पवित्र नगर है गंगा, यमुना एवं सरस्वती स्थल : इलाहबाद

26
80

गीतांजलि पोस्ट … डॉ. प्रभात कुमार सिंघल, लेखक एवं पत्रकार
गंगा, यमुना एवं सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित इलाहबाद पवित्र नगर है। इस शहर की स्थापना यद्यपि मुगल शासक अकबर ने 1583 ई. में की थी तथापि इसकी प्राचीनता का बोध वेद, पुराण, रामायण और महाभारत से होता है जहां इसे प्रयाग कहा गया है। मुगल सामराज्य के पतन के बाद अंग्रेजों ने यहां पर अपना कब्जा कर लिया। हर 12 साल में संगम पर भव्य कुम्भ के मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं। कुम्भ और नदियों के संगम का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। इसे पुराणों में तीर्थराज अर्थात् तीर्थों का राजा की संज्ञा से विभूषित किया गया है। )ग्वेद में यहां पर स्नान करने से स्वर्ग प्राप्ति की कामना की बात कही गई है। संगम पर गंगा एवं यमुमना नदी स्पष्ट दिखाई देती है परन्तु सरस्वती नदि का बाहरी अस्तित्व आज नजर नहीं आता है। इस नगर का आधुनिक स्वरूप देखते ही बनता है।
इलाहबाद में सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया किला दर्शनीय है। जिसमें औरंगजेब ने भी निर्माण कार्य कराये थे। किले का एक हिस्सा सेना के पास है, सेना की अनुमति लेकर इसका भ्रमण किया जा सकता है। यहां पातालपुरी मंदिर, अक्षयवट एवं अशोक स्तम्भ दर्शनीय हैं। किले में 23 महल, 3 शयनगार, 25 द्वार, 23 बुर्ज, 270 भवन, 176 कक्ष, 70 तहखाने, 7 दलानें, 20 तबले तथा बावड़ी, कुएं एवं नहर बनी हैं।
यमुना नदी के सरस्वती घाट के समीप बना मिन्टों पार्क को मदन मोहन मालवीय पार्क भी कहा जाता है। इसका महत्व इस बात से है कि यहां भारत में ईस्ट इण्डिया कं. के शासन समाप्ति का घोषणा पत्र 1910 ई. में लॉर्ड मिन्टो नें पढ़कर सुनाया था। इसी स्मृति में यहां एक स्तम्भ बनाया गया है। जिसके ऊपर भाग में अशोक स्तम्भ लगा दिया गया है। यह एक खूबसूरत पिकनिक स्थल है।
इलाहबाद का खुसरो बाग मुगलकालीन उद्यान कला का सुन्दर नमूना है। इस पार्क को 17 बीघा भूमि पर जहांगीर के बड़े पुत्र खुसरो ने बनवाया था। बाग में खुसरो एवं उसकी बहन के मकबरे बने हैं जो स्थापत्य कला के सुन्दरतम नूमने हैं।
घूमने-फिरने के लिए इलाहबाद का आनन्द पार्क एक खूबसूरत स्थल है। यहां अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए चन्द्र शेखर आजाद ने अन्तिम गोली स्वयं को मार ली थी। इस स्थान पर शहीद स्मारक बना दिया गया है। बाग परिसर में पब्लिक लाइब्रेरी, मालवीय स्पॉट्स स्टेडियम तथा नर्सरी बनी है। इसके समीप ही बच्चों के मनोरंजन के लिए हाथी पार्क बना है। शहर के 10 कि.मी. दूरी पर मेकफर्सन झील के किनारे खूबसूरत नेहरू उद्यान एक अच्छा पिकनिक स्थल है।
इलाहबाद रेलवे स्टेशन से करीब 3 कि.मी. दूरी पर स्थित राजकीय संग्रहालय की स्थापना 1931 ई. में हुई थी तथा 1947 ई. में पं. जवाहरलाल नेहरू ने इसका उद्घाटन किया था। यहां मिट्टी व पत्थर की मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। संग्रहालय प्रात: 9.30 बजे से सायं 5 बजे तक अवलोकनार्थ खुला रहता है।
रेलवे स्टेशन से करीब 4 कि.मी. दूरी पर ऐतिहासिक आनन्द भवन नेहरूजी का पैतृक आवास था। मोती लाल नहेरू ने एक नये भवन का निर्माण कराया जिसे अब इस भवन को एक स्मारक एवं संग्रहालय का रूप दे दिया गया है। यह दुमंजिला भवन वास्तुकला का एक सुन्दर नमूना है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की यादें इस भवन से जुड़ी हैं। महात्मा गांधी भी जब इलाहबाद आते थे यहां ठहरते थे। संग्रहालय में पं. नेहरू, स्वतंत्रता संग्राम तथा महात्मा गांधी से जुड़ी वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है। पुराने भवन का नाम स्वराज भवन कर इसे काँग्रेस को दे दिया गया है।