आज का दिन

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आपका आज का दिन मंगलमय हो
दिनांक -: 08/07/2016
चतुर्थी, शुक्ल पक्ष
आषाढ
(समाप्ति काल)

तिथि ——चतुर्थी 12:44:26 तक
पक्ष ————————-शुक्ल
नक्षत्र ——मघा 18:09:45
योग ——-सिद्वि 13:25:44
करण —-विष्टि भद्र 12:44:26
करण ——–भाव 25:04:56*
वार ———————–शुक्रवार
माह ———————-आषाढ
चन्द्र राशि ————- सिंह
सूर्य राशि ———- मिथुन
रितु निरयन————–ग्रीष्म
रितु सायन—————-वर्षा
निरयन————-उत्तरायण
सायन ————दक्षिणायण
संवत्सर —————–दुर्मुख
संवत्सर (उत्तर) सौम्य
विक्रम संवत ————2073
विक्रम संवत (कर्तक) 2072
शक संवत ———–1938

सूर्योदय ———–05:31:37
सूर्यास्त ———–19:16:55
दिन काल ——–13:45:17
रात्री काल ——–10:15:09
चंद्रोदय ———–09:09:51
चंद्रास्त ————22:10:41

लग्न मिथुन 22°11′ , 82°11′

सूर्य नक्षत्र ————पुनर्वसु
चन्द्र नक्षत्र —————-मघा

पद, चरण

2 मी मघा 05:35:17
3 मू मघा 11:51:08
4 मे मघा 18:09:45
1 मो पूर्व फाल्गुनी 24:31:06*

ग्रह गोचर

ग्रह= राशी , अंश , नक्षत्र , पद
========================
सूर्य=मिथुन 20 ° 58′ पुनर्वसु , 1के
चन्द्र=सिंह 16 ° 55′ मघा , 2 मी
बुध=मिथुन 18 ° 27′ आद्रा, 4 छ
शुक्र= मिथुन 20° 50′ पुनर्वसु , 3 हा
मंगल=तुला 29°33′ विशाखा, 3 ते
गुरु=सिंह 21°45’पूर्वा फाल्गुनी, 3 टी
शनि=वृश्चिक 17°45′ ज्येष्ठा, 1 नो
राहू=सिंह 22°29’पूर्वा फाल्गुनी, 3 टी
केतु=कुम्भ 22°29’पूर्वा भाद्रपदा, 1 से
शुभा$शुभमुहूर्त

राहू काल 10:41 – 12:24 अशुभ
यम घंटा 15:51 – 17:34 अशुभ
गुली काल 07:15 – 08:58 अशुभ
अभिजित 11:57 -12:52 शुभ
दूर मुहूर्त 08:17 – 09:12 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:52 – 13:47 अशुभ

गंड मूल 05:32 – 18:10 अशुभ

चोघडिया, दिन
चाल 05:32 – 07:15 शुभ
लाभ 07:15 – 08:58 शुभ
अमृत 08:58 – 10:41 शुभ
काल 10:41 – 12:24 अशुभ
शुभ 12:24 – 14:07 शुभ
रोग 14:07 – 15:51 अशुभ
उद्वेग 15:51 – 17:34 अशुभ
चाल 17:34 – 19:17 शुभ

चोघडिया, रात
रोग 19:17 – 20:34 अशुभ
काल 20:34 – 21:51 अशुभ
लाभ 21:51 – 23:08 शुभ
उद्वेग 23:08 – 24:25* अशुभ
शुभ 24:25* – 25:41* शुभ
अमृत 25:41* – 26:58* शुभ
चाल 26:58* – 28:15* शुभ
रोग 28:15* – 29:32* अशुभ

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान———–पश्चिम

परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l

अग्नि वास ज्ञान -:

4 + 6 + 1 = 11 ÷ 4 = 3 शेष
पृथ्वी पर अग्नि वास हवन के लिये शुभ कारक है l

शिव वास एवं फल -:

4 + 4 + 5 = 13 ÷ 7 = 6 शेष

क्रीडायां = दु:ख शोक कारक

भद्रा विचार एवं फल -:

दोपहर 12:44 तक समाप्त