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क्या हैं जैविक खेती और जैविक सब्जियां

Hands holding sapling in soil

Hands holding sapling in soil

GEETANJALI POST

आजकल बाजार में सब्जी की दुकानों के अलावा जैविक सब्जियों की दुकाने दिखाई देने लगी हैं, लोग जैविक सब्जियों को खरीद भी रहे हैं लेकिन उन्हे जैविक सब्जियों और सामान्य सब्जियों में अन्तर नहीं मालूम। पाठकों को जैविक सब्जियों की जानकारी देने के लिये हमने सेवानिवृत कृषि अधिकारी सीताराम आचार्य का साक्षात्कार लिया हैं जो जैविक सब्जियों के बारे में बता रहे हैं।

जैविक खेती क्या हैं

जैविक खेती में रासायनिक ऊर्वरकों एंव पौध संरक्षण रसायनों का प्रयोग किये बिना सिर्फ जैविक खाद से की जाने वाली खेती से हैं।

जैविक खेती का क्या भविष्य हैं

वर्तमान समय में यह काफी लोकप्रिय हो रही हैं। जैविक खेती में खेत का अपशिष्ट पद्वार्थ एंव जानवरों से प्राप्त मल-मूत्र से बनायी गयी खाद काम में लायी जाती हैं जिससे धीरे-धीरे जमीन की ऊर्वरा शक्ति बढने के साथ-साथ भूमि के लाभदायक जिवाणु की भी संख्या बढने लगी हैं, जैविक खाद से पैदा कि गयी सब्जियां भी स्वास्थय के लिये अच्छी होती हैं।

खेती के लिये रासायनिक खाद कैसे हानिकारक हैं

रासायनिक खाद और पौध संरक्षण औषधियों के अत्यधिक प्रयोग के कारण भूमि की ऊर्वरा शक्ति कमजोर होने के साथ-साथ भूमि जहरीली होती जा रही हैं, भूमि के लाभदायक जीव केचुंए एंव अन्य सूक्ष्म जीव जो एक ग्राम मृदा में करोडों की मात्रा में होते हैं जो भूमि की ऊर्वरा शक्ति एंव जल संरक्षण को बढाने में अपना महत्तपूर्ण रोल अदा करते हैं वे नष्ट हो गये हैं या लुप्त होने की कगार पर हैं। जिन किटों की रोकथाम के लिये किटनाशकों का प्रयोग किया जाता हैं उनके उनके प्रति किटों में प्रतिरोधक क्षमता आ गयी हैं , उसके कारण नये-नये रसायन और अधिक विषेले होने लगे हैं। इन रयायनों के कारण पर्यावरण और कृषि उत्पाद प्रदूषित होते जा रहे हैं।

जैसा की हम जानते हैं प्रकृति को चलाने में प्रत्येक जीव का अपना अलग महत्त्तवपूर्ण भूमिका निभाता हैं इसे इस प्रकार समझा जा सकता हैं- जिस प्रकार किसी गाडी के टायर का एक वोल्ट निकल जाता हैं फिर भी गाडी चलती रहेगी कुछ समय बाद दूसरा वोल्ट निकल जायेगा फिर भी गाडी चलती रहेगी और धीरे-धीरे वो टायर गिर जायेगा और गाडी का चलना बन्द हो जायेगा उसी प्रकार एक सूक्ष्म जीव लुप्त हो गया तो भी प्रथ्वी चल रही हैं, धीरे-धीरे दूसरा जीव लुप्त हो जायेगा और एक समय ऐसा आयेगा जब प्राकृतिक संतुलन बिगड जायेगा, यदी समय रहने नहीं सभले तो एक समय ऐसा आयेगा जब सभलना मुश्किल हो जायेगा।आज हम देख रहे हैं कि गिद्व, कौआ, चील यहां तक की मोर भी लुप्त होने के कागार पर हैं । कृषि उत्पाद जिनका प्रयोग मनुष्य सहीत समस्त प्राणी करते हैं वे भी जहरीले हो गये हैं जिनके कारण विभिन्न प्रकार की बिमारिया होने लगी हैं, जिनका कोई ईलाज नहीं हैं।                                                                                          क्रमश:

सेवानिवृत कृषि अधिकारी सीताराम आचार्य

सेवानिवृत कृषि अधिकारी सीताराम आचार्य






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