तो क्या अब तांत्रिको के हवाले से चलेगी विधानसभा…

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गीतांजलि पोस्ट … (रेणु शर्मा, जयपुर)

इन दिनों राजस्थान विधानसभा भवन में विधायकों के बीच भूत-प्रेतों को लेकर जिस प्रकार चर्चाएं हो रही हैं, विधानसभा भवन अपशकुनी लगने लगा है उससे ऐसा लगने लगा हैं जैसे हम 21वीं सदी में नहीं बल्कि भूतकाल में पहुंच गये हो। आज विज्ञान का युग हैं जिसमें किसी घटना के घटित होने का वैज्ञानिक कारण देखा जाता हैं लेकिन जिस प्रकार कुछ विधायकों की मौत होना, सभी विधायकों का एक साथ सदन में नहीं बैठने को की बात को लेकर विधानसभा भवन अपशकुनी, भूत-प्रेतों का साया बताते हुए, तान्त्रिक द्वारा विधानसभा भवन की जांच करवाना, दूसरी और इस प्रकार की बातों को लेकर कुछ विधायक इसे रोकने के बजाय मजे लेने में लगे हैं, वे ठहाके मारकर हंस रहे हैं जिससे आम आदमी के साथ-साथ सदन की गरिमा को ठेस पंहुच रही हैं जैसा की सर्वविदित हैं जिसने जन्म लिया हैं उसकी मृत्यु एक दिन होनी हैं तो विधायक भी विधायक होने से पहले एक इंसान हैं उसे भी एक दिन मरना ही हैं,अब विधायक की मौत के लिये भी विधानसभा-भवन जिम्मेदार हो गया वहीं दूसरी ओर विधायको का एक साथ विधानसभा में नही बैठने के पिछे भी विधानसभा-भवन जिम्मेदार हो गया और विधानसभा-भवन के कारण ऐसी बाते होने का मतलब वह अपशकुनी हैं वहां भूत प्रेतों का साया मंडरा रहा है।

उल्लेखनिय हैं बुधवार को बीजेपी विधायक कल्याण सिंह चौहान की मौत के बाद गोविन्दसिंह डोटायसरा ने कहा कि मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने मीडिया मे कहा कि विधानसभा में भूत-प्रेत हैं, तो कालूलाल गुर्जर बोलते हैं कि उन्होने विधानसभा में भूत-प्रेत होने की आशंका जतायी थी, वहीं अलवर के रामगढ़ से भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहुजा कहते हैं इस विधानसभा का पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार के दिन शुभारंम्भ किया था, जिसके चलते यहां भूतप्रेत का साया मंडरा रहा है। सचेतक कालूलाल गुर्जर, निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल और कांग्रेस के श्रवण कुमार ने भी विधानसभा परिसर में पूजा-पाठ कराने की जरूरत बताई। विधायकों ने कहा कि पूरे परिसर को गंगाजल से धोना चाहिए। भ ाजपा के लाडनूं विधायक हबीबुर्रहमान कहते हैं जिस स्थान पर नया भवन बना है, वहां श्मशान भी था और मजार भी, इसलिए यहां धार्मिक अनुष्ठान कराया जाना चाहिए, लेकिन मेरी नहीं मानी गई और तभी से पिछले 18 सालों से सदन में एक साथ कभी 200 विधायक नहीं बैठे,कभी किसी विधायक की मौत हो गई तो कभी किसी विधायक को जेल जाना पड़ा।
अफसोस हो रहा हैं आज का युग वैज्ञानिक युग हैं जिसमें हर होने वाली घटना को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाता हैं लेकिन सदन में जिस प्रकार भूत प्रेतों को लेकर चर्चाये सुनने में आ रही हैं वो हमारे विधायको की मानसिकता और उनके ज्ञान का बखान करती हैं अब जो खुद ही अन्धविश्वास में डूबे हो उनसे राज्य के विकास की कैसी उम्मीद कर सकते हैं यह बताने की आवश्यकता नहीं हैं। विधायकों कि मौत किसी बिमारी या अन्य कारण से हो सकती हैं और कहा जा रहा हैं किं साल 2001 से लेकर अब तक की किसी भी बैठक में सदन की पूरी संख्या नहीं हुई, विधायकों का सदन में नहीं आना विधायकों की लापरवाही हैं नाकि उसके लिये विधानसभा-भवन जिम्मेदार हैं लेकिन नये विधानसभा-भवन में सारे विधायकों का एक साथ नहीं आना एक संयोग ही हो सकता हैं, इसमें अपशगुन या भूत-प्रेत वाली बात कहां से आ गयी जो हमारे संविधान में ही नहीं हैं और नाही ये बाते विज्ञान में हैं।

ज्योति नगर में वर्ष 1999 में नया विधानसभा परिसर बनकर तैयार हुआ, लेकिन निर्माण के समय आधा दर्जन मजदूरों की विभिन्न कारणों से मौत हो गई। इसके बाद वर्ष 2000 में नए भवन में नियमित बैठकें शुरू हुई। इसके बाद एक संयोग ही जुड़ गया कि किसी ना किसी कारण एक साथ सभी 200 विधायक नहीं बैठे। अन्धविश्वास को लेकर जिस प्रकार सदन में जिस प्रकार से बहस हो रही हैं, तान्त्रिक को बुलाया जा रहा हैं, कुछ विधायक इसे रोकने के बजाय मजे लेने में लगे हैं,वे ठहाके मारकर हंस रहे हैं अधिकतर विधायकों का ध्यान उसी ओर लगा हैं, जिससे आाम आदमी के साथ-साथ सदन की गरिमा को ठेस पंहुच रही हैं यह एक गंभीर विषय हैं, सोचने वाली बात हैं। विधायकों से अपेक्षा की जाती हैं कि वो निरर्थक, बेबुनियादी,अन्धविश्वास बाते करके जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड नही करे जनता को भटकाये नही साथ ही विधायकों को चाहिये कि जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे जिनको करने के लिये जनता ने उन्हे चुना था।

रेणु शर्मा,जयपुर संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र
रेणु शर्मा,जयपुर
संपादक -गीतांजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र