आखिर कब तक जलेगा कश्मीर

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आंतकवादी बुरहान वानी को भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराये जाते ही घाटी में बवाल आ गया जो थमने का नाम ही नहीं ले रहा दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार , आंतकी हाफिजसईद और आईएसआई तीनो मिलकर भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं और हाफिजसईद कह रहा हैं कि पाकिस्तान को भारत से राजनयिक और व्यापारिक संबधों को तोड़ लेना चाहिये। अन्र्तराष्ट्रीय मंच पर भी पाकिस्तान सरकार द्वारा इस घटना को तूल देने की भरपूर कोशिश की जा रही हैं। पाकिस्तान की यह करतूत अप्रत्याशित नहीं हैं यह सभी को पता है कि पाकिस्तान घाटी में अराजकता फैलाने में कोई कसर नही रख रहा। आखिर भारत सरकार यह सब जानते हुए भी हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी हैं ?आखिर क्यों हमारे ही कश्मीरी नागरिक पाकिस्तान के बहकावे में आ रहे है जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के नागरिक हमारे बहकावे में आकर पाकिस्तान के विरूद्व अलगाववादी आन्दोलन क्यों नहीं छेड़ते ? इसका कारण स्पष्ट है कि पाकिस्तानी सरकार अलगाववादियों से सख्ती से निपटती है और हमारी सरकार उनके साथ नरमी बरतने के साथ-साथ ऐसे अलगाववादी तत्वो को भटके हुए युवक कहती हैं। तो क्या देश के अन्य हिस्सो में पुलिस , सुरक्षा बल व सेना पर पत्थर फेकने वाले या गोली चलाने वाले युवकों के लिये भी सरकार ऐसा कहेगी ? सरकार ऐसा नहीं करेगी बल्कि उनके विरूद्व तो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा करके उनको जेल में ड़लवा देगी। जब यह स्पष्ट है कि कश्मीर के ये लोग पैसे लेकर सेना पर आक्रमण कर रहे हैं तो इनको पैसे देने वाले लोगों को एंव इन लोगों को छूट क्यों दी जा रही हैं ? और कब तक ये छूट दी जाती रहेगी ? हुर्रियत और अन्य आंतकवादी संगठनों के नेता जो पाकिस्तान से प्राप्त पैसों के बल पर खुद तो ऐशों आराम की जिन्दगी जी रहे हैं और कश्मीर के युवकों को बरगलाकर सेना पर आक्रमण करवा रहे हैं आखिर उन्हे क्यों जिन्दा रखा जा रहा है।
राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरी है और उसके साथ कोई समझौता नही किया जा सकता , भारत सरकार को चीन से सबक लेना चाहिये जो ऐसे आन्दोलनो को बड़ी बेरहमी से कुचल देता हैं। ये लोग कहने को तो कश्मीर की बात करते हैं लेकिन इन्होंने कश्मीर के मूल निवासी कश्मीरी पण्डि़तो को वहां से निकाल दिया जो आज 25 साल बाद भी अपने ही देश में शरणार्थियों का जीवन जी रहे हैं। इससे स्पष्ट हैं कि इनका कश्मीरीयत ये कोई वास्ता नहीं बल्कि ये कश्मीर को पूर्ण मुस्लिम क्षेत्र बनाकर पाकिस्तान में मिलाना चाहते हैं।
क्या भारत सरकार मे इतना दम नहंी हैं कि इन अलगाववादी लोगों को कश्मीर घाटी से निकाल कर इसी प्रकार पाकिस्तान मे भेज दे जिस तरह इन्होने कश्मीरी पण्डि़तो को कश्मीर से बाहर भेज दिया था ? आज भारत के नागरिक इसी अपेक्षा से मोदी सरकार की ओर देख रहे हैं कि वह कोई ठोस कदम उठायेगी या फिर पिछली सरकारों की तरह वो भी टाईम पास करती रहेगी। यदि हम अलगाववादियों पर होने वाले खर्च को , शान्ति से रहना चाहने वाले जम्मू और लद्दाख पर खर्च करे तो उससे उस क्षेत्र का तो विकास हो सकता हैं। हम भारत के नागरिक ये सोचने के लिये विवश हैं कि हम क्यों अपना बजट अलगाववादियों पर खर्च कर रहे हैं। क्यों नहीं उनको उनके हाल पर छोड़ दिया जाये जिस प्रकार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रहा हैं। जब लद्दाख और जम्मू में विकास होगा और घाटी में पिछड़ापन रहेगा तब वहां कि जनता और नेताओं को समझ में आयेगा।