पाबन्दी होने के बाद भी धड़ल्ले से बेचा जा रहाप्लास्टिक

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गीतांजलि पोस्ट…
जयपुर। राज्य सरकार की ओर से पॉलिथीन पर रोक के बावजूद भी शहर में धड़ल्ले से प्लास्टिक की थैली और कैरी बैग बिक रहे हैं। जबकि सरकार इसको रोकने का काफी प्रयास कर रही है । सरकार ने पॉलिथीन जब्त करने के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से हरमाड़ा क्षेत्र में कई बार कार्रवाई की जा चुकी है।
इसके बाद भी दुकानदारों और व्यापारियों को कोई भय नहीं है और खुलेआम प्लास्टिक का उपयोग कर रहे है। जिसको लेकर शनिवार को नगर निगम की टीम ने हरमाड़ा क्षेत्र की दुकानों पर छापेमारी करके पॉलिथीन की थैलियां जब्त की है और चालान काटा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर फिर से जिन दुकानदारों के पास पॉलिथीन की थैलियां मिलती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पॉलीथिन थैलियों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री, इस्तेमाल और इसके वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दिया गया है। प्रतिबंध के बावजूद पॉलिथीन की थैलियों की क्रय-बिक्रय धड़ल्ले से किया जा रहा है।
हम आपको बता दें कि पॉलिथीन शक्ति के बावजूद भी शहर मेंकचरे में भी काफी तादात में प्लास्टिक की थैलियां पाई जा रही है जिस कारण पर्यावरण को काफी नुकसान पहुच रहा है। इसे देखते हुए जयपुर नगर निगम ने शहर को स्वच्छ और साफ बनाने और प्लास्टिक की थैले से आजाद करने के लिए जगह जगह छापे मारे और प्लास्टिक थैलियों को भी जब्त किया, लेकिन इसके बावजूद भी कोई खास असर होता नहीं दिखाई दे रहा है।
सार्वजनिक स्थानों पर लोग खुले आम प्लास्टिक की थैलियां लिए घूम रहे है और दुकानदार भी कई जगह खुले आम बेच रहे है। बस स्टैंड हो या सब्जी मंडी यह फिर कोई मिठाई की दुकान प्लास्टिक की थैली मिल ही जाएगी है।
नियमों का नहीं हो रहा पालन
नियम के मुताबिक प्लास्टिक बैग , थैलियां , कैरी बैग और पैकेजिंग पर उसके निमार्ता का नाम और पता लिखा होना आवश्यक होता है इसके साथ ही प्लास्टिक से बने कैरी बैग की मोटाई 50 माइक्रान से कम नहीं होनी चाहिए लेकिन इन नियमों की शहर में कहीं भी पालना होती नजर नहीं रही है।
पशु बन रहे शिकार
अधिकतर लोग पॉलिथीन की पन्नियो में कूडा भरकर फेंक देते है। जिस कारण पशु इन पन्नियों को खा लेते है बाद मे ये पशु बीमार होकर दम तोड़ देते है। और लोगों द्वारा फेंकी गई पॉलिथीन की थैलियों नाली में नालों में फंस जाती है जिससे पानी को भी अवगत अवरुद्ध करकरा देती है।