अभिनव राजस्थान में आपकी गाड़ी कैसे चेक होगी ?

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महावीर पारीक ,लाडनू

आपकी गाड़ी को विनम्रता से रोका जायेगा।  पुलिस अधिकारी शहर में और परिवहन अधिकारी शहर से बाहर आपकी गाड़ी के नम्बर अपने टेबलेट में डालेगा।  आपका नाम, आपकी तस्वीर, ड्राइविंग लाइसेंस, आपके फोन नम्बर दिखाई दे जायेंगे।  एक रिंग मारेंगे कि आपका फोन बजेगा।  कन्फर्म…….. अधिकारी मुस्कुराकर कहेगा- श्रीमान पधारें।  प्लीज मूव…… Have a nice day ! आपको लगेगा कि शासन आपका है ! आप भी थेंक्स बोलेंगे।

अगर गाड़ी किसी से मांगकर लाये हैं या आपके नाम नहीं है तो उस वाहन मालिक से पास फोन जायेगा और पूछा जायेगा कि गाड़ी चालक को वाहन दिया गया है क्या ? हाँ में उत्तर आते ही- श्रीमान, पधारें।
अगर गाड़ी चोरी की होगी तो टेबलेट में वार्निंग रिंग बजेगी।  क्योंकि चोरी की रिपोर्ट दर्ज होते ही सीस्टम में उसका विवरण आ जायेगा।

लेकिन इस काम में विनम्रता और दृढ़ता का संगम होगा।  विशेष प्रशिक्षण से, ढ़िलाई नहीं होगी।
सीमा से तेज रफ़्तार होने पर प्रूफ के साथ चालन घर भेज दिया जायेगा जिसे एक महीने में भरना होगा.
पर कागज साथ रखने की कोई जरूरत नहीं होगी।

अभी क्या हाल हैं ? हे, गाड़ी रोको, कागज कहाँ हैं ? लाइसेंस कहाँ है ? साहब के पास चलो, और जच गई साहब के तो किसी भी बात पर चालान पक्का।  नहीं तो ‘कुछ’ करो ! व्यवहार भी ऐसा जैसे हर गाड़ी सवार ‘चोर’ ही हो।  डरे हुए, घबराए लोग ‘साहब साहब’ करते रहते हैं या इधर उधर से फोन करवाते रहते हैं।
यह लोकतंत्र नहीं है, लोक का तंत्र नहीं है।  साहब का तंत्र है, जो टेक्स देने वालों की तौहीन है।

अभिनव राजस्थान हर मायने में अभिनव हो होगा।
लोकतांत्रिक होगा और उसमें तकनीक का इस्तेमाल नागरिकों के आराम-सुविधा के लिए होगा।

(राजस्थान के समाज और शासन के हर छोटे-बड़े महत्वपूर्ण विषय और कार्य पर योजनाएं तैयार हैं।  इनके समर्थन में नागरिकों का आना आवश्यक है, क्योंकि जब तक वे पहले नई व्यवस्था को समझकर उसकी इच्छा व्यक्त नहीं करेंगे, तब तक उन्हें नई व्यवस्था में ले जाना निरर्थक होगा।  अभी तक ऐसा ही हुआ है जब कुछ स्वार्थी तत्वों ने अपनी सोच और समझ को जनता पर थोपकर योजनाएं बनाई हैं, उनमें जनता की रुचि इसी वजह से नहीं है। )