बेगुनाहों की मौत का जिम्मेदार कौन ! सरकार या डॉक्टर्स ?

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गीतांजलि पोस्ट…….. रेणु शर्मा (जयपुर) आज हर बुद्धिजीवी के दिल और दिमाग में यह प्रश्न घूम रहा है कि डॉक्टर्स की हडताल के दौरान ईलाज के अभाव में होने वाली बेगुनाहों की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा सरकार या डॉक्टर्स ? गौरतलब हैं बुधवार शाम को डॉक्टर्स और सरकार में समझौता हो गया, डॉक्टर्स की मांगें मान ली गयी अब डॉक्टर्स खुश हैं और सरकार भी खुश हैं, लेकिन उन लोगों का क्या जिनकी खुशिया डॉक्टर्स के द्वारा कार्य के बहिष्कार, सरकार और चिकित्सों के अडीयल रवैये के कारण छिन गयी हैं। डॉक्टर्स के कार्य के बहिष्कार के दौरान अस्पताल में ईलाज के अभाव में बेगुनाहों की मौत का जिम्मेदार होगा ? आज राजस्थान की जनता सरकार और डॉक्टरो से जवाब माग रही हैं कि अक्टूबर, नवम्बर और दिसम्बर माह में डाक्टरों द्वारा किये गये कार्य के बहिष्कार के कारण, ईलाज के अभाव में विभिन्न अस्पतालों में सैकडो मरीजों की मौत हो गयी उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ? क्योकि डॉक्टरो की हडताल कोई आम हडताल नहीं है जिससे केवल अव्यवस्था ही हो डॉक्टरो की हडताल मरीज की जिंदगी और से जुडी हुई है जिसका खामियाजा मरीजो के साथ-साथ मरीजो के परिजनों को भुगतना पड़ता है, डॉक्टरो की हडताल जिंदगी ओर मौत से जुडी हुई हैं, जिसे जनता बर्दाश्त नहीं कर सकती।

देखा जाए तो चिकित्सा का व्यवसाय बहुत ही सम्मानित और गरिमामय का पैशा हैं, यहां तक की मरीज तो ड़ॉक्टर को अपना भगवान ही मानते हैं क्योकि भगवान के बाद डॉक्टर के हाथ में मरीज की जिन्दगी होती हैं, ड़ॉक्टर भी अपनी नौकरी से पहले अपने मरीज की सच्चे मन से इलाज करने की शपथ भी खाते हैं और आमजन भी डॉक्टर्स को बहुत मान-सम्मान देते हैं। अधिकाश चिकित्सकों ने इस पैशे को अपनी सेवा और निष्ठा से इसकी गरिमा को बनाये रखा है लेकिन आज ईलाज के अभाव में मरीजों की मौतों का उन पर कोई असर नहीं हैं उनको तो सिर्फ अपनी जिद की पडी हैं। कुछ स्वार्थी डॉक्टर्स ने इसकी गरीमा को ठेस पहुंचाई हैं जो गलत हैं।

छोटी छोटी बातों को लेकर चिकित्सों का कार्य का बहिष्कार करना कहाँ तक जायज हैं, हो सकता हैं कल को किसी दूसरी मांग के लिये फिर से चिकित्सक कार्य का बहिष्कार कर दे। जबकि डॉक्टर्स की मांगों को सरकार ने समय समय पर मंत्रियों के माध्यम से पूरी करने का प्रयास किया है ओर हो सकता है की उनकी एक दो मांग बाकी भी रह गयी हो तो आम आदमी के जीवन से खिलवाड करना क्या सही हैं ? डॉक्टर्स के कार्य के बहिस्कार के कारण सैकडों लोगों को अपनी जान गवानी पडी और इससे कहीं ज्यादा मरीजों और उनके परिजनों को अस्तपाल में होने वाली अव्यवस्था के कारण परेशान होना पडा। सरकार को चाहिये कि भविष्य मे ऐसी क्रियान्वित दुबारा ना हो इसके लिये पुलिस ओर सेना की तरह चिकित्सको पर भी हड़ताल करने पर पूर्णतया पाबंदी लगाये। हाईकोर्ट ने भी आदेश दे दिया है कि तुंरन्त इन पर कार्यवाही करनी चाइये। डॉक्टर्स से शपथपत्र लिखवाने चाहिये कि भविष्य में कार्य का बहिस्कार नही करेगे। क्या पता कुछ समय बाद किसी दूसरी मांग को लेकर फिर सामूहिक रूप से कार्य का बहिष्कार कर दे। इसलिये राजस्थान की जनता ये मांग करती हैं कि चिकित्सक अपने इस कृत्य का प्रायश्चित करे एंव सरकार भी अपने द्वारा गयी हटधर्मिता के लिये प्रायश्चित करे ये प्रायश्चित क्या हो इसका निर्णय वे स्वंय करे इसका परिणाम सामने आना चाहिये, जनता तो समय के साथ भूल जाती हैं लेकिन भगवान के द्वारा अवश्य ही इसका फल दिया जायेगा।

रेणु शर्मा,जयपुर संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र
रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र