10 साल बाद मिले पिता- पुत्र: गुजरात और उत्तरप्रदेश के मध्य कड़ी बना राजस्थान

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Geetanjali Post…
जयपुर। इसे पिता- पुत्र और उनके परिवार पर ईश्वर की कृपा कहें, या लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान एवं बाल कल्याण समिति,


जयपुर (राजस्थान) के प्रयासों का नतीजा कहें या फिर गुजरात सरकार के राजकोट चिल्ड्रन होम के अधिकारियों की दुआओं का असर, कि फिल्मी स्टाइल में 10 साल बाद एक परिवार को उसके जिगर का टुकड़ा वापस मिल पाया। जहाँ एक तरफ 7 साल बाद कानून भी किसी लापता को मृत मान लेता है, वहीं दूसरी तरफ 10 साल बाद हुआ यह मिलन किसी चमत्कार से कम नहीं है।

10 सालों में यूं चला समय का पहिया
गलत ट्रेन ने पहुंचाया कानपुर (उत्तर प्रदेश) के बजाय ओखा (गुजरात)
यह कहानी इटावा (उत्तर प्रदेश) में रहने वाले विशाल की है, जो 10 साल की उम्र में सन् 2008 में अपने पिता के थप्पड़ मारने से नाराज होकर घर से निकल गया। विशाल ट्रेन से अपने मामा के घर जाना चाहता था, लेकिन गलत ट्रेन में बैठने के कारण कानपुर के बजाय ओखा (गुजरात) जा पहुंचा। परिवार ने विशाल की काफी तलाश की और पुलिस में भी रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। दूसरी ओर ओखा रेल्वे पुलिस ने रेल्वे स्टेशन पर भटकते इस 10 वर्षीय बालक को बाल कल्याण समिति के माध्यम से पुनर्वासित कराया और फिर यह बालक जामनगर आश्रय गृह से होता हुआ 11 जून, 2009 को गुजरात सरकार के राजकीय चिल्ड्रन होम, राजकोट में स्थानान्तरित किया गया। उस समय बालक अपने नाम और पिता के नाम के अलावा केवल इटावा, जयपुर ही बता पा रहा था, जो इसके रिकॉर्ड में लिख दिया गया।
इसके बाद से विशाल लगातार इसी होम में आवासित रहा और यहीं इसकी शिक्षा- दीक्षा होती रही। साल- दर- साल बीतने के साथ- साथ विशाल की यादें धुंधली होती चली गई और वह अपने बचपन की यादों को धीरे- धीरे भूलता हुआ चिल्ड्रन होम को ही अपना परिवार मानने लग गया। इतना ही नहीं, विशाल हिन्दी भाषा को भूलकर पूर्णतया गुजरातीभाषी हो गया।

देवदूत बनकर आये जयेश, लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान और बाल कल्याण समिति, जयपुर
अक्टूबर, 2017 में गुजरात सरकार के अधिकारी जयेश कुमार द्वारा इस चिल्ड्रन होम में प्रोबेशन अधिकारी के पद पर कार्यग्रहण किया गया, जो विशाल के लिए देवदूत बनकर आये। उन्होंने विशाल से मिलने और उसकी फाइल देखने के बाद उसे उसके परिवार से मिलाने के लिए प्रण कर लिया। अपने इस प्रण को पूरा करने के लिए जयेश कुमार ने लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान को विशाल का मामला बताया और अभियान द्वारा बाल कल्याण समिति, जयपुर के साथ मिलकर विशाल का परिवार तलाश करने के प्रयास प्रारंभ किये गये। इसी बीच विशाल की फाइल पर इटावा, जयपुर लिखा होने के कारण कानूनी प्रावधानों के तहत इसे मई, 2018 में राजकोट (गुजरात) से बाल कल्याण समिति, जयपुर (राजस्थान) स्थानान्तरित किया गया, परन्तु भाषा संबंधी समस्या सबसे बड़ी बाधा बनकर आई। लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान के संस्थापक राहुल शर्मा और बाल कल्याण समिति, जयपुर द्वारा संयुक्त रूप से दुभाषिया की मदद से विशाल की एक बार फिर काउंसिलिंग की गई और विशाल का परिवार तलाश करने हेतु नये सिरे से एक बार फिर संयुक्त प्रयास प्रारंभ किये गये। विशाल की गुजराती भाषा ना समझ पाने के कारण इसे वापस गुजरात लौटा दिया गया।

अंततः प्रयासों को मिली सफलता
विशाल के परिवार की इस खोज ने प्रयासांे की दिशा को इटावा (उत्तर प्रदेश) की ओर मोड़ दिया और सोशल मीडिया की सहायता से वहाँ की पुलिस एवं आम जनता का भी सहयोग लिया गया। कहते हैं कि जब भी आप कोई अच्छा काम करते हो, तो सारी कायनात आपका साथ देने लग जाती है। विशाल की किस्मत में भी शायद 10 साल बाद अपने परिवार से मिलना लिखा हुआ था, इसीलिए इन प्रयासों में सफलता मिली और 29 मई, 2018 की रात्रि 11 बजे विशाल के परिवार को इटावा (उत्तर प्रदेश) में खोज लिया गया। विशाल के पिता महेन्द्र सैनी और भाई रोहित सैनी से बात की गई और उन्हें व्हाट्सएप पर विशाल के बचपन की फोटो दिखाई गई, तो उन्होंने तुरन्त भावुक होकर अपने विशाल को पहचान लिया। 9 जून को विशाल के पिता और चाचा राजकोट पहुँचे और भाव विव्हल माहौल में 10 साल बाद अपने जिगर के टुकड़े से मिलकर बहुत प्रसन्न हुए।

