सकारात्मक सोच के साथ……….

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सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भ्रद्राणि पश्चन्तु मॅा कश्चिद् दु:खभाग्भवेत् ….. इसी सकारात्मक सोच के साथ गाीतंाजलि पोस्ट साप्ताहिक समाचार-पत्र का ऑनलाइन प्रकाशन प्रारम्भ कर रही हॅूं। पत्रकारिता जनता को वास्तविकता से अवगत कराने के अलावा समाज का मार्गदर्शन भी करती हैं पत्रकारिता द्वारा किया गया यह मार्गदर्शन तभी सफल होगा जब हम समाज के सामने सकारात्मक विचार देगे। समाज को सच का आयना दिखाने वाले पत्रकार मीडिय़ा जिसे लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ माना जाता हैं एक तरफ यह समाज में नकारात्मक विचार फैला कर समाज को विद्रोही बना सकता हैं उसे भ्रमित कर सकता हैं, वहीं दूसरी और यह सकारात्मक तथ्य देकर समाज की सोच को भी सकारात्मक कर सकता हैं कहा जाता हैं कि सर्वप्रथम जब फॅारसी लोग भारत में आये तो उन्होने केरल के राजा से भारत में रहने की अनुमति मॉगी तो केरल के राजा ने उनके मुखिया के सामने एक पानी का गिलास रखा और कहंा हमारा समाज इस पानी कह तरह स्वच्छ हैं हम इसमें किसी तरह कि मिलावट कर इसे गंदला नहीं करना चाहते तब फॅारसियों के सरदार ने उस पानी के गिलास में एक मिश्री की ड़ली ड़ाल कर पानी को हिलाया एंव कहा महाराज अब आपको पानी कैसा नजर आ रहा है तब राजा ने कहा पानी स्वच्छ हैं तब उनके मुखिया ने कहा राजन पानी का स्वाद भी जानिये राजा ने पानी पीया और कहा यह तो मिठा हैं और स्वच्छ भी हैं तब सरदार ने कहा महाराज जिस तरह आपका पानी साफ हैं और पानी का स्वाद भी मिठा हो गया है उसी प्रकार हम आपके समाज के साथ रहेगें तो आपका समाज स्वच्छ ही रहेगा लेकिन हमारे रहने से उसमें मिठास घोलते रहेगें। इस तरह से सकारात्मक विचार समाज के वातावरण में उपलब्ध सकारात्मक विचारों को दुगुना चौगुना बढ़ाकर समाज में  खुशहाली पैदा करते रहते हैं सकारात्मक सोच और विचारों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा वातावरण में फैलती और नकारात्मकता को दबाकर सकारात्मकता का साम्राज्य स्थापित करती हैं।