चाईनीज मांझा ने पंतगबाजी को बनाया मौत का खेल

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गीतांजलि पोस्ट……. ( रेणु शर्मा, जयपुर)  प्राचीन काल से मकर सक्रान्ति के अवसर पर मंनोरजन के लिये पंतगबाजी की जाती हैं, तो कई जगह गुल्ली-डन्डा खेला जाता हैं। जिसमें बच्चों, युवा, बुजुर्ग, महिला-पुरूष सभी भाग लेते हैं। पंतगबाजी में सभी एक-दूसरे की पंतग को काटना चाहता हैं कोई नही चाहता की उसकी पंतग को कोई काटे। पहले पंतगबाजी में देशी मांझा काम मे लिया जाता था जो कच्चा होता था, आसानी से टूट जाता था मजबूत मांजा के चक्कर में लोगों ने पिछले 7-8 साल से देशी मांजा के स्थान पर चाईनीज मांजा काम में लेना शुरू कर दिया, जो कांच से बना होता हैं। जहां देशी मांजा खीचने पर टूट जाता हैं वहीं चाईनीज मांझा खीचने पर टूटता नहीं बल्कि उस अंग को काट देता हैं जिसे वह छूता हैं। इससे पंतगबाजी से दुर्घनाए होने लगी हैं। राह चलते या दोपहीया के बीच में पंतग की डोर आ जाती हैं और दोपहीया वाहन सवार को घायल कर देती हैं कभी -कभी मांजे से कटने से इंसान की मौत भी हो जाती हैं। पंतग की डोर इंसान को ही नही आसमान में उडने वाले बेजुवान पक्षियों को भी घायल कर देती हैं, या उनकी जान ले लेती हैं। चाईनीज मांझा से हर साल सेकडों लोगों के कट कर घायल होने के समाचार आने लगें हैं। इंसान ही नही हजारों की संख्यां में बेजुवान पक्षी भी आसमान में उडने समय घायल हो जाते हैं या मर जाते हैं।

चाईनीज मांझा के दुष्प्रभाव को देखते हुए पर्यावरण विभाग ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के सेक्शन-5 के तहत नायलोन, प्लास्टिक, कांच के प्रयोग से बने मांझा पर प्रतिबन्ध लगा दिया था लेकिन प्रशासन की खामियों एंव रिश्वत के चलते आज भी खुले आम चाईनीज मांझा बेचा जा रहां हैं।

अभी पंतगबाजी शुरू हुए कुछ ही दिन हुए हैं, अकेले जयपुर में ही दो लोगों की जान चली गयी शुक्रवार को पंतगबाजी से रामगंज में एक 13 साल का लडका पंतग उडाते समय तीसरी मंजिल से गिर कर मर गया वही दूसरी ओर गुरूवार को डीसीएम रोड पर मोटरसाईकिल सवार 30 साल का युवक चाईनीज मांझा की चपेट में आ कर घायल हो गया श्चवास नली कट गयी और अस्पताल ले जाते समय युवक की मौत हो गयी। 10-15 लोग घायल हो गये। इतना होने पर भी प्रशासन चाईनीज मांझा की बिक्री को रोकने मे असफल हो रहा हैं, हांलाकी प्रशासन द्वारा चाईनीज मांझा की बिक्री पर रोक लगा दी गयी हैं फिर भी जयपुर शहर में दुकानों पर चाईनीज मांझा बेचा जा रहां हैं। आखिर चाईनीज मांझा से लाभ किसे हो रहा हैं हमारे यहां लोगों की जान जा रही हैं वही चीन को फायदा हो रहां हैं। यदी समय रहते बेचे जा रहें चाईनीज मांझा की बिक्री बन्द नहीं होती हैं तो मकर सक्रान्ति तक चायनीज मांझा ना जाने कितने लोगों को की जान लेगा ? कितने लोगों को घायल करेगा ? पूर्व का इतिहास यह कहता हैं जनता के आन्दोलन ने ही प्रशासन की ऑखे खोली हैं, यदी समय रहते चाईनीज मांझा की बिक्री पर पूर्णतया रोक नहीं लगी तो जनता को चाईनीज मांझा के खिलाफ जनता को जन-आन्दोलन करना पडेगा, आन्दोलन के दौरान बिगडने वाली कानून व्यवस्था का जिम्मेदार प्रशासन होगा।

प्रशासन को चाहिये की शहर की सभी दुकानों को जहां पंतग, मांझा की बेचा जाता हो वहां जाकर जांच करे जिससे शहर बिकने वाले चाईनीज मांझा पर रोक लगायी जा सके।

रेणु शर्मा,जयपुर संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र
रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र