सरहद, राजस्व व बीकानेर को खोखला करता अवैध खनन

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GEETANJALI  POST …. (मनीष सिंघल)
बीकानेर।जिले के  सीमावर्ती क्षेत्र खाजूवाला, श्रीकोलायत सहित अन्य क्षेत्रों में अवैध जिप्सम खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जिले का खाजूवाला क्षेत्र जो कि पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से मात्र १० किमी की दूरी पर है। यहां प्रचुर मात्रा में जिप्सम के भण्डार उपलब्ध हैं। जिले में सबसे ज्यादा अवैध खनन माफिया इसी क्षेत्र पनप रहे हैं। जो की सरहद क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज सें बेहद चिंताजनक है। क्षेत्र में जिप्सम माफिया का लगातार लम्बे समय से सक्रीय रहना भी कहीं ना कहीं जिला पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करता है। जानकारी के मुताबिक जिप्सम माफियाओं को राजनैतिक संरक्षण भी प्राप्त है। सीमावर्ती दन्तौर, खाजूवाला, बज्जू थाना क्षेत्र से जिप्सम माफिया रोजाना सैकड़ों टन अवैध जिप्सम खनन कर पीओपी  फैक्ट्रीयों में जिप्सम पहुंचा रहे हैं। जिसके कारण राज्य सरकार को रोजाना लाखों रुपयों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। सरहद की सुरक्षा करने वाले बीएसएफ के जवानों को सीमा पार के दुश्मनों के साथ-साथ जिप्सम माफियाओं से बड़ी चुनौती मिल रही है। जिप्सम माफियाओं की ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों में किए जा रहे अवैध खनन से सबसे ज्यादा परेशानी सीमा पर तैनात जवानों को होने लगी है। कारण यह है कि अवैध खनन करने वालों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरंगें बना दी हैं जिनसे लगातार सीमा पार के दुश्मनों के देश में घुसने की आशंका बन गई है। हालांकि सरहद पर बीएसएफ के जवान हर मौसम में हर वक्त मुस्तैद रहते हैं लेकिन जब अपने देश के लोग ही अपनी जमीन को खोखला कर दुश्मनों को मौका देने लगे तो निश्चित रूप से हालात भयावह माने जा सकते हैं।
बाहरी मजदूरों का सत्यापन ना होना सुरक्षा में बड़ी चूक- क्षेत्र में अवैध जिप्सम खनन में व क्षेत्र की जिप्सम फैक्ट्रीयों में प्रदेश से बाहर के सैकड़ों मजदूर काम कर रहे हैं। उनका सत्यापन नहीं होने से भी सीमावर्ती क्षेत्र होने की दृष्टि से काफी खतरनाक माना जा सकता है। बीएसएफ  को यह भी आशंका है कि अवैध जिप्सम खादानों में काम करने वाले मजदूरों की आड़ में संदिग्ध भी हो सकते हैं।
माफियाओं का मजबूत नेटवर्क- अवैध जिप्सम माफिया का सूचना तंत्र बेहद मजबूत है। शाम होते ही ये लोग सीमावर्ती क्षेत्र से सटे गांव दंतौर के मुख्य चौराहे पर एकत्रित हो जाते हैं। यहां से सूचनाओं के लेन-देन का दौर शुरू होता है जो कि फैक्ट्रीयों में जिप्सम के पहुंच जाने तक तक जारी रहता है। पुलिस कार्रवाई की भी सुचना इनके पास पहले से ही पहुंच जाती है। ये बात अलग है कि पुलिस को इनके अवैध परिवहन की सूचना या तो मिलती ही नहीं है, या फिर बहुत देर से।
रात्रि में खनन पर पाबंदी के आदेश- खान राज्य मंत्री नें वैसे तो खान एवं वन विभाग के अधिकारियों को पहले से ही निर्देशित कर रखा है कि किसी भी सूरत में रात्रि के समय जिप्सम खनन ना किया जाए। लेकिन मंत्री के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जारही हैं। खान एवं वन मंत्रालय ने एक बार फिर आदेश निकाल कर ऐसे जिप्सम माफियों से सख़्ती से निपटने के लिए अधिकारियों को सख़्तनिर्देश दिए हैं।अब देखने वाली बात ये है कि अवैध जिप्सम पर रोक लगाने के लिए लिया गया राज्य सरकार का यह आदेश कितना कारगर साबित होता है।
पुलिस भी हों  पूर्ण रूप से सतर्क- अवैध जिप्सम खनन की शिकायत मिलते ही पुलिस उस पर अंकुश लगाने के अपने पूरे प्रयास करें। खनन क्षेत्र में पुलिस नाके लगाकर चौकसी बढ़ाई  जाएं। अवैध खनन करने वालों के खिलाफ और सख्ती बरती जाएं तो निश्चित तौर पर जिप्सम माफियाओं से होने वाले राजस्व नुकसान ,सरहद की सुरक्षा में सेंध से भी बचा जा सकता है।