आभार जताने पहुंचे जयपुर
विशाल और उसके परिवार की खुशी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजकोट से निकलकर सीधे अपने निवास इटावा (उत्तर प्रदेश) जाने के बजाय वे लॉस्ट फाउण्ड पर्सन और बाल कल्याण समिति, जयपुर का आभार जताने 10 जून को जयपुर पहुँचे और इसके बाद देर शाम इटावा के लिए रवाना हुए। इतने सालों बाद मिली इस अप्रत्याशित खुशी की चमक उनकी आंखों में साफ देखी जा रही थी।

इनका रहा सहयोग
10 साल पहले परिवार से बिछुड़े हुए बालक को उसके परिवार से मिलाने के इस नायाब पल में लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान, बाल कल्याण समिति, जयपुर एवं राजकीय चिल्ड्रन होम, राजकोट (गुजरात) के प्रोबेशन ऑफिसर जयेश कुमार का विशेष सहयोग रहा। लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान के संस्थापक जयपुर निवासी राहुल शर्मा ने इस सफलता हेतु बाल कल्याण समिति, जयपुर के अध्यक्ष नरेन्द्र सिखवाल, सदस्य निशा पारीक, मीना यादव एवं आनन्द बिहारी पारीक, गुजरात निवासी जयेश कुमार, कोटा जिला निवासी मनीष पंकज, कलकत्ता निवासी श्रीगोपाल तापड़िया सहित इस अभियान से जुड़े हुए समस्त प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष देशव्यापी सहयोगियांे का हार्दिक आभार और धन्यवाद ज्ञापित किया, जिनके सम्मिलित प्रयासों से विशाल के परिवार को तलाशा जा सका।

‘‘सोशल मीडिया और लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान के सहयोग से बाल कल्याण समिति, जयपुर अपने प्रयासों में सफल हुई और हम 10 साल बाद विशाल को उसके परिवार से मिला पाये।‘‘ — नरेन्द्र सिखवाल, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, जयपुर

‘‘मई, 2018 में विशाल की बाल कल्याण समिति, जयपुर और लॉस्ट फाउण्ड पर्सन द्वारा की गई काउंसिलिंग ने हमें इसका परिवार तलाश करने की एक नई दिशा प्रदान की और उत्तर प्रदेश की इटावा पुलिस एवं आमजनता का साथ लेकर हम विशाल को उसके परिवार से मिला पाये।‘‘ — निशा पारीक, सदस्य, बाल कल्याण समिति

‘‘विशाल 2008 से लापता था और लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान ने सी.डब्ल्यू.सी., जयपुर और चिल्ड्रन होम, राजकोट के अधिकारीगण के सहयोग से 2018 में इसका परिवार तलाशा। रात 11 बजे परिवार ट्रेस होना मेरे लिए अत्यन्त सुखद पल था। मैं सभी सहयोगियों का आभारी हूं।’’ — राहुल शर्मा, संस्थापक, लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान

‘‘मैं 10 साल बाद अपने बेटे से मिलकर बहुत खुश हूँ और इसे मिलाने के लिए सहयोग देने वाली सभी संस्थाओं का धन्यवाद देता हूँ। मैं इतना अधिक प्रभावित हूँ कि राजकोट से इटावा जाने के बजाय पहले जयपुर आया हूँ।’’ —- महेन्द्र सैनी, विशाल के पिता
क्या है लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान
लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान बिछुड़े हुए लापता व्यक्तियों को उनके परिवारों से मिलाने का देशव्यापी सामाजिक अभियान है, जिसकी मुख्य कार्यप्रणाली पूरे देश के लोगों को एक प्लेटफार्म पर लाकर एक मजबूत नेटवर्क स्थापित करते हुए सभी लापता व्यक्तियों और लावारिस पाये गये जीवित अथवा मृत व्यक्तियों का मिलान करना है।

क्या है अभियान की सफलताऐं
इस अभियान का शुभारम्भ भारतीय नववर्ष के अवसर पर 8 अप्रैल, 2016 को किया गया था और इन लगभग 2 वर्षों की अवधि में यह अभियान अपने प्रयासों से 160 से भी अधिक व्यक्तियों को उनके परिवारों से मिला पाने सफलता प्राप्त कर चुका है। अभियान के कार्यों को देखते हुए राजस्थान पुलिस और राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा भी इस अभियान को अधिकृत करते हुए अपने समस्त विभागीय अधिकारियों को लापता व्यक्तियों की तलाश एवं लावारिस व्यक्तियों की पहचान हेतु लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान का सहयोग लेने के लिए निर्देश जारी किये जा चुके हैं।

कैसे काम करता है लॉस्ट फाउण्ड पर्सन अभियान

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