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पिंक सिटी न्यूज़

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मनवाने को बाध्य करेगी वाहिनी — तिवाड़ी

Geetanjali Post… जयपुर। दीनदयाल वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष व सांगानेर विधायकश्री घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को नैतिकता केआधार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए तुरंतसरकारी बंगलों को खाली करना चाहिए। श्री तिवाड़ी ने इसी मुद्दे परराजस्थान में मुख्यमंत्री द्वारा सिविल लाइंस स्थित 8 व 13 नंबर केबंगलों का उपयोग करने को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा किमुख्यमंत्री को 13 नंबर बंगला तुरंत खाली करना चाहिए और 8 नंबर बंगले में शिफ्ट होना चाहिए। श्री तिवाड़ी ने कहा कि वाहिनीशुरू से ही 13 नंबर बंगले पर स्थाई कब्जा करने के प्रयास काविरोध करती रही है। अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ चुका हैइसलिए मुख्यमंत्री को तुरंत प्रभाव से बंगला खाली कर देना चाहिए।वाहिनी इस निर्णय की पालना के लिये पूरे प्रदेश में अगले 10 दिनोंतक लगातार आंदोलनरत रहेगी। जिसकी शुरूआत गुरूवार 10 मईको जयपुर में वाहिनी के कार्यकर्ता सिविल लाइन फाटक परविधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करने से होगी। उन्होंनेकहा कि वाहिनी आंदोलन व विरोध प्रदर्शन के माध्यम से 13 नंबरबंगला खाली करने को बाध्य करेगी। श्री तिवाड़ी बुधवार कोमातृमंदिर श्याम नगर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कररहे थे।  उत्तर प्रदेश मिनिस्टर्स एक्ट 1981 की धारा 4(3) को सुप्रीम कोर्ट नेसोमवार को रद्द कर दिया। जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को ताउम्रसरकारी बंगला देने का प्रावधान था। बैंच ने उत्तर प्रदेश सरकार केकानून को रद्द करते हुए कहा कानून समानता के मौलिक अधिकारके खिलाफ है और मनमाना है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रियादेते हुए श्री घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि राजस्थान में इसी विधेयककी नकल करते हुए मंत्री वेतन विधेयक, 2017 लाया गया था जोकि उक्त विधेयक से भी ज्यादा असंवैधानिक और मनमाना है।उन्होंने कहा कि इस बिल में धारा 7-खख के अनुसार सरकारी बंगलेके साथ ही अन्य सुविधाओं का आजीवन प्रबंध किया गया। इस केसाथ ही 13 नंबर बंगले को पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से काम मेंतथा 8 नंबर बंगले को वर्तमान मुख्यमंत्री की हैसियत से काम मेंलिया जा रहा है ताकि चुनाव हारने पर 13 नंबर बंगला बना रहे औरइस पर अपनी सुख सुविधाओं के लिए असीमित धन खर्च कियागया है। श्री तिवाड़ी ने कहा कि उन्होंने राजस्थान विधानसभा मेंसवाल पूछा कि बंगला नंबर 13 पर कितना सरकारी खर्च कियागया लेकिन इसका जवाब ही नहीं दिया बल्कि प्रश्न को ही अग्राह्यकर दिया गया। श्री तिवाड़ी ने कहा कि राजस्थान विधानसभा में जब इसअसंवैधानिक विधेयक का विरोध करने के बावजूद कोई ध्यान नहींदिया गया तो मैंने राज्यपाल से समय मांगा लेकिन उन्होंने भी मुझेसमय नहीं दिया। मजबूरन विधेयक पर हस्ताक्षर न करने के लिएराज्यपाल को पत्र लिखा। लेकिन दूसरे ही दिन राज्यपाल नेमुख्यमंत्री को राजभवन में खाना खिलाकर और उस विधेयक परहस्ताक्षर कर दिये। क्योंकि राज्यपाल स्वयं लखनउ में इस सुविधाका उपभोग कर रहे हैं। वे नहीं चाहते थे कि कोई इस विधेयक काविरोध करें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भी इस विधेयक का विरोध नहीं किया।जब पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने सरकारी बंगले का प्रावधान किया थातो मैंने उसका विरोध किया था लेकिन उन्होंने कहा कि कटारियाजी कहेंगे तो में लागू नहीं करूंगा। कटारिया ने इसका विरोध नहींकिया उन्होंने मौन साध लिया। मगर राजेंद्र राठौड़ ने बीच में उठकरकहा कि हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है। तब भी मैंने कहा था किये सब आगे की तैयारियां हो रही है जो कि आज हम सबकी आंखोंके सामने है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में भी पूर्वमुख्यमंत्रियों को बंगला खाली करने का आदेश दिया था। तबअखिलेश सरकार ने पुराने कानून में संशोधन कर दिया था। श्री तिवाड़ी ने कहा कि मेरी मांग है कि जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट नेउत्तर प्रदेश के विधेयक को स्ट्रक डाउन किया है उसी प्रकारराजस्थान में बनाया गया है। इसकी व्याख्या की बात जनता कीआंखों में धूल झोंकने का असफल प्रयास है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्रीअशोक गहलोत और वर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मिलीभगतहै।