सूचना का अधिकार, 2005 ……पार्ट-2

313
220

महावीर पारिक

 आरटीआई विशेषज्ञ, लाडनू

पिछले भाग में सूचना का अधिकार, 2005 के बारे में बताया था। राजस्थान के सरकारी विभागों की सूचना का अधिकारों की जानकारी के बारे में बड़ी दयनीय स्थिति हैं सरकार ने इसके लिये खूब प्रचार किया लेकिन कई अधिकारियों को तो आर टी आई के नियम तक नहीं मालूम ऐसे में वे क्या लोगों की सहायता करेगें । सूचना के अधिकार के इस विशेष कॉलम में आरटीआई से संबधित सवालों के जवाब आरटीआई विशेषज्ञ महावीर पारिक द्वारा दिये गये हैं।

सवाल- आरटीआई अधिनियम कब अस्तित्व में आया? यदि आप कह रहे हैं कि केंद्र सरकार ने इसे हाल ही में लागू किया है तब आप कैसे कह सकते हैं कि बड़ी संख्या में लोगों ने इससे फायदा उठाया हैं?
जवाब- आरटीआइ अधिनियम 12 अक्टूबर 2005 से अस्तित्व मेंआया इससे पूर्व यह 9 राज्यों में लागू था । ये राज्य हैं – जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट, तमिलनाडू,आसाम तथा गोवा। इनमें से कई राज्यों में यह पिछले 5 वर्षों से लागू था और बहुत अच्छा काम कर रहा था।

सवाल- मुझे सूचना  कौन देगा? मैं आवेदन किसे जमा करूं?
जवाब- सभी सरकारी विभागों के एक या एक से अधिक अधिकारियों को जन सूचना अधिकारी नियुक्त किया गयाहै। आपको अपना आवेदन उन्हें ही जमा करना है। यह उनकी जि़म्मेदारी है कि वे आपके द्वारा मांगी गई सूचनाविभाग की विभिन्न शाखाओं से इक_ा करके आप तक पहुंचाएं ।

सवाल- मैं आवेदन शुल्क कैसे जमा कर सकता हूँ ?
जवाब- आवेदन शुल्क के लिए हर राज्य की अपनी अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। आम तौर पर आप अपना शुल्क निम्नलिखित तरीकों से जमा करा सकते हैं-स्वयं नकद जमा करा के (इसकी रसीद लेना न भूलें) डिमांड ड्रफ्टभारतीय पोस्टल ऑर्डर सेमनी ऑर्डर से (कुछ राज्यों में लागू) बैंकर्स चैक सेउपरोक्त सभी संबंधित जन अधिकारी के पक्ष में देय होने चाहिए। कुछ राज्य सरकारों ने इसके लिए निश्चित खाते खोले हैं आपको उस खाते में शुल्क जमा करना होता है। इसके लिए स्टेट बैंक की किसी भी शाखा में नकद जमा करके उसकी रसीद आवेदन के साथ नत्थी करनी होती है। या आप उस खाते के पक्ष में देय पोस्टल ऑर्डर या डीडी भी आवेदन के साथ संलग्न कर सकते हैं । कुछ राज्यों में, आप आवेदन के साथ निर्धारित मूल्य का कोर्ट स्टैम्प भी लगा सकते हैं।

 सवाल- क्या जन सूचना अधिकारी मुझे सूचना देने से मना कर सकता है?
जवाब – जन सूचना अधिकारी सुचना के अधिकार कानून अनुच्छेद 8 में बताए गए विषयों से संबंधित सूचनाएं देने से मना कर सकता है। इसमें विदेशी सरकारों से प्राप्त गोपनीयसूचनाएं, सुरक्षा अनुमानों से संबंधित सूचनाएं, रणनीतिक,वैज्ञानिक या देश के आर्थिक हितों से जुड़े मामले, विधानमंडल केविषेशाधिकार हनन संबन्धी मामले से जुड़ी सूचना शामिल हैं। अधिनियम की दूसरी अनुसूची में ऐसी 18 एजेंसियों की सूची दीगई है जहां सूचना का अधिकार लागू नहीं होता है, फिर भी यदिसूचना भ्रष्टाचार के आरोपों या मानवाधिकारों के हनन से जुड़ी हुईहै तो इन विभागों भी सूचना देनी पड़ेगी।

सवाल- मुझे जन सूचना अधिकारी के पते की जानकारी कैसे मिलेगी?
जवाब-यह पता लगाने के बाद कि आपको किस विभाग से सूचना मांगनी है। जन सूचना अधिकारियों के विषय में जानकारी उसी विभाग से मांगी जा सकती है । पर यदि आप उस विभाग में नहीं जा पा रहे है ंया विभाग आपको जानकारी नहीं दे रहा तो आप अपना आवेदनइस पते पर भेज सकते है- जन सूचना अधिकारी, द्वारा विभागप्रमुख विभाग का नाम व पता यह उस विभाग प्रमुख की जि़म्मेदारी होगी कि इसे संबंधित जन सूचना अधिकारी के पास पहुंचाए। आप विभिन्न सरकारी वेबसाइटों से भी जन सूचनाअधिकारी की सूची प्राप्त कर सकते हैं ।

