आज के दिन का जीवन वृतान्त

906

GEETANJALI POST शैलेन्द्र अवस्थी (कवि और राजनीतिज्ञ),जयपुर
कब बीत गये ये कई दशक
सच पूँछो,तो कुछ पता नहीं
अल्हड यौवन कब बीत गया
परिपक्व प्रेम कब आ बैठा
निश दिन कब होते एक गये
दोनौ के मन , कुछ पता नहीं ।
जब परिचय से सकुचाते थे
नज़दीक नहीं आ पाते थे
बस देख देख मुस्काते थे
कुछ कहे बिना थम जाते थे ।
अब वक्त गुजा़रा साथ साथ
सुख दुख के झौटे झूल झूल
हँसते मुस्काते और सकुचाते
बेझिझक हुये कब ,पता नहीं ।
बच्चौ की खातिर हम में भी
तकरार हुयी और खूब हुयी
बिन बात किये रह जाते थे
अब चुप्पी साध न पाते हैं ।
कभी बिना बात के लडते हैं
कभी बिना मनाये मनते हैं
एक मधुर मुस्कान मात्र से
शिकवे भी सारे मिटते हैं
दिल दुखे नहीं एक दूजे का
यह समझ सहज हो जाते हैं
चिर-प्रेम की इस यात्रा में
हम डूब – डूब इतराते हैं
हम तो न्यौछावर हैं उन पर
पर वह भी बन्धन मुक्त नहीं
है अलग अलग अस्तित्व मगर
दो शरीर एक जान है हम
सह-अस्तित्व की मान्यता के
जीवन्त प्रमाण हैं हम
अपनी अपनी ‘शिल्प’ कला
एक दूजे का हुनर बताते हैं
केवल भावौ से सज्जित हो
दोनौ गद् – गद् हो जाते हैं ।
शब्दौ का अब अर्थ नहीं
सब बिना कहे कह जाते हैं
कब बीत गये ये कई दशक
सच पूँछो तो कुछ पता नहीं ।
जीत हार की परिभाषा का
हम दौनौ को ही ज्ञान नहीं ।
बीत गये हैं कई दशक
पर प्रेम पर लगा विराम नहीं ।
©शैलेन्द्र अवस्थी “शिल्पी”

शैलेन्द्र अवस्थी(कवि और राजनीतिज्ञ),जयपुर
शैलेन्द्र अवस्थी (कवि और राजनीतिज्ञ),जयपुर