धीमा जहर तम्बाकू

0
48

गीतांजलि पोस्ट (लेखक श्रेयांस,लूनकरनसर )  नशा नाश का द्वार भारत ही नहीं अपितु विश्व के लगभग सभी राष्ट्र धीमें जहर तम्बाकू से अछूते नही है वरन पुरानी सभ्यताओं में भी नशे के प्रमाण मिलते है इससे जो बचा रह गया वो उन्माद में नही जाता और जो फंस गया वो इसमे डूबता ही चला जाता है ।नशे में जकड़ने की मुख्यवय बचपन जो देख कर सीखता है मंगाने पर थोड़ी सी चख कर देख लूं सीखता है।विश्व के अन्य देशों में चरस ,अफीम,कोकीन ,सिगार ,वाइन, का प्रचलन जहाँ ज्यादा है वहीं भारत मे इस गहरे कुँए में धकेलने का कार्य पान मसाला , गुटखा से शुरुआत होती हुई बीड़ी ,सिगरेट, डोडा पोस्त ,हुक्का ,शराब में तब्दील हो जाती है ।शनै: शनै:जहर का दुष्प्रभाव इस कदर हावी होता कि थोड़ा थोड़ा करते ही नशे का आदि और फिर बरबादी का मंजर शरू पैमाना नापने की बात आती है तो पता चलता है कि 9 से 10 वर्ष की किशोर आयु के बाल सखा जब थोड़ा सा तो चख लो शुरुवात हो ही जाती है ।

सरकारें भी इस दुष्प्रभाव से बचने के लिए अनेकानेक उपाय नियम कानून बनाती है इन का मूल्य बढाती है । पैकटों पर ऐसे चित्र छापती है। जिससे आम जन में घृणा के भाव उत्तपन हो लेकिन फिर भी क्या नशा कम हो रहा है नशे से होने वाली मौतें कम हो रही है क्या इससे होने वाली बीमारियां कम हो रही है ये बेहद चिंतनीय विषय है ।जिन गुटखों के पैकेटों को बंद किया गया उत्पादकों ने अलग से पान मसाला बनाकर उसके साथ जर्दे का पाउच देना शुरू कर दिया खाने वाले को पुनः वैसा ही मिलने लगा । कहा गया प्लास्टिक पॉच बन्द कर दिया गया उत्पादकों ने कवर पेपर ऊपर नीचे प्लास्टिक लगाना शुरू कर दिया ।ज्यादातर गुटखा खाने वाले लोग इस बात से महरूम रहते है कि इसमें छिपकली का पाउडर मिलाया जाता है गन्दी से गन्दी सुपारी इस्तेमाल की जाती है पर फिर भी लोग खाते है।धूम्रपान करतें है। सामाजिक तौर पर देखा जाए तो महसूस होता है देश मे बहुत सी आर्थिक तंगी, बर्बादी का ये भी बड़ा कारण है ।इंसान कहाँ से कहाँ जा रहा है इसी को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने नशा पीड़ितों को विधिक सेवाएं एवम नशा उन्मूलन के लिए सेवाएं आरम्भ की जो कारगर साबित हो रही है देश भर की समस्त तालुकों में लगे पैरा लीगल सवयंसेवक को इसके रोकथाम के लिए जिम्मा सौंप कर इसके लिए प्रचार प्रसार करने उनके पुनर्वास करने बचपन बचाने जो इसकी मूल कड़ी होती है कि जिम्मेदारी दी गयी ।

आगामी 26 दिसम्बर को मनाये जाने वाले अतर्राष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस मनाने की सार्थकता तभी सही मायनों में सिद्ध होगी की शुरुवाती तौर पर इस लत में घसीटने वाले पान मसाले पर ही अंकुश लगे इसे बेचने वाले गिरफ्त में आये तभी सभी वर्गों में होती अर्थ हानि , जीवन हानि , परिवार की हानि से बचाव सम्भव होगा ।