सवाल- क्या कोई जन सूचना अधिकारी मेरा आवेदन यह कह करअस्वीकार कर सकता है कि आवेदन या उसका कोई हिस्सा उससे संबंधित नहीं है?
जवाब-वह ऐसा नहीं कर सकता.अनुच्छेद 6(3) के अनुसार वहसंबंधित विभाग के पास आपके आवेदन के भेजने और इसके बारेमें आपके सूचित करने के लिए बाध्य है।

सवाल- क्या प्रथम अपील के लिए कोई शुल्क अदा करना पड़ता है?
जवाब- नहीं, प्रथम अपील के लिए आपको कोई शुल्क अदा नहीं करना है,हालांकि कुछ राज्य सरकारों ने इसके लिए शुल्क निर्धारित किया हंै, अधिक जानकारी के लिए कृप्या शुल्क नियमावली देखें।
सवाल- कितने दिनों में मैं प्रथम अपील दाखिल कर सकता हूँ?
जवाब- अधूरी या गलत सूचना प्राप्ति के 30 दिन के भीतर अथवा यदि कोई सूचना नहीं प्राप्त हुई। है तो सूचना के अधिकार का आवेदन जमा करने के 60 दिन के भीतर आप प्रथम अपील दाखिल कर सकते हैं।
सवाल- यदि प्रथम अपील दाखिल करने के बाद भी संतुष्टिदायक सूचना न मिले?
जवाब- यदि पहली अपील दाखिल करने के पश्चात भी आपके सूचना नहीं मिली है तब आप दूसरी अपील कर सकते हैं।
सवाल-दूसरी अपील क्या है?
जवाब- आरटीआई के अंतर्गत सूचना प्राप्त करने के लिए दूसरी अपील करना, अन्तिम विकल्प है। दूसरी अपील आप सूचनाआयोग में कर सकते हैं। केंद्र सरकार के विभाग के ख़िलाफ़ अपील दाखिल करने के लिए केंद्रीय सूचना आयोग है। सभी राज्य सरकारों के विभागों के लिए लिए राज्यों में ही सूचना आयोग हैंं।
सवाल- दूसरी अपील के लिए क्या कोई फार्म सुनिश्चित है?
जवाब- नहीं, दूसरी अपील दाखिल करने के लिए कोई फार्म सुनिश्चित नही हैं केंद्रीय अथवा राज्य सूचना आयोग के पते पर आप साधारण कागज पर अपील के लिए आवेदन कर सकते हैं। दूसरी अपील दाखिल करने से पूर्व अपील के नियमों को सावधानी पूर्वक पढे यदि यह अपील के नियमों के अनुरूप नहीं होगा तो आपकी दूसरी अपील ख़ारिज़ की जा सकती हैं।
सवाल- दूसरी अपील के लिए मुझे कोई शुल्क अदा करना पड़ेगा?
जवाब- नहीं, आपको कोई शुल्क नहीं देना है (हालांकि कुछ राज्यों ने इसके लिए शुल्क निर्धारित किये हैं) अधिक जानकारी के लिए शुल्क नियामावली देखें।
सवाल- कितने दिनों में मैं दूसरी अपील दाखिल कर सकता हूँ?
जवाब- पहली अपील करने के 90 दिनों के अन्दर अथवा पहली अपील के निर्णय आने की तारीख के 90 दिन के अन्दर आप दूसरी अपील दाखिल कर सकते हैं।
सवाल- आरटीआई अधिनियम कब अस्तित्व में आया? यदिआप कह रहे हैं कि केंद्र सरकार ने इसे हाल ही में लागू किया है तब आप कैसे कह सकते हैं कि बड़ी संख्या में लोगों ने इससे फायदा उठाया हैं?
जवाब- आरटीआइ अधिनियम 12 अक्टूबर 2005 से अस्तित्व मेंआया इससे पूर्व यह 9 राज्यों में लागू था. ये राज्य हैं – जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट, तमिलनाडू,आसाम तथा गोवा. इनमें से कई राज्यों में यह पिछले 5 वर्षों से लागू था और बहुत अच्छा काम कर रहा था।

सवाल- क्या प्रथम अपील के लिए कोई शुल्क अदा करना पड़ता है?
जवाब- नहीं, प्रथम अपील के लिए आपको कोई शुल्क अदा नहीं करना है,हालांकि कुछ राज्य सरकारों ने इसके लिए शुल्क निर्धारित किया हंै, अधिक जानकारी के लिए कृप्या शुल्क नियमावली देखें।
सवाल- कितने दिनों में मैं प्रथम अपील दाखिल कर सकता हूँ?
जवाब- अधूरी या गलत सूचना प्राप्ति के 30 दिन के भीतर अथवा यदि कोई सूचना नहीं प्राप्त हुई। है तो सूचना के अधिकार का आवेदन जमा करने के 60 दिन के भीतर आप प्रथम अपील दाखिल कर सकते हैं।
सवाल- यदि प्रथम अपील दाखिल करने के बाद भी संतुष्टिदायक सूचना न मिले?
जवाब- यदि पहली अपील दाखिल करने के पश्चात भी आपके सूचना नहीं मिली है तब आप दूसरी अपील कर सकते हैं।

क्रमश:….