एडवेंचर्स पयर्टन के लिए चले आईये सिक्किम

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GEETANJALI POST जानिए हमारी ऐतिहासिक धरोहर-38
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल(लेखक एवं पत्रकार)कोटा
पर्वतीय एवं प्राकृतिक स्थलों से भरपूर पूर्वाचंल के राज्य सिक्किम की सैर पर अब आपको ले चलते हैं। यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य, हरे-भरे पौधे, रंग-बिरंगे फूलों की घाटियां, गगनचुम्बी उतंग पर्वतों की श्रेणियां, अप्रतीम सांस्कृतिक धरोहर पर्यटकों को लुभाने की शक्ति रखते हैं। पक्षियों की अनगिनत प्रजातियां पाये जाने से सिक्किम को पक्षियों का स्वर्ग कहा जाता है।
इतिहास- पर्वतीय राज्य सिक्किम की स्थापना 15 मई 1975 को की गई तथा गंगटोक को राज्य की राजधानी बनाया गया। सिक्किम भारत के 22 वें राज्य के रूप में उभरकर सामने आया जिसे प्रशासनिक दृष्टि से 4 जिलों में बांटा गया है। राज्य का क्षेत्रफल 7069 वर्ग किमी है जिसमें 610577 जनसंख्या निवास करती है। जनसंख्या की दृष्टि से यह सबसे छोटा राज्य है तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से इसका स्थान गोवा के बाद दूसरे नम्बर पर आता है। राज्य की साक्षरता दर 69.68 प्रतिशत है। यह राज्य दक्षिण में पश्चिमी बंगाल राज्य की सीमा को छूता है जबकि पश्चिम की ओर नेपाल, उत्तर-पूर्व में चीन, दक्षिण-पूर्व में भूटान से जुड़कर अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं का निर्धारण करता है। राज्य में अंग्रेजी, नेपाली, लेप्चा, लिंबू, शेरपा, तमांग एवं सिक्किम आदि भाषाऐं बोली जाती हैं। हिन्दू धर्म तथा व्रजायन, बौद्ध धर्म यहां के प्रमुख धर्म हैं। सभी धर्मों के लोग जिस सद्भाव से रहते वह अपने आप में एक मिसाल है और इसीलिए इस शांत प्रदेश को देखने के लिए बड़ी संख्या में सैनानी यहां आते हैं।
भौगोलिक स्थिति-भौगोलिक दृष्टि से विविधतापूर्ण सिक्किम हिमालय की पर्वतमाओं से घिरा हुआ है जहां इस पर्वत की सबसे ऊँची 28000 फीट ऊँची कंचनजंगा दुनियां की तीसरी बड़ी चोटी है। राज्य में 28 पर्वत चोटियां, 21 हिमानी पर्वत, 227 झीलें एवं 5 गर्म पानी के चश्मे प्राकृतिक सौन्दर्य में अभिवृद्धि करते हैं। यहां के जंगलों में बांस सहित कई प्रजाति के इमारती वृक्ष, फूलदार पौधों की 4 हजार प्रजातियां, स्तनधारी जीवों की 140 प्रजातियां, पक्षियों की 600 प्रजातियां, तितलियों एवं अन्य किटों की 400 से अधिक प्रजातियां तथा सरीसृपों की बहुत सी प्रजातियां पाई जाती हैं। दुर्लभ नीली भेड़, तिब्बती मास्टिफ, याल और लाल पांडा भी यहां देखने को मिलते हैं। हिमालियन गिद्ध अपनी पहचान बनाता है। राज्य में सबसे बड़ी नदी तीस्ता है इसे यहां की जीवन रेखा कहा जाता हैं।
आर्थिक स्थिति- सिक्किम आर्थिक दृष्टि से कृषि प्रधान राज्य है।पहाड़ों पर सीढिय़ां बनाकर खेती की जाती है राज्य की करीब 64 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर करती है। यहां पर मक्का, चावल, गेहूँ, आलू, बड़ी इलायची, अदरक, चाय एवं संतरा आदि की खेती की जाती है। राज्य इलायची उत्पादन का सबसे बड़ा राज्य है। टेमी टी-गार्डन पहला ऐसा चाय बागान है जहां से चाय निर्यात की जाती है। अर्थव्यवस्था में मद्यनिर्माणशाला, मद्यनिष्कर्षणशाला, घड़ी उद्योग, चर्म उद्योग, धातु, चांदी और लकड़ी के सामान के कारीगरीपूर्ण वस्तुएं आदि प्रमुख हैं।अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका भी तेजी बढ़ रही है। तांबा, डोलोमाइड, चूना पत्थर, ग्रेफाइड, लोहा एवं कोयला आदि खनिज पदार्थ भी पाये जाते हैं।
पहाड़ी राज्य होने पर भी सिक्किम विभिन्न साधनों से पूरे देश से जुड़ा हुआ है। हवाई सेवा के लिए नजदीकी हवाई अड्डा पश्चिम बंगाल के बागाडोगरा में स्थित है। जो इस राज्य को कोलकाता, दिल्ली और गुवाहाटी से विभिन्न हवाई सेवाओं से जोड़ता है। बागाडोगरा से पर्यटन विभाग द्वारा 5 सीटर हेलीकॉप्टर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। सिलिगुड़ी एवं न्यू जलपायगुड़ी रेलवे स्टेशन राज्य की राजधानी से क्रमश: 114 एवं 125 किमी दूर हैं। गंगटोक तक सड़क मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है। गंगटोक, दार्जलिंग, कलिंयोग, सिलिगुड़ी तथा अन्य स्थानों से सड़क मार्ग से जुड़ा है।
सांस्कृतिक दृष्टि से हिन्दू एवं बौद्ध धर्म की सम्मिलित परम्परा के कारण यहां की सांस्कृतिक विरासत समद्ध है। सिक्किम में लामाओं द्वारा किये जाने वाला मुखोटा नृत्य सबसे रंगीन नृत्य है। हिन्दू अपने सभी पर्वों को उत्साह से मनाते हैं तथा बौद्धों के अनेक त्यौहार भी यहां परम्परा से मनाये जाते हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा 22-24 दिसम्बर तक सिक्किम विन्टर कार्नीवल का आयोजन किया जाता है।

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