यज्ञ से रूक जाती हैं प्राकृतिक आपदा-श्री अवधूत बाबा अरूण

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GEETANJALI POST ….. 

हवन, पर्यावरण, भारतीय संस्कृति पर महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 अनन्त विभूषित श्री अवधूत बाबा अरूणगिरी महाराज (एनवायरनमेंट बाबा) का गीतांजलि पोस्ट की संपादिका रेणु शर्मा का विशेष साक्षात्कार…………..

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सनातन काल से चले आ रहे हवन, यज्ञ की वर्तमान समय में समाज द्वारा अवहेलना की जा रही हैं जिसका परिणाम विभिन्न असाध्य बिमारियों, प्रकृतिक आपदाओं के रूप में हमारे समक्ष हैं, यदी समय रहते हमने यज्ञ, हवन की ओर ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में इसके घातक परिणाम देखने होगे। सर्वभूतों के हित के लिये निष्काम भाव से किया गया कार्य ही यज्ञ हैं। यज्ञ की महत्ता के बारे में गीता में कहा गया हैं अन्नाद्ववन्ति भूतानि, पर्जन्यादन्नसम्भव:। यज्ञाद्ववति पर्जन्यो यज्ञ कर्मसमुद्वभव:।। अर्थात सम्पूर्ण प्राणी अन्न से उत्पन्न होता हैं, अन्न की उत्पत्ति वर्षा से होती हैं, वर्षा यज्ञ से होती हैं और यज्ञ विहित कर्मो से उत्पन्न होने वाला हैं। इसलिये यज्ञ महत्तवपूर्ण हैं। पंचमहाभूत पृथ्वी, जल, वायु, आकाश एंव अग्री ही प्रकृति हैं। इन्ही पंचमहाभूतों से हम बने हैं इन्ही में प्रदूषण होता हैं, इन्ही में हम रहते हैं। इन सभी तत्वों के अलग-इलग देवता हैं जो उनको नियन्त्रित करते हैं, देवताओं को पुष्ट करने के लिये यज्ञ, हवन किया जाता हैं। यदी उन देवताओं को पुष्ट नहीं किया जाता तो उन्की शक्ति कम हो जाती हैं , इस कारण इनका पंचमहाभूतों पर नियन्त्रण कम हो जाता हैं और ये पंचमहाभूत अमर्यादीत हो जाते हैं, जिसके कारण प्राकृतिक आपदाएं जैसे- बाढ, महामारी, अतिवर्षा, भूकम्प इत्यादी आते हैं।ऐसा माना जाता है कि यदि आपके आस पास किसी बुरी आत्मा इत्यादि का प्रभाव है तो हवन प्रक्रिया इससे आपको मुक्ति दिलाती है। शुभकामना, स्वास्थ्य एवं समृद्धि इत्यादि के लिए भी हवन किया जाता है।

हवन की महत्ता बताते हुए महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 अनन्त विभूषित श्री अवधूत बाबा अरूणगिरी महाराज कहते हैं कि भारतीय कर्मो में हवन का विशेष महत्तव हैं ये ना केवल आध्यात्मिक रूप से बल्कि पर्यावरण की शुद्वता और संतुलन को बनाये रखने में भी महत्तवपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाये तो हवन करने से पर्यावरण में उपस्थित एस्पेर्गिल्लाुस, पेनिसिलियम, कर्वुलेरिया और क्लाओस्पोरियम नाम के बैक्टिरिया खप्म होते हैं।

रसियन वैज्ञानिक डॉ शिरोविक के अनुसार हवन के दौरान दी जाने वाली आहुतियों से वायुमंडल में कुछ विशेष तत्व मिल जाते हैँ जो वर्षा के साथ धरती पर आकर धरती की ऊर्वरताा को बढाते हैं।

फ्रांस के वैज्ञानिक त्रेल्लाों ने सिद्व किया कि हवन मे काम मे आने वाली और हवन सामग्री एक साथ जलकर फोर्मलडीहाईड का निर्माण करती हैं जिससे वातावरण में आक्सीजन की मात्रा बढती हैं। हवन की राख जीवाणुरोधक होती हैं जिसका प्रयोग प्राचीन काल से खेतों में किया जाता रहा हैं जो पौधों को कीडे लगने से बचाता हैं वहीं दूसरी ओर हवन से आपसी भाई-चारा बढता हैं क्योकि हवन एक सामाजिक क्रिया-कलाप हैं और सामूहिक हवन से आपसी बंधुत्व बढता हैं और हवन से पितृ दोष समाप्त होता हैं घर में सुख-शान्ति रहती हैं।

रेणु शर्मा,जयपुर संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र
रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र