प्रशासनिक उदासीनता के कारण बदहाली में धोलपुर का निहाल क्लॉक टावर

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जानिए हमारी ऐतिहासिक धरोंहर-3

गीतांजलि पोस्ट ने अपने पाठकों के लिये इतिहास के झरोखें से नाम से एक विशेष कॉलम बनाया हैें जिसमें पाठकों को देश की ऐतिहासिक धरोंहर जैसे:- 250 साल से अधिक पुराने ऐतिहातिक दुर्ग , विभिन्न धर्मो के धार्मिक स्थल इत्यादी की जानकारियां दी जाती हैं। आज के इस विशेष कॉलम में हमने धोलपुर में स्थित  निहालक्लॉक टावरके बारे में बताया हैं   “ निहालक्लॉक टावर ”  का उल्लेख करती गीतांजलि पोस्ट के संवाददाता मोहन दुबे  की रिपोर्ट……मोहन दुबे ,धोलपुर

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क्या है   निहाल क्लॉक – धोलपुर के राजा निहाल सिंह ने 1910 में धोलपुर में टॉउनहॉल रोड पर घन्टाघर निहालक्लॉक टावर बनवाया था जो 150 फिट लम्बा हैं ,नीचे की तरफ 120 फिट में फैले 12 दरवाजे बने हैं जो हैं एंव इसमें एक घड़ी है जो समय बताती हैं।

सरकार की अवहेलना का शिकार क्लॉक टावर – ऐतिहासिक महत्व रखने वाला घन्टाघर जो कभी पूरे शहर को समय से अवगत कराता था। आज उसका स्वंय का ही समय खराब चल रहा है। राज्य सरकार के द्वारा संरक्ष्ति होने के बाद भी क्लॉक टावर प्रशासनिक अवहेलनाओं का शिकार हो रहा हैं। घन्टाघर में लगी समय बताने वाली घड़ी भी खराब पड़ी हुई है। तथा इसमें घड़ी के साथ बजने वाला घन्टा भी अब मरम्मत की मांग कर रहा हैं , नीचे की मंजिल का कई जगह से प्लास्टर उखड़ गया हैं एंव तथा आसपास में कई जगह सड़क की खुदाई के कारण इसकी नीवं अब कमोजर होनें लगी है। राज्य पर्यटन विभाग ने एक पत्थर इसके पास लगा कर शायद अपनी जिम्मेदारीं पूरी समझा ली जैसे पत्थर लगाकर उन्होने कितना बड़ा काम कर दिया है।कलक्टर शुचि त्यागी ने बताया कि निहाल क्लॉक टावर की मरम्मत के काम में करोडों रूपयों की लागत आयेगी अभी नगरपरिषद् के पास बजट नहीं हैं , बजट होने पर टावर की मरम्मत करवा दी जायेगी। सरकार कई ऐतिहासिक इमारतो की मरम्मत करा कर उनकों बचाने में लगी है लेकिन धौलपुर के इस क्लॉक टावर की बह सुध लेना ही भूल गई है।

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याद आता हैं बीता जमाना- एक जमाना था जब शहर भर के लोग इसी घन्टाघर के घन्टों की अवाज सुनकर अपनी दिनचर्या शुरू करते थें और समय का पता लगा पाते थे लेकिन अब धीरें-धीरें समय बदलता रहा और इसकी महत्वता कम होती चली गई। कही ऐसा ना हो जाये की यह ऐतिहासिक महत्व रखने वाला क्लॉक टावर प्रशासनिक और सरकारी उदासीनता के चलते अपना बजूद ही खो दे और सिर्फ इतिहास के पन्नो में ही सिमट कर रह जायें अब हमें इसको बचाने के लिए मुहिम चला कर सरकार और प्रशासन को जगाना चहिएं शायद नागरिकों की पहल से ही इस जिलें की शान को बचाया जा सजें जिस तरह ताज महलों को दुनियां को सात अजूबो में शामिल करनें के लिए पूरा देश खड़ा हों गया था और ताज का नाम दुनिया के सात अजूबो में शामिल करा कर ही भारतीयों ने दम लिया था। अब हमें भी इसी तरह इसको बचाने के लिए शायद ऐसें ही इक्कठ्ठा होकर एक मुहिम चलानी होगी तब ही शायद हम सभी के प्रयासों से ही इसे बचाया जा सकता है।