न्याय के मन्दिर सिद्ध हो रहे हैं गाँवाई शिविर

0
42

सफलता की कहानी

उदयपुर जिले में परवान पर है राजस्व लोक अदालत अभियान

 

राजस्व लोक अदालत अभियान न्याय आपके द्वार उदयपुर जिले में परवान पर है। इन दिनों ग्राम्याचंलाेंं में न्याय आपके द्वार शिविरों का माहौल पसरा हुआ है और ग्रामीणों की उत्साहजनक भागीदारी तथा त्वरित कार्य संपादन की बदौलत यह अभियान आशातीत उपलब्धियों की ओर अग्रसर है।

वाद मुक्त हुई टीडी और वाटी ग्राम पंचायतें

इसी सप्ताह उदयपुर जिले की दो और ग्राम पंचायतें वाद मुक्त घोषित हो गई हैं जहाँ राजस्व अघिकारियों एवं कार्मिकों की समझाईश और प्रभावी कार्य निस्तारण से पंचायत क्षेत्र में चल रहे मुकदमों (प्रकरणों) का शत-प्रतिशत निस्तारण हो चुका है। इनमें गिर्वा तहसील की टीड़ी ग्राम पंचायत और बड़गांव तहसील की वाटी ग्राम पंचायत शामिल है जो कि वाद रहित हो चुकी हैं।

दीपला ने की पहल, शिविर में आकर जुड़वाया माँ और भाई-बहनों का नाम

न्याय आपके द्वार शिविर पारिवारिक आत्मीयता विस्तार और कौटुम्बिक प्रेम का दिग्दर्शन कराने वाले भी साबित हो रहे हैं। ग्रामीण किसी कारण से छूट कर अपने भाई-बहनों एवं माता का नाम जुड़वाने के लिए खुद शिविर में आकर नाम जुड़वा रहे हैं।

ऎसा ही एक मामला गिर्वा पंचायत समिति अन्तर्गत टीडी में लगे राजस्व लोक अदालत शिविर में सामने आया जहाँ पिता की मृत्यु के पश्चात केवल बड़े पुत्र के नाम हो गई सारी की सारी भूमि सात भाई-बहनों एवं माता के नाम हुई।

टीडी ग्राम पंचायत पर लगे राजस्व लोक अदालत न्याय आपके द्वार शिविर में दीपला पिता पुंजा ने आकर शिविर प्रभारी, उपखण्ड अधिकारी श्रीमती नम्रता वृषणी को प्रार्थना-पत्र दिया कि उसके पिता पुंजा की मृत्यु के बाद भी भूमि सभी के नाम नहीं हुई जबकि उनके परिवार में चार भाई तीन बहनें एवं उसकी माता जीवित है। दीपला ने बताया कि  24 वर्ष पहले हुई विरासत के समय उसका अकेले का नाम दर्ज हुआ था, जबकि उसके भाई-बहनें एवं माता का नाम आज भी कृषि भूमि के राजस्व रेकार्ड में अंकित नहीं है।

इस पर शिविर प्रभारी एवं उपखण्ड अधिकारी श्रीमती नम्रता वृषनी द्वारा पटवारी श्रीमती प्रियंका नलवाया, भू अभिलेख निरीक्षक राजेन्द्र चोरडिया एवं उपतहसीलदार बारापाल युवराज कौशिक से पूरे प्रकरण की रेकार्ड और मौका से जांच करवाई गई।  जांच में तथ्य सही पाये जाने पर मौके पर ही केम्प प्रभारी एवं उपखण्ड अधिकारी श्रीमती नम्रता वृषनी द्वारा प्रकरण निस्तारण करते हुए पुंजा के सभी वारीसान के नाम राजस्व रेकार्ड में दर्ज किये जाने के आदेश दिये।