नारी:नहीं है ताडऩा की अधिकारी

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लेखक-रोहित कुमार शर्मा (कॉरपोरेट एडवाईजर)

एक प्रयास-समाज में बदलाव का……

nari
एक बार हास्य रास कवि सुरेन्द्र शर्मा की कविता सुनने का मौका मिला। जैसा की सभी जानते है कि उनकी कविताओ में संवाद पत्नी एवं स्वयं को लेकर ज्यादा होता है। इस बार सन्दर्भ था जिसमे वे पत्नी से कहते है कि तुलसीदास भी कह कर गए है कि ढोल, गंवार, शुद्र, पशु, नारी सकल ताडऩा के अधिकारी। उनकी पत्नी जबाब देती है कि इसमे एक जगह तो वो स्वयं है परन्तु बाकी चार जगह तो आप हंै। यह हास्य संवाद सुनने के बाद मेरे मन में एक प्रश्न भी छोड़ गया। आखिऱकार तुलसीदास जी नारी को ताडऩा का अधिकारी कैसे बता सकते हंै। जब प्रश्न उठता हो और जानने की जिज्ञासा हो तो सभी कुछ न कुछ खोजने कि चेष्टा करते हैं, मैने पता लगाया कि यह चोपाई सुन्दरकाण्ड में वर्णित है। जिसमें राम और समुद्र के बीच संवाद हो रहा है। तुलसीदास जी ने इस चोपाई में ऐसा कुछ भी अपनी तरफ से नहीं कहा है जिसमे उन्होंने नारी को ताडऩा का अधिकारी कहा है। तथ्य यह है कि तुलसीदासजी ने वह ज्यो का त्यों लिख दिया जिसे समुद्र ने प्रभु श्री राम को कहा । आखिरकार तुलसीदास जी ने मानस में स्त्री को देवी के समान बताया है चाहे स्त्री को दिए वचन निभाने के लिए ही राम को वनवाश होता है, चाहे सीता को माता के रूप में प्रस्तुति हो, यहां तक कि मंदोदरी व त्रिजटा का चरित्र चित्रण भी सकारात्मक बताया हो वो नारी के बारे में हिंदी अर्थ के रूप में ताडऩा मतलब डांटना या तडि़त कारण कैसे बता सकते हैं।
सुन्दरकाण्ड की में पूरी चोपाई इस प्रकार हैं-
प्रभु भल कीन्ह मोहि सीख दीन्ही। मरजादा पुनि तुम्हारी कीन्हि।।
ढोल, गँवार, शुद्र, पशु, नारी। सकल ताडऩा के अधिकारी।।
इस चौपाई पर जब गहराई से मनन करता गया ,विचार करता गया तो एक सूत्र हाथ लगा कि तुलसी दास भी सही थे और हास्य रास कवि सुरेन्द्र शर्मा भी अपनी कविता में कोई अर्थ छुपाये हुए थे। आखिरकार कवि की कविताओ के अंतर्निहित होते है जहां तक मेरी पहुँच गयी – नारी किसी भी रूप में हो यथा माँ , बहन , बेटी, भाभी, बुआ , ताई, चाची और पत्नी सभी में वह पूजनीय अथवा सम्माननीय है, परन्तु नारी सारी मर्यादाये छोड़ दे और केवल स्त्री रूप में प्रस्तुत हो तो वह ताडऩ योग्य अथवा समझने योग्य है। इस प्रकार बाकी सारे रूप जो कि पुल्लिंग है सभी नर पर लागू होते है क्योकि वह भी मर्यादा छोड़ कर कोई काम करे जैसा कि आजकल रेपिस्ट या विकृत मानसिकता वाले लोगो द्वारा किया जाता है वे ढोल, गँवार, शुद्र या पशु किसी न किसी श्रेणी में आते है।