महिलाओं के क़ानूनी अधिकार

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गीतांजलि पोस्ट …..लीगल टीम गीतांजलि पोस्ट…… भारत में महिलाओं की रक्षा हेतु कानूनों की कमी नहीं है कमी हैं महिलाओं में जागृति की, अपने अधिकारों के लिये लडने की । अपने अधिकारों का एक महिला सही उपयोग तभी कर सकती है, जब वह इनके प्रति जागरूक हो और ख़ुद ऐसा करना चाहती हो। आज के इस विशेष लेख में हमने हिंदू परित्यगता स्त्री के कानूनी अधिकारों के बारे में बताया हैं, कोई भी हिंदू पत्नी जिसका परित्याग किया गया हो, क़ानूनी तौर पर इन अधिकारों की हक़दार है, जिन्हें वो चाहे तो लागू कराने की मांग कर सकती है।

-अगर पत्नी को लगता है कि उसके पति या उसके परिवार वालों की ओर से उसका मानसिक उत्पीडऩ हुआ है तो वह उन पर मुकदमा कर सकती है, सामाजिक स्थितियों के मुताबिक़ पत्नी का परित्याग करना क़ानून की नजऱ में बड़ा मानसिक और सामाजिक उत्पीडऩ माना जा सकता है।

-हिन्दू विवाह क़ानून 1955, धारा-9 वैवाहिक संबंधों की बहाली का प्रावधान करती है, यह धारा किसी पति-पत्नी को एक दूसरे के साथ रहने का अधिकार देती है। यदि तलाक न हुआ हो तो, इस धारा के तहत वह महिला पति के साथ रहने की मांग कर सकती है।

-भरण पोषण या गुज़ारा भत्ता ऐसी महिला अपने पति के सामर्थय और सामाजिक हैसियत के अनुसार उसी स्तर के रहनसहन के अधिकार की मांग कर सकती है। हिन्दू विवाह क़ानून की धारा 24 भरण पोषण और गुज़ारा भत्ता का प्रावधान करती है । ऐसी महिला को यह अधिकार हिन्दू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा-18 से भी मिलता है। परित्यक्ता पत्नी को मिलने वाले एकमुश्त खर्च के अधिकार के तहत वह चाहे तो जीवन निर्वाह के लिए पति से एकमुश्त खर्च मांग सकती है।

– ऐसी महिला के पास घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण क़ानून, 2005 के अन्तर्गत कार्रवाई का भी विकल्प है, किसी भी महिला के लिए इस तरह का सामाजिक-आर्थिक परित्याग और मानसिक उत्पीडऩ असहनीय होगा और इस वजह से यह गंभीर घरेलू हिंसा के क़ानून के दायरे में आ सकता है।

-ऐसी महिला पति और उसके परिवार पर घरेलू हिंसा और दूसरे फ़ौजदारी क़ानून के तहत अपने साथ हुए मानसिक उत्पीडऩ के लिए मुक़दमा कर सकती है। ऐसी महिला घरेलू हिंसा के परिणामस्वरूप हुए आर्थिक, मानसिक और शारीरिक उत्पीडऩ की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति की मांग भी कर सकती है।

– यदि ऐसी महिला का पति सरकारी कर्मचारी या सरकारी पद पर है, तो उसे सरकारी और निजी निवास में रहने का अधिकार भी है और वह चाहे तो इसके लिए कोर्ट जा सकती है।

– इंजंक्टिव रिलीफ़ के तहत ऐसी महिला घर में रहते हुए उनके द्वारा या उनके घर वालों द्वारा क्षति न पहुंचाने और पति और उसके परिवार वालों को उसके निजी या सरकारी मकान में न घुसने देने की मांग कर सकती है। वह अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा और अन्य सुविधाओं की मांग कर सकती हैं और उनका उपयोग भी कर सकती है।

रेणु शर्मा,जयपुर संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र
रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र