विभक्त किया गया हैं। मोहिनीयाट्टम जैसा लास्य नृत्य मंदिर कलाओं की श्रेणी में आता है। इसके साथ ही कूत्तु, कूडियाट्टम, कथकलि, कृष्णानाट्टम, कावडियाट्टम, अर्जुन नृत्तम, तिटम्बू नृत्तम, अय्यप्पन कूत्तु आदि नृत्य मंदिरों में धार्मिक आयोजनों के साथ किये जाते हैं। अनुष्ठान कलाओं में कुछ नाट्य स्वरूप हैं जो मनोविनोद के लिए होते हैं। कुरत्तियाट्टम, पोराट्टुनाटक एवं काक्कारिश्शि नाटक मनोरंजन के लिए प्रसिद्ध है। उत्तरी केरल के पर्वतीय क्षेत्र में जनजातियों में भी गीत संगीत एवं नाट्य परम्पराएं देखने को मिलती हैं।

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सांस्कृतिक परम्परा एवं मनोरंजन का सामजस्य हमें केरल की वलमकली जिसे नोकायन दौड़ भी कहा जाता है केरल में देखने को मिलता हैं। सर्वोधिक प्राचीन नोका दौड़ ओणम् के अवसर पर अराणमुला नामक स्थान पर देखने को मिलती है। वर्ष 1972 में उत्सव के कार्यक्रम में नोका प्रतिस्पर्द्धा को जोड़ा गया। सर्पनौका प्रतिस्पर्द्धा को देखने के लिए देश-विदेश के पर्यटक बड़ी संख्या में पम्पा नदी के किनारे खड़े रहते हैं। इस स्पर्द्धा में लगातार सर्पनौकाओं की संख्या बढ़ रही है। नौकाचालक श्वेत मुण्डू एवं पगड़िाय बांधे परम्पवरागत नौका गीत गाते हुए नौका संचालन करते हैं। नौका के अग्र सिरे पर सुनहरी झालर एवं पताकाएं तथा मध्य भाग में सजी छतरीयां नौका को सुन्दर बनाती हैं। ओणम् केरल का प्रसिद्ध पर्व है, जिसे फसल कटाई के समय बनाया जाता है। महाशिवरात्री पर पेरियार नदी के पट पर लगने वाले भव्य मेले को कुंभ के मिले की संज्ञा दी जाती है। सबरी माला के अय्यप्पा मंदिर में इस दौरान मकरविलक्कु का आयोजन किया जाता है। करीब 41 दिन तक चलने वाले इस उत्सव में बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक शमिल होते हैं। नवरात्री पर्व पर सरस्वती पूजा का प्रचलन है। त्रिसूर के वडक्कुमनाथ मंदिर में प्रतिवर्ष अप्रैल में पूरम त्यौहार बनाया जाता है जिसमे सजे-धजे हाथियों की शोभा यात्रा निकाली जाती है। हिन्दू, मुसलमान एवं ईसाई सभी अपने-अपने पर्वों को उत्साहपूर्वक मनाते हैं।

भारत की दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर अरब सागर एवं सह्याद्रि पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित खूबसूरत भाग को केरल के नाम से बुलाते हैं। केरल लक्षद्वीप सागर एवं पश्चिमी घाट के मध्य अरब सागर के किनारे स्थित है। केरल के पूर्व में तमिलनाडु तथा उत्तर में कर्नाटक राज्यों की सीमाएं लगती हैं। केरल में 27 प्रतिशत वन क्षेत्र पाया जाता है। यहां के जंगल सघन है तथा औषधीय जड़ी-बूटियों से भरपूर हैं। केरल में आयुर्वेद का व्यापक विस्तार देखने को मिलता है। केरल राजय का गठन 1 नवम्बर 1956 को हुआ तथा तिरूवनन्तपुरम को इसकी राजधानी बनाया गया जिसका नाम बदलकर अब त्रिवेन्द्रम कर दिया गया है। राज्य का भौगोलिक क्षेत्रफल 38863 वर्ग कि.मी. है तथा जनसंख्या 33406061 है। यह भारत का शत-प्रतिशत साक्षरता वाला पहला राज्य है। राज्य की प्रमुख भाषा मलयालम है तथा अंग्रेजी भी यहां उपयोग में लाई जाती है। राज्य में प्रशासनिक दृष्टि से 14 जिले हैं। यहां बरसात का मौसम सबसे सुहावना होता है तथा यहां 3017 मि.मी. औसत वार्षिक वर्षा होती है।बड़ी संख्या में नदियों की उपस्थिति ने केरल को सर्वोधिक जल संसाधन सम्पन्न राज्य बनाया है। यहां के पश्चिमी घाट से करीब 41 नदियां निकलती है जो बेकवाटर की संरचना करते हुए अरब सागर में मिल जाती हैं। पेरियार, भारतप्पुषा, पम्बा, चालकुडी, कल्लड़ आदि प्रमुख नदियां हैं। इन नदियों से राज्य की कृषि एवं बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। राज्य में जंगलों की उपस्थिति ने वन्य जीवों को भी संरक्षण प्रदान किया है। यहां पेरियार एवं साइलेन्ट वेली राष्ट्रीय नेशनल पार्क तथा वयनार्ड वन्यजीव अभ्यारण्यों में वन्यजीवों की अठखेलियां देखने को मिलती हैं। राज्य में 590 कि.मी. लम्बी समुद्रीयतट रेखा, नहरों, झीलों और नदियों का बड़ा नेटवर्क है जिसे केरल का बेकवॉटर कहा जाता है।

आवागमन की दृष्टि से केरल हवाई, रेलवे एवं सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। कोच्चीन अरब सागर का प्रमुख बन्दरगाह है राज्य के त्रिवेन्दरम में अन्तर्राष्ट्रीय विमान सेवा उपलब्ध है। कर्नाटक एवं तमिलनाडु राज्यों से केरल सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। केरल में करीब 200 रेलवे स्टेशन हैं तथा राजधानी देश के सभी प्रमुख बड़े शहरों एवं पर्यटक स्थलों द्वारा रेल सेवा से जुड़ी हुई है। केरल में पर्वतीय हिल स्टेशन, समुद्रतट, झील, वन, पर्वत, वन्यजीव दर्शनीय है।

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